Unnao: दोस्तों भारत ने हाल ही में अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप (Woman Under-19 Cricket World Cup) जो साउथ अफ्रीका में आयोजित किया गया था, उसे बड़े मार्जिन के साथ जीत लिया है। इसमें भारत की ऑपोजिट टीम इंग्लैंड को हमारे गेंदबाजों ने सिर्फ 68 रनों की पारी पर समेट दिया। यह ऐतिहासिक जीत का श्रेय अगर गेंदबाजों को दिया जाए तो कुछ गलत नहीं होगा।
टीम के तमाम बॉलर्स के बीच एक नाम है अर्चना देवी का, जिनकी गेंदबाजी ने बल्लेबाजों के छक्के छुड़ा दिया। एवं देश को आज वर्ल्ड कप जीतने के मुकाम तक पहुंचाया। सामने से देखने में हमें लगता है कि, इनकी जिंदगी कितनी आसान रही होगी।
दोस्तों यदि आप अर्चना देवी के वर्ल्ड कप फाइनल जीतने तक के सफर को जानेंगे तो आप आंसू बहाए बिना रह नहीं सकेंगे। इन्होंने अपने जीवन में वह संघर्ष झेले हैं, जिन्हें हम सुनकर भी कांप जाते हैं। परंतु उनके धैर्य और साहस की तारीफ करेंगे जो इतनी तकलीफ के बाद भी अपने लक्ष्य से नहीं डिगी।
आज हर उस युवा को अर्चना देवी से प्रेरणा लेनी होगी कि सफलता कभी भी थाली में सजाके प्राप्त नहीं होती। उसके लिए खुद को काबिल बनाना होता है और संघर्ष करना होता है, हर सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों से जूझते हुए।
देश के इस जिले एवं राज्य की रहने वाली अर्चना देवी
दोस्तों जिस महान खिलाड़ी की हम बात कर रहे हैं उनका पूरा नाम है अर्चना देवी निषाद (Cricketer Archana Nishad) जिनका जन्म 2003 में ग्राम पुरवाई उन्नाव (Unnao) जिला उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में हुआ था। इनके पिता का नाम शिव राम निषाद एवं माता का नाम श्रीमती सावित्री देवी है।
इन्होंने प्राथमिक पढ़ाई कस्तूरबा गांधी विद्यालय गंज मुरादाबाद से की एवं आगे क्रिकेट की तैयारी के लिए कानपुर जाने का मौका मिला। जिसके लिए परिवार से तो सक्षम नहीं थी, परंतु इनके कोच ने अहम भूमिका निभाई आज अर्चना देवी क्रिकेट की ऑलराउंडर मानी जाती है बैटिंग एवं बॉलिंग दोनों की भूमिका बेहतरीन तरीके से निभा रहे हैं।
अर्चना की स्कूल टीचर का अहम रोल है इन्हें एक क्रिकेटर बनाने में
जानकारी के अनुसार कस्तूरबा गांधी विद्यालय में आठवीं तक पढ़ाई करने के दौरान इनकी शिक्षिका पूनम गुप्ता ने देखा कि अर्चना एक अच्छी खिलाड़ी बन सकती है, परंतु परिवार से कमजोर है। इसलिए स्वयं आगे बढ़कर वह अर्चना को कानपुर ले गई एवं कपिल पांडे जो क्रिकेट के एक बेहतरीन कोच माने जाते हैं, उनके सानिध्य में कोचिंग ज्वाइन करवा दी।
देश को गौरवान्वित होने का अवसर देने के लिए सुश्री अर्चना देवी निषाद का आज पूरा देश आभारी है।
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अर्चना निषाद ने अंडर-19 महिला विश्वकप के फाइनल मुकाबले में शुरवाती ओवरों में दो विकेट चटकाकर इंग्लैंड की कमर तोड़ दी। इससे भारत की शानदार जीत हुई। pic.twitter.com/lnulEM5MBc— Anil Kumar Mishra (@archi_anil) February 1, 2023
इन्होंने ही कोच के साथ मिलकर फंड इकट्ठा किया और अर्चना को एक किराए का कमरा उपलब्ध करवाया। आपको बता दें की प्रसिद्ध क्रिकेटर कुलदीप यादव के कोच भी कपिल पांडे जी हैं। जिस वजह से कोचिंग के दौरान बीच-बीच में कुलदीप यादव भी उनके साथ प्रैक्टिस किया करते थे और उन्हें फील्ड के प्रैक्टिकल अनुभव की टीचिंग देते थे।
पिता के गुजरने के बाद सारी जिम्मेदारी आई माता के ऊपर
एक घटना के चलते 2008 में अर्चना के पिताजी की मृत्यु हो गई तब यह सिर्फ 5 वर्ष की थी। इसके बाद परिवार की सारी जिम्मेदारियां माता सावित्री पर आ गई। और जैसे दुनिया के गम का सारा पहाड़ सिर्फ सावित्री जी पर फूट पड़ा।
यह तस्वीर महिला क्रिकेट विश्व कप जिताकर देश को गौरवान्वित होने का अवसर देने के लिए सुश्री अर्चना देवी निषाद के जनपद उन्नाव (UP) में बांगरमऊ क्षेत्र के गंगा तलहटी स्थित गांव रतईपुरवा में अर्चना के घर की है जब टीवी पर अर्चना के लाइव मैच का प्रसारण देखा जा रहा था। pic.twitter.com/LNDsD3tErR
— हम लोग We The People (@ajaychauhan41) February 1, 2023
वही कुछ समय बाद सांप के काटने से इनके बेटे की भी मृत्यु हो गई जिसके चलते परिवार एवं समाज के अन्य लोग सावित्री डायन और उनके परिवार को अपशगुन जैसा शब्दों से बुलाने लगे। इस दौरान कोई सही रोजगार ना होने की वजह से कई कई दिन तक इन्हें भूखे भी रहना पड़ता था। परंतु मां ने हिम्मत नहीं हारी और बेटी को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रही। समाज ने यहां पर हमेशा उनसे सौतेला व्यवहार ही किया।
वर्ल्ड कप जीतने के बाद बदली गांव वालों की नजरें अब मिल रही इज्जत
वर्तमान परिस्थिति में जैसे ही वर्ल्ड कप में अर्चना देवी ने दो विकेट एवं कैच लेकर गेम का रुख बदला और जीत हासिल की। वैसे ही इनके गांव में इनको देखने के प्रति लोगों का नजरिया बदला।
Under-19 Women ICC World Cup winning team member Archana Nishad is welcomed on her arrival, at her native place, in Unnao . pic.twitter.com/aLxlCLORR4
— Tv9 Gujarati (@tv9gujarati) February 6, 2023
आज हर कोई स्वागत सत्कार के लिए उनके आगे पीछे घूमता है और हर तरफ इनका सम्मान किया जा रहा है। दोस्तों सफलता कुछ कीमत मांगती है, जो चुकानी ही पड़ती है, अर्चना देवी और उनकी मां के इस संघर्ष को हम सलाम करते हैं।




