
Noida: आजकल उच्च डिग्री प्राप्त करना एक फैशन बन गया है। आज हायर एजुकेशन से ही लोग डिसाइड करते है कि व्यक्ति कितनी तरक्की हासिल करेगा। अगर कोई हायर एजुकेशन प्राप्त नहीं करता है। तो लोगो कि सोच होती है कि वह व्यक्ति जीवन में कुछ बड़ा हासिल नहीं कर सकता।
समाज की एक बड़ी विडम्बना है कि सफलता को आपकी डिग्री से तोलकर देखा जाता है। लेकिन हम जानते है कि अगर कुछ कर दिखाने का जज्बा आपमे नही है, आपमें किसी काम के प्रति मेहनत लगन नही है। तो किसी डिग्री का कोई मोल नही होता है। इस बात को सावित करते है शैलेश कुमार (Shailash Kumar)।
आज नोएड़ा (Noida) के सेक्टर 65 में एक बिल्डिंग में सिलाई मशीन की सहायता से होजरी का काम काफी धडल्ले से चल रहा है। लेकिन इस बिजनेस यूनिट को चलाने वाले व्यक्ति शैलेश कुमार सिर्फ 10वी तक पढ़े है। आज शैलेश के कारोबार का टर्नओवर 3.35 करोड़ रूपये का है। आइये जानते है होजरी का बिजनेस (Hosiery Business) करने वाले शैलेश कुमार के जीवन के विषय में।
शैलेश जी का परिचय
शैलेश यूपी के ऐटा से बीलोंग करते है। वह केवल दसवी तक पढ़े है। भले ही उनकी शिक्षा कम रही हो, लेकिन उनका जज्बा कुछ कर दिखाने का कम नही था। उनका सपना बचपन से एक बड़ा अमीर आदमी बनने का था। वह चाहते थे कि अपनी मेहनत से वह बहुत पैसे कमाए।
बहुत ही कम ऐसा होता है कि लोगो के जज्बे, स्किल्स और किस्मत का तालमेल एक साथ बैठे, पर शैलेश उन लोगो में से है जिनके साथ यह हुआ। जिसके कारण वह एक कामयाब व्यक्ति बन पाए ओर आज भी वह सफलता की नई ऊँचाई छू रहे है।
शैलेश कुमार जी का प्रांरभिक जीवन
बचपन में ही शैलेश कुमार के पिता इस दुनिया से अलविदा कह चुके थे। उनकी माता ने उन्हें पाला उन्हे दसवी तक शिक्षा दिलाई। 1995 में वह पहली बार नोएडा आये। यहॉं आने के बाद अक्सर ही वह यहा आना जाना करने लगे। यहॉं आकर उनका सपना बस यही होता था कि वह ऐसा क्या करे जिससे की अमीर बन सके।
काफी समय उनका ऐसे ही निकल गया। फिर एक बार उनके किसी रिश्तेदार ने सिलाई यूनिट्स को वर्कफोर्स उपलब्ध कराने का काम उनके साथ शुरू किया। इस काम के बाद से ही शैलेश ने यह डिसाइड किया कि वह एक दिन अपने स्वयं के गारमेन्टस का व्यापार शुरू करेंगे। शैलेश ने 1 साल सिलाई की सभी बारीकियो को सीखा। फिर उसके बाद 2016 में उन्होंने 100000 रूपये की पूँजी लगाकर पल्लवी इंटरप्राइजेज (Pallavi Enterprises) नाम से अपना करोबार शुरू किया।
2016 में बिजनेस अपनी पूँजी से शुरू किया
प्रारंभ मे शैलेश की यूनिट में सिर्फ 2 सिलाई मशीन थी तथा 3 लोग काम करने वाले थे। लेकिन आज उनकी यूनिट में 12 लोग है। जिनमें हर किसी का वेतन 15 से 16 हजार रूपये है। उनकी यूनिट से बाहर सामान श्रीराम एक्सपोर्ट के नाम से एक्सपोर्ट भी होता है।

इनकी यूनिट में हौजरी गारमेंट्स (Gosiery Garments) बनते है। उनके सामान की बिक्री ई कॉमर्स से भी होती है। उनके ब्रांड को एसएसडीएसएस के नाम से जाना जाता है। जहॉं पर 99 रूपये से लेकर 1999 तक का प्रॉडक्ट मिलता है।
शैलेश ने अपना बिजनेस अपनी पूँजी के सहारे शुरू किया। वह कहते है आज वह जितना भी विस्तार अपने बिजनेस का करते है वह अपनी कमाई से ही करते है। किसी भी तरह का लोन उन्होंने आज तक नहीं लिया।
कोरोना में हुआ व्यापार ठप तो पीपीई किट बनाने का काम किया
शैलेश बताते है कि जब देश में कोरोना का समय आया उसके पहले तक उनकी हौजरी का सामान फ्रांस, अमेरिका तथा जापान जेसे बड़े देशो में एक्सपोर्ट होता था। पर लॉकडाउन के कारण उनका एक्सपोर्ट रूक गया था।
वह बताते है कि लॉकडाउन के पहले उन्हें अमेरिका देश से एक बड़ा ऑर्डर आया था। पर वह पूरा नही हो पाया था क्योंकि उस समय लॉकडाउन लग गया था। वह बताते है वह ऑर्डर अभी कैंसिल नही हुआ है। जिसे वह अब पूरा करने वाले है। लॉकडाउन में उनका व्यवसाय ठप ना पड़े, इसलिए उन्होंने पीपीई किट बनाने का काम भी किया। उन्होंने अन्य यूनिट्स के साथ मिलकर 3 महीने में 3 लाख पीपीई किट बनाई थी।
अपने बिजनेस को चाहते है और भी बढ़ाना
शैलेश की जो सिलाई यूनिट है वह अभी 520 पीस हर दिन तैयार करती है। इस बिजनेस से शैलेश काफी ज्यादा खुश भी है। इसे वह और भी बढ़ाना चाहते है। अब वह अपनी यूनिट कही और शिफ्ट करने की तैयारी कर रहे है जहॉं वह 50 सिलाई मशीन को लगाएंगे। इसे भी वह अपनी पूँजी से ही बढ़ाने वाले है।
इसके अलावा शेलेश टाइल्स का बिजनेस भी करना चाहते है। यह बिजनेस यूनिट वह गोवा में खोलने वाले है। शैलेश जी ने भले ही हायर एजूकेशन हासिल नहीं कि लेकिन अपने हुनर के कारण ही इतने सफल व्यक्ति बन पाये है। जो यह साबित करता है कि डिग्री सिर्फ एक कागज का टुकड़ा है। अगर मेहनत लगन जज्बा आपके अंदर नही है तो उसका कोई मोल नही होता है।



