छोटे कद के कारण लोग इन्हे बोझ बताते रहे, फिर बेटी ने IAS अधिकारी बनकर नाम रोशन कर दिया

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IAS Arti Dogra
3.5-foot IAS officer Arti Dogra is inspiration for specially-abled candidates. IAS officer Arti Dogra struggle and success story.

Dehradun: दोस्तों इंसान की काबिलियत उसकी सूरत रंग रूप कद काठी को देखकर नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह चीजें एक मोह होती है, जो समय के साथ टूट भी जाती है। व्यक्ति अपने सूरत नहीं बल्कि सीरत से जाना जाता है। यदि किसी व्यक्ति की सीरत अच्छी है, परंतु वह सुंदर नहीं है तो उसकी छवि अन्य व्यक्तियों पर बहुत अच्छी बनती है।

यदि व्यक्ति सुंदर है और उसके अंदर सीरत नहीं है, तो वह व्यक्ति सुंदर होने के बावजूद भी एक खराब छवि बना लेता है। अक्सर लोगों के मन में रंग रूप काला गोरा कद काठी को लेकर काफी सारी उधेड़बुन होती है, कई बार तो लोग अपना कॉन्फिडेंस लेवल भी खो देते हैं।

इन चीजों के चलते परंतु आपको बता दें इन सब चीजों के मायने तब खत्म हो जाते हैं, जब आप किसी बड़ी सफलता को अंजाम देते हैं। समाज में उसी व्यक्ति की इज्जत है जो एक अच्छे पद पर कार्यरत है और स्वभाव का धनी है। इन्हीं में शामिल है आरती डोंगरा जो अपने छोटे कद के कारण सोशल मीडिया पर फेमस हुई।

आईएएस अधिकारी आरती डोगरा की कहानी

आईएएस अधिकारी आरती डोगरा उत्तराखंड (Uttarakhand) राज्य के अंतर्गत आने वाले देहरादून (Dehradun) की रहने वाली है एक शिक्षक परिवार से ताल्लुक रखती हैं, उनके पिता राजेंद्र डोगरा भारतीय सेना में कर्नल के पद पर कार्यरत है और उनकी माता कुमकुम डोगरा एक विद्यालय में प्रधानाध्यापिका के पद पर कार्य करती हैं।

आपको बता दें आरती डोगरा (IAS Arti Dogra) का कद 3 फीट 3 इंच (3.3 Feet hight) है, जिसकी वजह से लोगों का कहना था कि वे अपने माता-पिता पर बोझ है। परंतु उन्होंने अपनी काबिलियत और मेहनत से साबित कर दिया है कि वे अपने माता-पिता पर बोझ नहीं बल्कि उनकी ताकत है। ढेरों परेशानियों के चलते आरती डोगरा ने अपने हौसलों को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया।

आज भी अपनी मेहनत की बदौलत समाज में रियल हीरो बन गई है। विपरीत परिस्थितियों के चलते भी उन्होंने अपने हौसले नहीं हारे बल्कि मेहनत से परिस्थितियों का मुकाबला करते हुए वह सब हासिल किया जो वह करना चाहती थी।

अर्थशास्त्र से की स्नातक की पढ़ाई

रिपोर्ट के अनुसार आरती के माता पिता उनके दिव्यांगता के बारे में उनके जन्म के समय से ही जानते हैं। डॉक्टर ने बताया कि उनका शरीर का पूर्ण विकास नहीं होने की वजह से भी दिव्यांग है। यह जानते हुए भी आरती के माता-पिता ने दूसरा बेबी प्लान नहीं किया वे चाहते थे कि उनकी बेटी आरती की देखभाल में अच्छी तरह कर सके और उसे अच्छी शिक्षा और परवरिश दे सकें।

आरती ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा देहरादून के एक प्रसिद्ध इंग्लिश मीडियम स्कूल से कि उसके बाद उन्होंने लेडी श्री राम गर्ल्स कॉलेज से अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन किया। आरती का शारीरिक विकास अपूर्ण था, परंतु उनका मानसिक विकास पूरी तरह हो गया था जिसकी वजह से वह पढ़ाई में हमेशा अव्वल रही है।

उन्होंने अपनी शारीरिक कमी को खुद पर कभी हावी नहीं होने दिया। इस बात का प्रमाण उन्होंने आईएएस अधिकारी बनकर दिया। कॉलेज की पढ़ाई के बाद में यूपीएससी की तैयारी में जुट गई।

पहले प्रयास में अपने नाम के झंडे गाड़े

रिपोर्ट के मुताबिक आरती डोगरा ने अपने स्नातक की पढ़ाई के तुरंत बाद यूपीएससी की तैयारी प्रारंभ कर दी। उन्होंने आईएएस बनने के लिए दिन रात एक कर दिया। उन्होंने सबसे पहले रणनीति तैयार की जिसमें सबसे पहले उनका टारगेट यूपीएससी प्रीलिम एग्जाम था जिसे क्वालीफाई करने के बाद उन्होंने खुद को यूपीएससी मैंस के लिए तैयार किया।

इसके बाद साक्षात्कार देकर आईएएस पद के लिए चुनी गई। आरती डोगरा ने अपनी मेहनत के दम पर पहले प्रयास में यह सफलता हासिल की। उनकी सफलता ने उनके माता-पिता का मान तो बढ़ाया ही साथ ही उन लोगों का मुंह पर ताला लगा दिया जो आरती को माता पिता पर बोझ समझते थे।

आरती डोगरा के कार्यों से पीएम मोदी भी हुए खुश

जानकारी के अनुसार आरती डोगरा की ट्रेनिंग के पश्चात पहली पोस्टिंग राजस्थान के बीकानेर जिले में हुई थी जहां उन्होंने स्वच्छता अभियान को संबोधित करते हुए बंको बिकाड़ो स्वच्छता अभियान’ की मुहिम चलाई थी जहां उन्होंने 195 ग्राम पंचायत कबर की थी और लोगों को यह संदेश दिया कि स्वच्छता में ही स्वास्थ्य।

उन्होंने स्वयं गांव गांव जाकर खुले में शौच ना करने की अपील की। इस अभियान से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी काफी खुश हुए और उनकी इस मुहिम को काफी सराहा। इसके बाद इस प्रकार के अभियान की नकल कई शहरों में और कई राज्यों में हुई। उनके इस कार्य में उन्हें हीरो बना दिया था, वे हर राज्य में काफी चर्चित रही।

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