
Delhi: यूपीएससी परीक्षा में चयनित होना देश भर के युवाओं की पहली चाहत होती है। कई युवा एक बार असफल होने के बाद दोबारा प्रयास करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते, तो कुछ ऐसे भी युवा होते हैं जो कई असफलताओं के बाद भी अपने लक्ष्य से नहीं भटकते इन्हीं में शामिल हैं कर्नाटक (Karnataka) राज्य के तुमकुर (Tumakuru) जिले के निवासी अरुणा एम।
कहते हैं एक व्यक्ति तब तक कुछ नहीं कर सकता जब तक उसका सही समय नहीं आता। अरुणा पांच बार यूपीएससी की परीक्षा (UPSC Exam) में असफल रही। असफलताओं ने उन्हें मजबूती दी कुछ बेहतरीन करने की। वे अपनी असफलताओं से निराश नहीं हुई।
वर्ष 2021 में उन्होंने एक बार फिर प्रयास किया और इस बार वे सिलेक्ट ही नहीं बल्कि टॉप करने वालो की लिस्ट में शामिल थी। उन्होंने इस परीक्षा में 308 वी रैंक प्राप्त की। वर्ष 2021 में टॉप 10 में सबसे ऊपर के 4 रैंक में लड़किया थी। इस बात से साबित होता है कि देश में महिला शक्ति सबसे ज्यादा शक्तिशाली है।
अरुण की कहानी में उनके पिता का साथ नहीं मिल सका, क्योंकि अरुणा (Aruna M) के पिता ने बहुत पहले आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद भी अरुणा ने अपने सपनो को पूरा किया। तो आइए जानते है अरुणा एम के बारे में विस्तार से।
कर्ज ने मजबूर किया पिता को आत्महत्या करने में
कर्ज एक ऐसी बीमारी है, जो व्यक्तियों की रातों की नींद और दिन का चैन छीन लेती है। कभी-कभी व्यक्ति ऐसी परिस्थिति से इतना विवश हो जाता है कि उसके अंदर जीने की इच्छा ही खत्म हो जाती है। ऐसा ही कुछ अरुणा के पिता के साथ हुआ वे कर्ज में पूरी तरह डूब चुके थे।
उन्होंने अपने 5 बच्चों की शिक्षा के लिए कर्ज लिया था और पर धीरे-धीरे बढ़ता चला जा रहा था। वे कर्ज को चुकाने में सक्षम नहीं थे। इसीलिए वर्ष 2009 में उन्होंने मौत को चुन लिया। उस वक्त अरुणा अपने इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही थी। उन हालातों को अरुणा की दो बड़ी बहनों ने अच्छी तरह संभाला।
उन्होंने कई वर्षों तक नौकरी की और अपना परिवार संभाला। उनके पिता चाहते थे कि उनकी पांच बेटियां स्वतंत्रता पूर्वक अपना जीवन जिए और यूपीएससी परीक्षा दे अरुणा ने यूपीएससी क्रैक करके उनके पिता का सपना पूरा किया।
यूपीएससी क्रैक करने का कोई इरादा नहीं था फिर किया पिता का सपना पूरा
अरुणा अपने पिता की तीसरे नंबर की संतान थी वे कभी यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में बैठना ही नहीं चाहती थी और ना ही यूपीएससी परीक्षा को पास करना उनका कोई लक्ष्य था। वह इंजीनियर की पढ़ाई करके एक कंपनी में साधारण सी नौकरी करना चाहती थी, वह खुद को केबल स्वतंत्र बनाना चाहती थी। जैसा उनके पिता चाहते थे।

