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Charkhi Dadri: भारत के कुछ क्षेत्र की महिलाएं बिलकुल पुरुष से टक्कर लेकर चलती है। वैसे तो पूरे भारत की महिलाए पुरुष के कंधे से कंधा मिला कर काम कर रही है, परंतु कुछ क्षेत्र ऐसे भी है, जहाँ महिलाए पिछड़ी हुई है। अब कह सकते है कि देश तरक्की कर रहा है। लोग पैसे के साथ साथ विचारों से भी आमिर बन रहे है।
एक बेटी को दुनिया से कुछ नहीं लेना होता बस वह एक सपोर्ट चाहती है, जो उसके माँ बाप उसे करे और अब बेटियों की काबिलियत इतनी बढ़ चुकी है कि अब माँ बाप उन पर आंख बंद कर करके भरोसा करते है। आज कल तो हर जगह, हर क्षेत्र में लड़कियां उन्नति कर रही है। जमीन से लेकर आसमान तक में रास्ता बना रही है।
न्यूज़ पेपर हो या न्यूज़ चेंनल सब जगह बेटिओं के कारनामे के किस्से चलते है। पहले के समय में लोग बेटी को बोझ मानते थे, क्योंकि एक प्रथा थी, जिससे हर माँ बाप डरते थे और गरीबो के लिए यह अभिशाप से कम नहीं था।
दहेज प्रथा बेटी के साथ साथ एक अच्छी खासी रकम और ढेर सारा सामान इन सब चीज़ों के चलते बेटियो ने बहुत कुछ झेला है, परंतु आज उनके दिन बदल चुके है, क्योंकि आसमान के विमान को उड़ाने से लेकर जमीन की बसों को तक महिलाए सड़कों पर दौड़ा रही है। ऐसी ही कहानी है हरियाणा राज्य की जहा पर 3 महिलाये हेवी ड्राइविंग कर रही है, तो आइए जानते है विस्तार से।
पुरुषों से कम नहीं महिलाऐं
यह कहानी हरियाणा (Haryana) राज्य के चरखी दादरी (Charkhi Dadri) जिले की है। किसी भी जगह जब भी कभी हैवी व्हीकल ड्राइव करने की बात होती है, तो लोगों के मन में सिर्फ एक ही ख्याल आता है कि यह काम सिर्फ पुरुषों के लिए है, क्योंकि यह काम महिलाओं से नहीं हो सकता, स्वास्थ शरीर के साथ एक हिम्मत वाला जिगर चाहिय होता है, परंतु ऐसे कैसे कोई भी इस बात को मान लेता है कि महिलाओं में वो काबिलियत नहीं होती। सिर्फ महिला पुरुष के फर्क के आधार पर लोग क्यों जज कर लेते है।
इन्ही बातों पर छोटी सोच को मुहतोड़ जबाब दिया, हरियाणा की तीन बहादुर और काबिल बेटियों ने। हरियाणा की इन बेटियों ने अपनी मेहनत और काबिलियत के बल पर हैवी व्हीकल ड्राइव (Heavy Vehicle Drive) करने का गौरव प्राप्त किया है। बहुत जल्द अब यह तीनों। दिल्ली की सड़कों पर डीटीसी बसें दौड़ाते नजर आएंगी। आगे की कहानी में इन बेटियो के इस कठिन सफर में शुरुआत से सफलता प्राप्त करने तक की कहानी जानेंगे।
तीनो बेटियो का परिचय
हरियाणा राज्य के चरखी दादरी जिले का गांव अख्त्यारपुरा की रहने वाली शर्मिला, हरियाणा के मिसरी गांव की रहने वाली भारती और मौड़ी गांव की रहने वाली बबीता धवन डीटीसी बस में एक चालक के पद पर नियुक्त की गई हैं।
हरियाणा की शान ये तीनों बेटियों ने अपनी ड्यूटी जॉइन कर ट्रेनिंग भी शुरू कर चुकी है और बहुत जल्द ये तीनों भारत की राजधानी दिल्ली की सड़कों पर डीटीसी बस दौड़ाएंगी महिला वर्ग और हरियाणा के लिए ये सबसे बड़ा गौरव है।
इन तीनों से एक प्रश्न पूछा गया कि उनका अभी तक का सफर किस प्रकार बीता, तो उन्होंने बताते हुए कहा कि शुरुआती सफर कुछ खास नहीं था, क्योंकि लोग उनपर भरोसा नहीं कर पाते थे और काबिलियत को जज करते थे।
हमेशा यही सुनने मिलता था कि यह काम लड़कियों के करने लायक नहीं है, जो लायक है, उसे करो। परंतु हिम्मत नहीं हारी और धीरे-धीरे अपनी मेहनत और लगन के बल पर लोगो की यह अवधारणा तोड़ी की यह काम लड़कियो के बस का नहीं है। विचारो को गलत साबित कर गांव में अपना एक नाम बनाया।
ड्राइविंग सीखने का कारण
मौड़ी की बबीता ने 2016 में, मिसरी की भारती ने 2018 में और अख्त्यारपुरा की शर्मिला ने 2019 में अपना डीटीसी का प्रशिक्षण पूर्ण किया। इनका परिवार बहुत गरीब था और घर चलाने के लिए और परिवार की मदद के लिए उन्होंने ड्राइवरी सीखने का निश्चय किया।
शर्मिला की शादी अख्त्यारपुरा गांव में हुई थी और उनका मायका महेंन्द्रगढ़ में है शर्मिला कहती है कि एक समय उनका बेटा बहुत बीमार हो गया और शर्मीला के पति को गाड़ी चलानी नहीं आती थी और बेटे को हर दूसरे तीसरे दिन हॉस्पिटल ले जाना पड़ता था। एक-दो बार के बाद परिचितों ने भी जाने से मना कर दिया। इस लिए शर्मिला ने गाड़ी चलाना सीखी, जिससे बच्चे को स्वयं हॉस्पिटल ले जा सके। इसी के बाद से उन्होंने ड्राइवरी करना सीखा।
पिता की मदद के लिए सीखा ट्रेक्टर चलाना
दूसरी तरफ मौड़ी गांव की बबीता ने अपने पिता की मदद के लिए ड्राइवरी सीखी। बबिता के पिता पेशे से किसान है, इसलिए बबिता ने उनके साथ खेती में हाथ बंटाने के लिए ट्रैक्टर चलाना सीखा था। इसके बाद डीटीसी बस चलाने के लिए हैवी लाइसेंस के लिए ट्रेनिंग ली और बस चलाना सीखा।
मिसरी गांव की रहने वाली भारती कहती है कि वे पांच बहनें हैं, उनका कोई भाई नहीं है। कहते है बेटा बाप के बुढ़ापे की लाठी होता है, इसलिए वो लाठी भारती बनी उन्होंने परिवार में बेटे की कमी को पूरा किया और आज वे एक बेटी के फर्ज के साथ साथ बेटे का भी फर्ज एक चालक बनकर निभा रही है।



