
Rohtak: प्रतिवर्ष यूपीएससी की परीक्षा पूरे भारत स्तर पर आयोजित होती है, जिसमें लाखों उम्मीदवार प्रतिवर्ष शामिल होते हैं। कुछ उम्मीदवार पहली बार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, तो कुछ 4 से 5 बार इस परीक्षा को देकर अनुभव प्राप्त कर लेते हैं।
यूपीएससी की परीक्षा (UPSC Exam) भारत की सबसे कठिन परीक्षा में से एक है, इसीलिए हर वर्ष लाखों उम्मीदवार परीक्षा में शामिल जरूर होते हैं, परंतु उनमें से मात्र चुनिंदा लोग ही इस परीक्षा को पास कर पाते हैं। यूपीएससी की परीक्षा त्याग और समर्पण की कामयाबी है।

इस परीक्षा के उम्मीदवार सोशल मीडिया के साथ-साथ परिवार से भी कोसों दूर हो जाते हैं। उसके बाद वह दिन रात अपने कंफर्ट जोन को छोड़कर पढ़ाई करते हैं। उनकी यह सफलता त्याग और समर्पण का फल होता है। इस परीक्षा में निरंतर प्रयास करने की जरूरत होती है।
यदि कोई भी उम्मीदवार इस परीक्षा असफल होने के बाद यदि दोबारा प्रयास नहीं कर सकता, तो उसका इस परीक्षा के लिए तैयार होना या पास करना बेहद मुश्किल होता। आज इस लेख के माध्यम से हम आपको एक ऐसी युवती की सफलता के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने अपने अथक प्रयास से देश का मान बढ़ाया है।
आईएएस अधिकारी अंकिता चौधरी की कहानी
हम बात कर रहे हैं हरियाणा (Haryana) की रहने वाली अंकिता चौधरी (Ankita Chaudhary) की। जिन्होंने वर्ष 2018 में यूपीएससी की परीक्षा में 14 वी रैंक हासिल कर अपना सपना पूरा। उनकी कहानी से शिक्षा मिलती है कि लगातार प्रयास करने से सफलता 1 दिन कदम चूमती हैं।
आज अंकिता उन लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनी है, जो इस परीक्षा को पास करने के लिए अथक परिश्रम कर रहे हैं। अक्सर लोग संसाधनों के अभाव के चलते अपने सपनों को छोड़कर अन्य कामों में लग जाते हैं, परंतु कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो कुछ ना होते हुए भी अपनी काबिलियत से सब कुछ पा लेते हैं।
ऐसी है हरियाणा राज्य के रोहतक (Rohtak) के अंतर्गत आने वाले छोटा सा गांव महम की रहने वाली अंकिता चौधरी जिनके पिता सत्यवान अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत हैं और उनकी बेटी अब आईएएस के पद (IAS Officer Post) पर कार्यरत हैं। अंकिता बचपन से ही चाहती थी कि वे एक बहुत बड़ी अफसर बने जब उनका सपना पूरा हुआ तो उनके साथ साथ उनका पूरा परिवार भी बहुत खुश हुआ।
शुरुआत से ही हर क्षेत्र में रहे हैं आगे अंकिता चौधरी
अंकिता के पिता सत्यवान चौधरी का कहना है कि उनकी बेटी बचपन से ही सभी क्षेत्रों में अपना स्थान बनाते आई हैं खेल हो या शिक्षा उनके लिए जीत मानो एक जुनून थी। आगे बताते हैं कि अंकिता बचपन से ही चाहती थी कि वह एक बड़ा मुकाम हासिल करें। साथ ही अपने माता-पिता का नाम रोशन करें स्कूली शिक्षा के दौरान वह सभी क्लासों में टॉप पर आती थी।
उन्होंने स्पोर्ट्स गेम भी काफी खेले हैं और सभी खेलों में वह आगे ही रहे। कक्षा 12वीं की पढ़ाई कंप्लीट करने के बाद वे दिल्ली से हिंदी यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। उस वक्त केवल उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा देने की विषय में मात्र सोचा था परंतु तैयारी प्रारंभ नहीं की।
स्नातकोत्तर पढ़ाई कर शुरू की यूपीएससी की तैयारी
स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद अंकिता ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज में प्रवेश लिया और स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने मास्टर्स के लिए कॉलेज में प्रवेश लिया और पूरी निष्ठा के साथ स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की।
इसी दौरान उन्होंने अपनी मां को भी एक सड़क हादसे में खो दिया। मुश्किलों का सामना करते हुए अंकिता आगे बढ़ रही थी। उन्होंने कभी मुश्किलों से हार नहीं मानी बल्कि उसका डटकर सामना किया। जिस वक्त उनकी मां का देहांत हुआ उस वक्त अंकिता यूपीएससी की परीक्षा में मशरूफ थी।
1 year into the #IAS
A life of being happy , being grateful !!
first day @LBSNAA pic.twitter.com/LeA5AmrBHO— Ankita Choudhary (@Ankita25_ias) August 25, 2020
मां के जाने के बाद अंकिता जरा भी नहीं टूटी उस हालात में भी उन्होंने कड़ी मेहनत की और सफलता प्राप्त कर मां को अपनी सफलता श्रद्धांजलि के रूप में समर्पित की। भारत की इस बेटी पर न केवल उनके पिता बल्कि पूरा भारत गर्व करता है।
दूसरे प्रयास में बनी आईएएस अधिकारी अंकिता चौधरी
मां के जाने के पश्चात अंकिता ने अपने परिवार को और खुद को संभाला और एक बार फिर से यूपीएससी की तैयारी में जुट गई वर्ष 2017 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा दी, परंतु उन्हें सफलता नहीं मिली। परंतु उन्होंने इस असफलता को एक सकारात्मकता सोच के साथ दोबारा प्रयास के लिए जुट गई।
Never let a day pass without looking for the good, feeling the good within u, praising, appreciating, blessing and Being GRATEFUL. #IAS pic.twitter.com/bYeNDpmKxO
— Ankita Choudhary (@Ankita25_ias) August 31, 2020
इस बार उन्होंने अपनी कमियों को अपनी ताकत बनाते हुए वर्ष 2018 की परीक्षा में शामिल हुई। इस बार उन्हें सफलता प्राप्त हुई और भी वर्ष 2018 में आईएएस अधिकारी के लिए चुनी गई, उन्हें 14 वी रैंक प्राप्त हुई।