यूपीएससी के सभी उम्मीदवारों का यूपीएससी क्रैक करने का लक्ष्य होता है, परंतु अरुणा बिल्कुल इसकी ऑपोजिट थी। अरुणा ने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल कर अपनी ही एक योजना बना रखी थी, परंतु उनके पिता के जाने के बाद उन्होंने अपने पिता का सपना पूरा करने के लिए अपनी सारी योजनाओं को बदल दिया। अरुणा कहती हैं कि मेरे पिता ने अपनी बेटियों को स्वतंत्र बनाने के लिए इतना कर्ज लिया जिसे वे चुका ना सके जो आगे चलकर उनके लिए एक चुनौती बन गई।
अरुणा ने छठे प्रयास में टॉप पोजीशन हासिल की
अरुणा कहती है कि मैं इंजीनियर बन सकूं इसेलिए मेरे पिता ने काफी सारा कर्ज ले रखा था जिसमें मेरी पढ़ाई अच्छी तरह हो और मैं डिग्री हासिल कर सकूं, परंतु इस कर्ज ने मुझसे मेरे पिता को छीन लिया। पिता के जाने के बाद उन्होंने समाज सेवा और किसानों की मदद के लिए आगे आई वे किसानों की मदद करके अपने पिता को खुश करना चाहती थी।
अपने पिता के सपने को भी अपना बनाया और उस पर अमल किया उनके पिता चाहते थे कि उनकी बेटियां यूपीएससी परीक्षा दे और सफलता हासिल करें, इसलिए उन्होंने वर्ष 2014 से कठिन अध्ययन करके सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी 5 बार विफल रही छठी बार में उन्हें झंडे गाड़ सफलता मिली उन्होंने 308 वी रैंक प्राप्त की।
लगातार असफलताओं से उन्होंने कभी हार नहीं मानी साथ ही उन्होंने समाज सेवा करना भी नहीं छोड़ा। अरुणा बेंगलुरु में खुद का यूपीएससी कोचिंग सेंटर चला रही है जिसका नाम अरुणा कोचिंग सेंटर हैं। इस सेंटर में ग्रामीण वर्ग के युवाओं को यूपीएससी परीक्षा के लिए मोटिवेट करती है।
अरुणा को टॉप करने की कोई उम्मीद नहीं थी
अरुणा कहती हैं कि वे टॉप करने की उम्मीद भी नहीं कर सकती थी। जब उन्होंने 308 वा रैंक हासिल करके एक शानदार जीत हासिल की है उन्हें इसकी जरा भी उम्मीद नहीं थी। क्योंकि वह पांच बार असफल हुई।
Meet Aruna M from Karnataka’s Tumkur district.
Her father ended his life as he was unable to repay the mounting debt which he had incurred to pay for the #education of his five children.
Now She has cleared #UPSC AIR 308 👏
Aruna fulfilling her father's dream. #Inspiration pic.twitter.com/bNaTngF98B
— Shantanu Prakash (@shantanutalk) June 2, 2022
उन्होंने अरुणा अकादमी की शुरुआत की जिसमें वे ग्रामीण बच्चों को यूपीएससी परीक्षा के लिए मोटिवेट करती हैं, इसके बाद उन्होंने अपना छठा और आखरी प्रयास किया और शानदार जीत हासिल की।
UPSC Topper M Aruna special Interview : ಅಪ್ಪನ ಸಾವಿಗೆ ನ್ಯಾಯ ಒದಗಿಸಲು ಐಎಎಸ್ -ಅರುಣಾ | National TV
video: https://t.co/rw8YOjmWei#2022UpscTopper #UpscExam #IAS #IPS #Arunainterview #Education #Police #NationalTV pic.twitter.com/2QTuFckRyO
— National TV (@nationaltvnewz) June 2, 2022
अरुणा ने पिछड़े वर्ग कोटा से यूपीएससी परीक्षा नहीं दी, वह अनारक्षित वर्ग से इस परीक्षा मैं बैठी थी और सफलता हासिल की वह कहती है कि आज मेरे पिता का सपना पूरा हो गया, अब मेरा लक्ष्य है कि मेरे पिता की तरह अन्य किसानों की मदद करके उन्हें आत्महत्या जैसे कामों से रोका जा सके।



