गलवान घाटी में असल में जो हुआ, उस पर चौकाने वाला तथ्य सामने आया है, एक नहीं, इतनी झड़पे हुई

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Jammu/India: चीन के साथ LAC पर जारी मसले को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीनों सेनाओं के प्रमुखों और सीडीएस जनरल बिपिन रावत के साथ एक अहम् बैठक की है। इस हाई लेवल बैठक में लद्दाख की स्थिति की समीक्षा की गई है। इस दौरान रक्षा मंत्री ने सेना को चीन की किसी भी हरकत का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार रहने को कहा है।

मीडिया सूत्रों के अनुसार सुरक्षा बलों को LAC पर चीन आर्मी PLA की तरफ से किए गए किसी भी आक्रामक व्यवहार का ठोस रिप्लाई देने पूरी स्वतंत्रता दी गई। इसके अलावा बैठक में सुरक्षाबलों से हर दिखा में चीन की हर हरकत पर पैनी नजर रखने के लिए कहा गया है। इन सबके बाद लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई उस घटना के बारे में अभी तक मीडिया सूत्रों के माध्यम से बहुत जानकारी पता चली है।

देश की जनता वह जान्ने को बेताब है की उस दिन गलवान घाटी में दोनों सेनाओं के बीच क्या हुआ था। इस मामले की खबर अब मिलना शुरू हो चुकी है। आपको बता दे की कुछ दिन पहले दोनों सेनाओं के बीच लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत हुई थी और फिर पट्रोलिंग पॉइंट 14 को लेकर स्थिति बदल गई। कारण था की पहले चीन और फिर रिप्लाई में भारत की सेनाएँ LAC के बहुत पास तक पहुँच गई थीं।

गलवान घाटी की घटना की पूरी कहानी(Full Story Of Galwan Valley Incident)

चलो यह बात पुख्ता हो गई है कि चीनी सेना ने गलवान नदी के किनारे अपनी एक पोस्ट और तम्बू का निर्माण किया था, जो कि भारतीय सीमा के अंदर थी, जिसे हटाने को लेकर दोनों देशों के सैनिकों के बीच चर्चा और रज़ामंदी भी हो गई थी। इसके बाद चीनी सेना द्वारा उक्त पोस्ट को हटा दिया गया था। परन्तु 14 जून, 2020 को आश्चर्यजनक ढंग से चीनी सेना ने रातों रात उसी पोस्ट को फिर से बना लिया।

इसके बाद 15 जून को जब इस हरकत की खबर भारतीय सैनिकों को मिली, तो शाम 5 बजे बिहार रेजिमेंट के अफसर कर्नल संतोष बाबू ने अपनी 35 जवानों की टीम के साथ उस पोस्ट का दौरा किया। जिस जगह पर कर्नल बाबू अपनी टीम के साथ जाँच करके गए थे, वह स्थान भारतीय सीमा में आता है।

कर्नल संतोष बाबू भारतीय जवानों के साथ जब उस पोस्ट पर गए, तो उन्होंने देखा कि पोस्ट पर नए चीनी सैनिक आ गए हैं, को की चौंकाने वाली बात थी। उस पोस्ट पर जो चीनी सैनिक तैनात किए गए थे, जो तिब्बत में तैनात किये जाने वाले सनी सैनिक थे। भारतीय सेना के उस पोस्ट पर आते ही चीनी सेना के जवान हरकत में आ गए। जब कर्नल बाबू ने उस पोस्ट पर चीनी सेना की मौजूदगी का के होने का कारण जानना चाहा, तो एक चीनी सैनिक ने आगे बढ़कर आकर बाकी सनी सेना के सैनिको को इशारा करते हुए भारतीय सेना के कर्नल संतोष बाबू को जोर से धक्का देकर घकेला।

असल में भारत और चीनी सेना में 3 झड़पे हुई थी

यह होने देश दोनों सेनाओं के बीच झड़प शुरू हो गई। यह पहली झाड़ो लगभग 30 मिनट तक चली। जिसमे दोनों तरफ के कुछ सैनिक कुश हताहत हुए। भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों को हटाया और उस अवैध पोस्ट को उखाड़कर आग भी लगा दी। भारतीय सेना जवानो ने चीनी सैनिकों को LAC के उस पार तक पीछे कर दिया था।

कर्नल बाबू को कुछ अंदेशा हो रहा था, तो उन्होंने हताहत हुए सभी जवानो को वापस नीचे भेज दिया और पोस्ट पर ज्यादा संख्या में सैनिकों को बैकअप के लिए पहुंचाने का आदेश दिया। मीडिया में यह बताया गया की सेना अधिकारी ने कहा कि भारतीय सेना जवान बहुत चीनी सेना को सबक सिखाना चाहते थे, परन्तु उन्हें शांत रहने कहा गया।

कर्नल बाबू का वह अंदेशा सही निकला और गलवान घाटी के पास बड़ी तादात में छिपे बैठे चीनी सैनिकों ने भारतीय सेना के अन्न जवानों के आते ही पत्थर फेफना चालू कर दिया। इसे दूसरी झड़प कहा जा सकता है, यह लगभग 300 सैनिकों के बीच लगभग 40-45 मिनट तक हुई। इसी के चलते कई सैनिक नदी में गीत गए जिनमे कर्नल संतोष बाबू भी थे।

भारतीय जवानों ने चीनी सेना के धोखे हो वक़्त रहते भांप लिया

तभी भारतीय जवानों ने नदी के ऊपर चीनी ड्रोन को देखा। इसे देखते ही भारतीय जवान चीन की चाल सकझ गए और अब वे तीसरी झड़प के लिए की तैयार थे , उन्हें पता चल गया था की अब चीन की सेना फिर से बड़ी हरकत करेगी। इसीलिए ज्यादा संख्या में जवानो को बुलाया गया। बैकअप आते ही भारतीय सेना के जवानों ने LAC पर घाट जमाये रखी।

उसके बाद रात 11 बजे चीनी सेना फिर से आगे आई और उन्हें रोकने के लिए घाटी पर दोनों ओर के जवान झड़प करते हुए गलवान नदी में जितने लगे। 5 घंटे की झड़प का अंत यह रहा की भारतीय जवानो ने अनेक चीनी जवानों की गर्दन झटके से मोड़ते मोड़ते उन्हें घरशाही कर दिया। उसी झड़प में चीनी सेना के 18 सैनिक निपट गए और भागने लगे। उनका पीछा करते हुए भारतीय सेना के जवानों ने अन्न चीनी सैनिको को पकड़ पकड़ कर दर्घण मोड़ दी। ऐसा करने से कुल 40-45 चीनी सैनिक निपट गए। हालाँकि यह आंकड़ा और भी ज्यादा है, परन्तु इसकी पुष्टि ना होने से इसे 45 से ज्यादा बढाकर नहीं बताया जा सकता।

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