
Pune: हर व्यक्ति का जीवन सरल नहीं होता सभी व्यक्तियों को अपने जीवन में कहीं ना कहीं कठिनाइयों का सामना करना ही पड़ता है। गरीबी एक ऐसी बीमारी है जो लोगों को कुछ भी करने पर मजबूर कर देती हैं। इस गरीबी ने कई लोगों का बचपन छीना है, तो कई लोगों के सपने छीने हैं। परंतु व्यक्ति की इच्छा शक्ति के आगे गरीबी भी हार मान लेती है, इस बात का उदाहरण है आईएएस अधिकारी रमेश घोलप (IAS Officer Ramesh Gholap)।
यह वे व्यक्ति है जिन्होंने बचपन से ही संघर्ष किया। उन्होंने साबित किया कि इंसान गरीब पैदा होता है परंतु जीवन भर गरीब नहीं रहता। आईएएस अधिकारी रमेश घोलप एक बहुत ही गरीब परिवार के बेटे थे उनके पिता शराबी थे और माता चूड़ियां बेचकर (Bangle selling) घर चलाती थी।
रमेश ने अपनी माता के साथ चूड़ियां बेचकर भी दिन काटे हैं। परंतु समय चक्र के साथ उन्होंने जब चलना प्रारंभ किया तो उनका समय पूरी तरह बदल गया उन्होंने अपने पुराने समय को इस तरह बदला कि आज वे आईएएस अधिकारी हैं। तो चलिए आगे के लेख में हम आईएएस रमेश की संपूर्ण कहानी के बारे में जानें।
बेहद कठिन दौर से गुजरे हैं रमेश
आईएएस रमेश महाराष्ट्र (Maharastra) राज्य के सोलापुर जिले (Solapur district) के अंतर्गत आने वाली तहसील वारसी के एक गांव में जन्मे है। रमेश के पिता की एक साइकिल रिपेयरिंग की दुकान थी जहां से वे थोड़ा बहुत कमा कर सारा पैसा शराब पीने में खर्च कर देते थे। उनकी शराब की लत के कारण उनका पूरा परिवार बिखर रहा था।
कहते हैं मुसीबत पर ही मुसीबत आती हैं ऐसा ही कुछ रमेश के साथ हुआ पिता शराबी उस पर उन्हें डेढ़ साल की उम्र में बाएं पैर पर पोलियो हो गया। वे दो वक्त की रोटी भी बड़ी मुश्किल से कमा पाते थे। रमेश की मां गांव-गांव घूम कर चूड़िया बेचती थी तब जाकर दो वक्त का खाना नसीब होता था। अपनी मां के साथ रमेश और उन का छोटा भाई दोनों गांव में जाकर चूड़ियां बेचते थे।
पढ़ाई के प्रति थे जुनूनी
गरीबी भरे दौर में रमेश और उनके परिवार के हाथों में कुछ नहीं था परंतु रमेश के हाथ में एक चीज थी वह थी उनकी शिक्षा और उसके प्रति लगाव। उन्होंने गांव में ही रह कर प्राथमिक विद्यालय से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की।
इसके बाद आगे की शिक्षा के लिए गांव में कोई सुविधा नहीं थी इसलिए वे घर से अपने चाचा के घर रहने लगे और आगे की पढ़ाई शुरू की। जब वे 12वीं कक्षा में थे तब उनके पिता का देहांत हो गया। उसके बाद उन्हें गांव आना था अपने पिता के अंतिम संस्कार के लिए, परंतु उनके पास गांव पहुंचने के लिए पैसे नहीं थे।
Ramesh Gholap, who used to sell bangles on the street as a child, cracked the UPSC examination with an All India Rank of 287. Now, 9 years later, this 2012 batch IAS officer has been posted in Jharkhand as the Joint Secretary in the Energy Department. Kudos to him!#Jharkhand pic.twitter.com/AyXSrtWrMs
— Ketto (@ketto) January 14, 2021
वे पोलियो ग्रस्त थे, इसलिए दिव्यांग की श्रेणी में आते थे, दिव्यांग का किराया मात्र 2 RS था, परंतु रमेश के पास इतना पैसा भी नहीं था। फिर पड़ोसियों ने उनकी मदद की तब जाकर वह अपने पिता के अंतिम संस्कार के लिए गांव पहुंचे।
बारहवीं कक्षा के इम्तिहान के समय पिता का देहांत
जिस वक्त रमेश के पिता का देहांत हुआ था उस वक्त रमेश के 12वीं कक्षा के परीक्षा प्रारंभ होने वाली थी। वे अपनी मां को इस हालत में छोड़कर नहीं जाना चाहते थे, परंतु जब उनकी मां ने उन्हें समझाया तो वह 12वीं की परीक्षा दी और 88.5 अंको से परीक्षा पास की।
उन्होंने ग्रेजुएशन और डीएड किया, इसके बाद उन्हें शिक्षक की नौकरी मिल गई, परंतु कुछ समय बाद उन्होंने शिक्षक की नौकरी छोड़ पूरी मन लगाकर यूपीएससी की तैयारी की।
With left leg affected by polio, Ramu used to sell Bangles to sustain himself and supppor this poverty-ridden family ( #Solapur)
But with mother's support & pure DETERMINATION, Ramu without any coaching class cracked CIVIL exams and is now #IAS officer Ramesh Gholap#Salute pic.twitter.com/3EwzzJjIxR— Srikanth Matrubai (@SrikantMatrubai) January 20, 2022
उस समय सरकारी नौकरी आम नागरिकों के लिए एक वरदान था और खासकर रमेश के परिवार के लिए और भी ज्यादा। रमेश ने काफी बड़े सपने देख रहे थे, इसीलिए वे यूपीएससी (UPSC Exam) की तैयारी के लिए पुणे चले गए।
आईएएस अधिकारी रमेश घोलप का संघर्ष
पुणे (Pune) जाने के बाद अपना खर्चा चलाने के लिए रमेश ने काफी सारे काम किए उन्होंने पोस्टर तक पेंट किया परंतु उनकी मेहनत सफल हुई। वर्ष 2011 में वे आईएएस अधिकारी (IAS Officer) के पद के लिए चुने गए।
Experience makes a man better understand and deal with sufferings.
A case in point is Ramesh Gholap,who despite the hardships became an IAS officer. And now working overtime help people suffering because of Corona crisis. @RmeshSpeaks @dckoderma #SaturdayMorning #Jharkhand pic.twitter.com/Rhy6PLdruo— WeYo Good Mood (@WeYoGoodMood) July 4, 2020
एक समय इस लड़के ने ढेरों चुनौतियों का सामना किया पोलियो की बीमारी, शराबी पिता और मां के साथ चूड़ियां तक बेची पोस्टर पेंट किए और आखिर में वे यूपीएससी में 287 रैंक (UPSC 287 Rank) के लिए चुने गए। रमेश उनके लिए उदाहरण बने जो ऊंचे ख्वाब देखते हैं, परंतु कमी के चलते वह आगे नहीं बढ़ पाते।



