बेटा बचपन से घर की साइकिल पंचर की दकान में काम किया और इस तरह IAS अधिकारी बन गया

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IAS Varun Baranwal
How Varun Baranwal Became IAS Officer From Cycle Mechanic. From repairing cycles to becoming an IAS officer, Story of Varun Baranwal.

Delhi: जैसे कि हम जानते हैं कि यूपीएससी की परीक्षा देश की सबसे जटिल परीक्षा है। इस परीक्षा में 3 चरण होते हैं। यदि दो चरण पास करने के बाद आखिरी चरण में फेल हो जाते हैं, तो इसकी शुरुआत दोबारा पहले चरण से करनी होती है, इसीलिए यह परीक्षा और भी ज्यादा जटिल हो जाती है, इसके बावजूद भी देश के 80 फ़ीसदी युवा यूपीएससी को अपना करियर चुनते हैं।

हर वर्ष लाखों युवा अपने अपने सपनों के साथ इस परीक्षा में बैठते हैं, जिनमें से कुछ ही लोग चुने जाते हैं। दोस्तों इस परीक्षा में उसी का चुनाव होता है, जो धैर्य के साथ अथक परिश्रम करने के लिए तैयार होता है। इस परीक्षा में सफलता की खास बात यह है कि इसकी उपलब्धि अपने आप में ही एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।

UPSC HQ
Union Public Service Commission

भारत देश में काफी सारे ऐसे आईएएस और आईपीएस अधिकारी हैं, जिन्होंने अपने जीवन में काफी मुसीबतों का सामना किया उसके बाद भी वे अपने लक्ष्य पर अडिग रहे और इस सफलता को अपने नाम किया। ज्यादातर लोगों ने आर्थिक तंगी का सामना किया है, जो एक बहुत बड़ी समस्या है। आज हम बात करेंगे एक ऐसे आईएएस अधिकारी (IAS Officer) की, जिसने साइकिल में पंचर कर लगाने का काम (Cycle Punchar Work) करते हुए यूपीएससी की तैयारी की।

आईएएस अधिकारी वरुण बरनवाल की कहानी

महाराष्ट्र राज्य के अंतर्गत आने वाले बाइसोर के निवासी आईएएस अधिकारी वरुण बरनवाल (IAS Varun Baranwal) की कहानी काफी प्रेरणा देने वाली है। दोस्तों ऐसे मेहनती व्यक्ति पर कुछ लाइन एक दम परफेक्ट बैठती है जैसे “मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है”। आपको बता दें वरुण बरनवाल ने अपने पिता की मृत्यु के बाद अपनी मां और घर को संभाला था।

IAS Varun Baranwal UPSC

उनके घर में साइकिल के पंचर की दुकान थी, उनके पिता पंचर बनाने का काम करते थे, इसीलिए उन्होंने उनके कारोबार को ही अपना लिया था। विपरीत परिस्थितियों के चलते उन्हें अपनी पढ़ाई भी बीच में छोड़नी पड़ी, परंतु उन्होंने इन परिस्थितियों से भी कभी हार नहीं माना। उन्होंने सभी चुनौतियों को हंसते हुए पार किया और अपनी मंजिल पर पहुंच गए।

परिस्थितियों ने छुड़वा दी पढ़ाई

आईएएस अधिकारी वरुण बरनवाल बताते हैं कि सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था, परंतु अचानक से उनके पिता की मृत्यु हो गई, जिसके बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके ऊपर आ गई। उस वक्त में कक्षा दसवीं में थे।

परिवार की जिम्मेदारी के चलते उन्होंने घर में उपलब्ध साइकिल मरम्मत की दुकान में काम सीखा और इस काम में लग गए। इसी बीच उन्होंने कक्षा दसवीं की परीक्षा भी दी। वरुण पढ़ाई में काफी इंटेलिजेंट है। इसी के चलते उन्होंने कक्षा दसवीं में पूरे शहर में टॉप किया था। परंतु उनके घर के हालात ठीक ना होने की वजह से उन्होंने अपनी पढ़ाई को बीच में ही छोड़ दिया।

दोबारा फिर वे पढ़ाई के माहौल में लौटे

वरुण बरनवाल बताते हैं कि उनके घर में काफी दिक्कतें आ रही थी पैसों को लेकर। पैसों की परेशानी की वजह से ही उन्होंने अपनी पढ़ाई को बीच में ही रोक दिया था, परंतु उनके परिचित एक डॉक्टर उनके लिए ईश्वर की तरह बनकर आए। उनके कहने पर उन्होंने दोबारा अपनी पढ़ाई प्रारंभ की कक्षा 12वीं की परीक्षा देने के पश्चात उन्होंने कॉलेज में एडमिशन लिया और इंजीनियरिंग की पढ़ाई प्रारंभ की।

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वरुण की मेहनत काफी सराहनीय है, क्योंकि उन्होंने साइकिल की दुकान पर काम करते हुए अपनी पढ़ाई की इतना ही नहीं उन्होंने साइकिल की दुकान पर काम करते करते कॉलेज के फर्स्ट ईयर में टॉप किया था। वरुण पंचर बनाने की दुकान में काम करने के बाद बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया करते थे। साथ ही अपनी पढ़ाई भी करते थे। जब उन्होंने कॉलेज में टॉप किया, तो उन्हें कॉलेज की तरफ से स्कॉलर भी दी गई।

शुरू की यूपीएससी की तैयारी

कॉलेज में जब उन्हें स्कॉलरशिप प्राप्त होने लगी, तो उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा (Civil Service Exam) में आगे बढ़ने का फैसला लिया। वे बचपन से चाहते थे कि वह देश की सेवा में अपना योगदान दे सकें।

उन्होंने अपने जीवन में काफी संघर्ष किया यूपीएससी की परीक्षा में भी उन्होंने 8 वर्ष तक लगातार संघर्ष करने के बाद 32 वी रैंक हासिल करके अपने लिए आईएएस अधिकारी का पद रिजर्व किया। वरुण बरनवाल बचपन से ही समाज और उनसे जुड़े कार्यों को करने के लिए तत्पर रहा करते थे। उन्होंने समाजसेवी अन्ना हजारे के जनलोकपाल बिल के लिए हुए आंदोलन में भी शामिल हुए।

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