कारखाना मजदूर की बेटी सोनम यादव खेली अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप, इस हुनर से सबको हैरान किया

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Sonam Yadav
Glass factory laborer daughter Sonam Yadav is playing Under 19 cricket world cup. She Made India Win World Cup, Know Everything About Sonam.

Firozpur: क्रिकेट का जादू भारत में हर किसी के सर चढ़कर बोलता है। बल्कि कहीं कहीं लोग तो यह मानते हैं कि, शायद क्रिकेट ही हमारे देश का राष्ट्रीय खेल है। आप देख सकते हैं भारत क्रिकेट के हर फॉर्मेट पर जबरदस्त परफॉर्म कर रहा है। चाहे वह वनडे मैच, हो चाहे 5 दिन का टेस्ट मैच हो या 2020 फॉर्मेट हो।

आपको बताना चाहेंगे कि भारत दुनिया का इकलौता देश है, जो क्रिकेट में हर प्रकार के फॉर्मेट का वर्ल्ड कप जीत चुका है। जैसे अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप का फाइनल, ओ डी आई वर्ल्ड कप फाइनल एवं 2020 वर्ल्ड कप फाइनल के अलावा महिला क्रिकेट के वर्ल्ड कप फाइनल का भी इंडिया हासिल कर चुका है।

ऐसे ही आज हम आपको एक यंग महिला चैंपियन से मिलाने वाले हैं, जिन्होंने सिर्फ 16 साल की उम्र में साउथ अफ्रीका में खेले जा रहे अंडर-19 महिला वर्ल्ड कप (Under-19 Woman Cricket World Cup) में अपने खेल का लोहा मनवा लिया। जबकि बैकग्राउंड के मामले में यह मजदूर परिवार से आती है। आइए जानते हैं इनकी संघर्ष और सफलता की संपूर्ण कहानी।

उत्तर प्रदेश के किस जिले से ताल्लुक रखती है सोनम

दोस्तों हम जिस खिलाड़ी की आज बात कर रहे हैं, उनका नाम सोनम यादव है। जिनका जन्म 2007 में फिरोजपुर के ताला गांव में हुआ था। इनके पिताजी ग्लास फैक्ट्री में मजदूरी का काम करते हैं। परिवार में सोनम के अलावा उनके चार भाई बहन और भी है एवं इनकी मां घर संभालने का काम करती है।

आज इस खिलाड़ी की चर्चा हर तरफ हो रही है, परंतु सोनम की सफलता का सेहरा यूं ही नहीं बंधा इसके पीछे उनके और उनके परिवार की अटूट मेहनत छिपी है। जिसमें पिता से लेकर भाई तक ने सोनम को हर परिस्थिति में सपोर्ट किया और आज सोनम ने वर्ल्ड कप जीत कर देश को एक नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

बेटी के क्रिकेट को सपोर्ट करने पिता ने किए डबल शिफ्ट काम

सोनम (Sonam Yadav) के पिता मुकेश यादव ने बताया कि, उन्होंने जब देखा कि उनकी बेटी क्रिकेट के प्रति काफी उत्साहित है और खेल के दौरान अच्छा परफॉर्म करती है तब, उन्होंने बेटी को क्रिकेट कोचिंग दिलाने के उद्देश्य से अपनी फैक्ट्री में डबल शिफ्ट काम करना प्रारंभ किया, ताकि इस एक्स्ट्रा इनकम से सोनम की कोचिंग एवं क्रिकेट के खेल का खर्चा उठाया जा सके।

आपको बता दें कि सोनम लेफ्ट हैंड से बॉलिंग करती है, जबकि यह राइट हैंड बैट्समैन है, उनका यही कॉम्बिनेशन उन्हें एक यूनिट खिलाड़ी बनाता है। यह 16 साल की लड़की एक बेहतरीन बॉलर के साथ-साथ बैट्समैन भी है।

भाई ने सपोर्ट किया बहन को प्रैक्टिस के दौरान

उनके परिवार में पांच भाई बहन हैं, जिनमें सबसे बड़े भाई की बात करें तो कभी वह भी क्रिकेट में अपना कैरियर बनाना चाहता था। परंतु बहुत प्रयास के बाद वह किसी बड़ी टीम में अपनी जगह नहीं बना सका। समय के साथ उसने भी पिता की फैक्ट्री में काम करना प्रारंभ कर दिया।

जब उसने देखा बहन सोनम अच्छा खेल खेल रही है, तो उसे लगा कि क्रिकेट में आगे बढ़ने का उसका सपना बहन के जरिए पूरा किया जा सकता है। तब से वो अपनी फैक्ट्री से समय निकालकर सोनम को प्रैक्टिस करवाने के लिए पूरे पूरे दिन तैयार रहता था। उसने अपनी बहन को चैंपियन बनने के हर पहलू पर सपोर्ट दिया। और वर्ल्ड कप जीतने के बाद कहीं ना कहीं उसे लगता है कि उसका सपना भी पूरा हो गया।

पूरे गांव को गर्व है सोनम सफलता पर, तैयारी है जोरदार स्वागत की

आपको बता दें आज भारत अंडर-19 महिला क्रिकेट का वर्ल्ड कप जीत चुका है। जिसमें सोनम के विकेट का अहम योगदान रहा। जैसे ही वर्ल्ड कप जीतने की खबर ताला गांव को लगी पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई एवं गांव में जिस गली में सोनम रहती है, उसे सोनम की गली के नाम से जाना जाने लगा।

जैसे ही सोनम का उनके गांव आगमन की तारीख तय हुई, तो पूरा गांव एवं आसपास के कई जिलों के लोग ताला गांव पहुंचे सोनम के भव्य स्वागत के लिए। हाईवे के दूर टोल से उसके घर तक लोगों ने रैली निकाली ढोल नगाड़े बजाए एवं मिठाईयां बांटी। सोनम की मां एवं घर के सभी सदस्य उसकी सफलता से फूले नहीं समा रहे। हम भारत की इस बेटी को आने वाले भविष्य के लिए ढेरों शुभकामनाएं देते हैं।

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