
Raipur: दोस्तों हर पेरेंट्स अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए कई तरह की तैयारियां करते हैं। जैसे उन्हें ऊंचे मुकाम पर पहुंचाने के लिए बेहतर से बेहतर स्कूल का चयन करते हैं एवं उन्हें पढ़ाई के दौरान हर संभव सुविधा उपलब्ध कराने की भी कोशिश करते हैं। जिससे उनके बच्चे पढ़ लिख कर एक ऐसा मुकाम हासिल कर सके जहां वह अपनी जिंदगी तो बेहतर ढंग से जिए, साथ ही परिवार का नाम रोशन हो और दूसरों की मदद भी कर सकें।
इसके लिए हर मां बाप कई तरह की कुर्बानियां देते आए हैं। जिससे उनके बच्चों का भविष्य संवार सकें। ऐसी ही एक प्रेरणादाई कहानी हम आपके सामने लेकर आए हैं, जिसमें एक मां जो स्वयं बचपन से पढ़ाई में अव्वल होने की वजह से डॉक्टर बनने का सपना देख रही थी।
परंतु पारिवारिक परिस्थिति अनुकूल ना होने की वजह से वह मुकाम हासिल ना कर सके। परंतु हिम्मत नहीं हारी विवाह पश्चात अपने बच्चों को इस कदर परवरिश दी कि 30 साल बाद आज अपनी बेटी को डॉक्टर बनाया और बेटा आईआईटी से इंजीनियरिंग कर रहा है। आइए जानते हैं एक मां की मेहनत और समर्पण की यह स्टोरी।
खुद नहीं बन सकी परंतु बेटी को बनाया एमबीबीएस डॉक्टर
हम बात कर रहे हैं माधुरी शिंदे (Madhuri Shinde) की जो पुणे महाराष्ट्र की रहने वाली है। ये स्वयं कोटा से मेडिकल एंट्रेंस नीट की तैयारी करना चाहती थी, परंतु उस समय परिवारिक स्थितियां उनकी इस महंगी पढ़ाई को अफोर्ड नहीं कर सकती थी। माधुरी बताती हैं कि उनका मायका रायपुर छत्तीसगढ़ (Raipur CG) का है, जो पहले मध्यप्रदेश का ही हिस्सा हुआ करता था।
माधुरी के पिता किसी बीमारी के चलते हैं, उनके बचपन में ही गुजर गए थे। एवं उनकी मां एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका के रूप में कार्यरत थी। परिवार की सारी जिम्मेदारियां मां के कंधों पर होने की वजह से वह माधुरी को कोटा शहर नहीं भेज सकी।
माधुरी ने अपने शहर से ही बायोलॉजी से बीएससी एवं बाद में एमएससी की परीक्षा पास की। उस समय तो वह अपना सपना पूरा नहीं कर सकी परंतु शादी के 30 साल बाद अपनी बेटी को नीट क्वालीफाई करके डॉक्टर बनाया। इनकी बेटी वर्तमान में चंद्रपुर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई कर रही है।
मां के सपोर्ट की वजह से बेटे ने भी अपनी पढ़ाई का लोहा मनवा दिया
दोस्तों हम बात कर रहे हैं माधुरी शिंदे जी के छोटे बेटे ज्ञानेंद्र शिंदे (Gyanendra Sinha) की इनके पिता नाम मिस्टर हेमंत शिंदे है। ज्ञानेंद्र शुरू से ही पढ़ाई में काफी अच्छे थे। उनकी मां भी पढ़ाई में काफी आगे जाना चाहती थी, जिस वजह से अपने दोनों बच्चों को उन्होंने शुरू से ही पढ़ाई का बेहतर माहौल देना शुरू किया ताकि, वह किसी वजह से अपनी पढ़ाई में पिछड़ ना सके। इसी का नतीजा आज देखने को मिल रहा है कि, ज्ञानेंद्र ने जी मेंस के एंट्रेंस में हंड्रेड परसेंट टाइल लाकर अपनी पढ़ाई का लोहा मनवा दिया।
जी मेंस में 100 परसेंटाइल लाने से पहले दसवीं में आए थे 98 प्रतिशत
जानकारी के अनुसार ज्ञानेंद्र ने बताया की दसवीं क्लास में उनके 98 प्रतिशत आए थे। जैसे यह रिजल्ट सबके सामने आया पूरा परिवार खुशी से झूम उठा। इतने अच्छे रिजल्ट के बाद ज्ञानेंद्र की बहन जो आज एमबीबीएस कर रही है।

उन्होंने ज्ञानेंद्र को मोटिवेशन दिया कि पढ़ने में वह बहुत अच्छा है और चाहे तो आगे किसी बहुत बड़े इंस्टिट्यूट से हायर एजुकेशन भी ले सकता है। बस इसके लिए उसको ध्यान देना होगा अपनी सेल्फी स्टडीज में। तो ज्ञानेंद्र ने अपने स्कूल एवं कोचिंग के अलावा लगभग 6 घंटे रोज Self Study को देना शुरू कर दिया, और यही Self Study उनके लिए वरदान साबित हुई।
माधुरी अपनी तैयारी के लिए कोटा जाना चाहती थी
आज जब भी किसी कंपटीशन एग्जाम में टॉप रैंकर्स की बात करें, तो सब में एक ही बात कॉमन पाई जाती है कि वह कहीं ना कहीं कोटा के किसी न किसी इंस्टिट्यूट से तैयारी कर रहे थे। इसीलिए आज कोटा को स्टूडेंट के भाषा में कोटा फैक्ट्री के नाम से जाना जाने लगा है जहां ब्रिलियंट बच्चे बनाए जाते हैं।



