डबल सेंचुरी जड़ने वाले शुभमन गिल की ऐसी शानदार बल्लेबाज़ी इन मज़दूरों की वजह से हुई है, पूरी कहानी

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Shubman Gill
Indian Cricketer Shubman Gill Success Story. Photo source : Twitter.

Mumbai: भारत में क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं है, बल्कि लोगों की दीवानगी का सबब बन चुका है, पिछले कुछ सालों से 20-20 आने के बाद तो लोगों का रुझान और अधिक बढ़ता जा रहा है। क्योंकि सिर्फ 3 घंटे के इस गेम में ढेरों चौके, छक्के एवं बेहतरीन बॉलिंग परफॉर्मर्स देखने मिल जाता है। इसलिए जब भी कोई खिलाड़ी आउटस्टैंडिंग परफारमेंस देता है, तो रात और रात पूरे देश का फेवरेट प्लेयर बन जाता है।

अभी हाल ही के एक वनडे मैच में 23 साल के शुभमन गिल (Shubman Gill) ने डबल सेंचुरी मार के सबको चौका दिया। देखने में साधारण परंतु बैटिंग के एकदम परफेक्ट प्लेयर माने जा रहे हैं। इनका यह सफर अंडर सिक्सटीन से शुरू हुआ था। जिसमे भी उन्होंने वर्ल्ड रिकॉर्ड (World Record) कायम किया।

इस सफलता के पीछे है शुभमन की पिछले कई सालों की अटूट मेहनत जिस वजह से आज वह क्रिकेट प्रेमियों के लिए प्रेरणा बन गया है। चलिए जानते हैं यह यंग चैंप कहां से हैं, इनका परिवार और कैसे तय किया सफलता के इस मुकाम तक का सफर।

पंजाब के इस शहर में जन्मे एवं पले बढ़े

दोस्तों शुभमन का जन्म 8 सितंबर 1999 को पंजाब के ही छोटे से गांव फलजिका में हुआ था इनकी माता एक हाउसवाइफ कीरत गिल है और वहीं इनके पिता का नाम लखविंदर सिंह है। पेशे से बलविंदर एक किसान हैं जो अपने गांव में ही खेती का काम करते हैं। वही स्पोर्ट्स बैकग्राउंड की बात करें तो शुभमन के दादाजी भी कभी कबड्डी खेल के चैंपियन रहे हैं।

खेल खेलने और उसमें जीतने की भावना शायद उन्हें अपने दादाजी से ही गिफ्ट के तौर पर मिली है। शुभमन के पिता लखविंदर बताते हैं कि, बचपन से उसका क्रिकेट के प्रति दीवानगी देखकर मैंने ठान लिया था कि, उसे हर संभव सपोर्ट करूंगा। उसके इस पैशन को पूरा करने में जिसका नतीजा आज हमारे सामने है दोस्तों।

3 साल की उम्र में ही दिख गई क्रिकेट की दीवानगी

शुभमन के पिता बलविंदर बताते हैं कि,जब यह 3 साल का था तो अन्य बच्चे खिलौनों से खेलना पसंद करते थे। वही शुभमन बैट बॉल की जिद करता था, और बैट बॉल के प्रति उसका इतना लगाव था कि, सोते वक्त भी वह अपने बिस्तर में सीने से चिपका कर सोता था। चूंकि दादाजी भी खिलाड़ी थे इसलिए शुभमन की खेल भावना वह जल्दी भांप गए।

उसे सही माहौल देने के लिए खेत में ही एक छोटी सी पिच तैयार कर ली। क्योंकि वहां कोई टीम तो थी नहीं इसलिए शुभमन को अधिक से अधिक बैटिंग की प्रैक्टिस कराने के लिए खेत के मजदूरों से ही बॉलिंग करवाने लगे। जल्दी ही शुभमन एक अच्छा बैट्समैन बनने लगा।

शुभमन को सही कोचिंग दिलाने परिवार सहित शिफ्ट हुए मोहाली

मजदूरों के द्वारा बॉलिंग प्रैक्टिस करवाने के दौरान शुभमन लंबी पारी खेलने लगा। आलम यह था कि पिताजी ने शुभमन को आउट करने वाले बॉलर को 100 RS का इनाम देने की घोषणा कर दी, उन्हें आउट करना तो दूर वह सुबह से लेकर देर रात तक बैटिंग किया करते थे।

सही समय देखकर बलविंदर ने फैसला किया कि अब शुभमन तैयार है और उसे बड़ी कोचिंग की जरूरत है, खेल को निखारने के लिए तो वह अपने परिवार समेत मोहाली शिफ्ट हो गए और सिर्फ 8 साल की उम्र में उन्हें क्रिकेट एकेडमी में दाखिला दिला दिया।

अंडर 16 और अंडर 19 से ही दिखा दिया था बैटिंग का जलवा

दोस्तों शुभमन सिर्फ 8 साल की उम्र में सुबह 3:30 से उठकर 4 घंटे क्रिकेट की प्रैक्टिस करते थे,उसके बाद स्कूल की पढ़ाई। इस मेहनत का नतीजा था, अंडर 16 में शुभमन ने ओपनिंग पार्टनरशिप में 587 रन का स्कोर बनाया, जो एक वर्ल्ड रिकॉर्ड बना। 2017 में अंडर-19 में चुने गए और यहां भी उन्होंने 1149 रन 104 की औसत से बना के एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया।

आज शुभमन की बैटिंग परफॉर्मेंस के कारण वह IPL T20 के अलावा भारत की नेशनल टीम के वनडे मैच, टेस्ट मैच एवं T20 जैसे सभी फॉर्मेट में अपना स्थान पा चुके हैं। पूरे देश को इस नए बैट्समैन (Batsman) से बहुत आशाएं हैं और हम इनके बेस्ट परफॉर्मेंस के लिए ऑल द बेस्ट विश करते हैं।

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