एक ऐसी जूता कंपनी BATA, जो अपने देश में बर्बाद होने के बाद भारत चल पड़ी, हो गई फेमस

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Bata Shoes Company
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File Photo Credits: Bata Company

Delhi: कोई नाम इतनी आसानी से नहीं बनता। मेहनत और संघर्ष के साथ साथ लोगो की बातों को भी सुनना पड़ता है, तब सफलता मिलती है। आज भारत में कई विदेशी कंपनी आकार अपना नाम बना रही है और पैसे भी कमा लेती है।

ये जरुरी नहीं होता की हम जिस काम को कर रहे है, वो काम उसी जगह पर सफल हो कभी कभी जगह भी बदलनी होती है। आज हम बात करने जा रहे है ‘Bata’ कंपनी की, जो एक जूता चप्पल का ब्रांड है। यह कंपनी भारत में बहुत ही पसंद की जाती है, क्योंकि इस कंपनी के उत्पाद की गुणवत्ता काफी अच्छी है।

Bata कंपनी के जूते चप्पल सस्ते और काफी आराम दायक होते है और भारत के लोगो को यही चाहिए है, इसलिए यह कंपनी इतनी फेमस है। आपको बता दे यह विदेशी कंपनी (Foreign Company) है। शायद आप लोग यह बात नहीं जानते होंगे। तो आज की इस पोस्ट में हम Bata कंपनी का इतिहास जानेंगे, शुरुआत से लेकर पब्लिश होने तक इस कंपनी का संघर्ष भरा सफर जानेंगे।

Bata कंपनी एक विदेशी कंपनी है

हर भारतीयों को Bata कंपनी के उत्पाद बेहद पसंद है। किसी की जुबान पर बाटा का नाम होता है और लोग Bata को स्वदेशी कंपनी समझते है, परंतु आपको बता दें कि ये एक विदेशी कंपनी है। यह चेकोस्लोवाकिया की कंपनी है। जिसे थॉमस बाटा ने 1894 में शुरू की थी।

थॉमस बाटा चेकोस्लोवाकिया के एक छोटे से कस्बे के निवासी है और उनका परिवार काफी गरीब परिवार था। इनका पूरा परिवार पिछला कई पीढ़ियों से जूते चप्पल का व्यापार करते आ रहे है। उनका परिवार स्वयं जूता चप्पल बनाता है। थॉमस बाटा का बचपन गरीबी में बड़ी ही मुसीबतों में बीता है।

इन्होंने परिवार की मुश्किलें दूर करनी चाही और सन 1894 में अपने पीढ़ियों से चले आ रहे व्यापार को बड़े स्तर में करने के लिए गांव में दो कमरे किराए से लिए और बहन एन्ना और भाई एंटोनिन को अपने व्यापार में शामिल किया।

इस कार्य के लिए मां को मनाया और उनसे 320 डॉलर इस बिज़निस की शुरुआत के लिए मांगे। सिलाई मशीन खरीदी और कुछ माल ख़रीदा। धीरे धीरे इस काम को शुरू किया, परंतु कुछ समय पश्चात उनके भाई-बहन ने उनका साथ छोड़ दिया।

थॉमस ने फिर भी हौसले नहीं हरे और हिम्मत से काम लिया। लगभग 6 वर्षो में उन्होंने अपने काम को इतना बढ़ा लिया की दो कमरे जो किराए पर लिए थे वो भी कम पड़ने लगे। थॉमस ने व्यापार के लिए और कर्ज लिया जो वे चूका न सके और उनका बिज़नेस लगभग समाप्त हो गया।

Bata को अपने ही शहर में नही मिली सफलता

कर्ज न चुका पाने की सूरत में वहां की सरकार ने उनकी कंपनी को दिवालिया करार दिया। इसके बाद थॉमस ने अपने तीन वफ़ादार कर्मचारियों को साथ में लेकर न्यू इंग्लैंड पहुचे जहा उन्होंने एक जूता कंपनी में लगभग 6 माह तक काम किया।

इन 6 महीनो में उन्होंने कंपनी के सभी कामकाज और व्यापार चलाने की बारीकियों को बड़े ही शिद्दत से सीखा। एक बार फिर वे अपने देश लौटे और दोवारा से काम शुरू किया। पिछली बार की तरह इस बार भी व्यापार ने स्पीड पकड़ी। सन 1912 में थॉमस ने अपनी कंपनी के लिए 600 से ज्यादा मज़दूरों को काम पर रखा।

प्रथम विश्व युद्ध के समय व्यापार में आई मंदी का तोड़ निकाला

थॉमस के द्वारा बनाए गए उत्पाद को लोग खूब पसंद करते है, क्योंकि उनके द्वारा बनाये गए जूते चप्पल काफी आरामदायक, सस्ते और मजबूत होते है। उनका व्यापार बढ़ने लगा और 1912 में उन्होंने जूतों को बनाने के लिए मशीनो का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। प्रथम विश्व युद्ध में सभी व्यापार में गिरावट आ गई और इसका असर बाटा को भी हुआ।

बिक्री कम होने लगी साथ ही उत्पादन भी घट गया। इस स्थिति से निपटने के लिए थॉमस ने जूतों को आधे दाम में बेचना शुरू कर दिया। एक बार फिर उनका काम तेजी से चल पड़ा। बाटा के जूतों का प्रोडक्शन 15 गुना बढ़ा। मांग के बढ़ते ही थॉमस ने अन्य देशो में भी अपना व्यापार शुरू किया।

थॉमस बाटा की हवाई हादसे में निधन के बाद उनके बेटे ने संभाला बिज़नेस

वर्ष 1932 में थॉमस बाटा इस दुनिया को छोड़ गए एक हवाई हादसे में उनकी मौत हो गई। दुर्भाग्य से थॉमस का हवाई विमान एक इमारत की चिमनी से जा टकराया। जिससे उनकी मृ-त्यु हो गई। थॉमस के जाने के बाद उनके बेटे ने उनका व्यापार काफी अच्छी तरह संभाला। साथ ही व्यापार को खूब आगे तक बढ़ाया।

एक बार वे अपने व्यापार के सिलसिले से भारत आये थे, उन्हें रबर और चमड़े की जरूरत थी। जब वे भारत आये और उन्होंने लोगों को देखा की लोग बिना जूतों के घूमते है, तो उनके दिमाग में भारत में भी अपना व्यापार करने का ख्याल आया।

इस समय भारत में कोई भी जूते चप्पल की कंपनी नहीं हुआ करती थी। यहां सिर्फ जापानी कंपनियों का राज था। वर्ष 1931 में बाटा ने भारत के कोलकाता (Kolkata) से लगा हुआ कोन्नार नाम के एक छोटे से गांव में अपनी कंपनी स्थापित की। देश में पहली शू कंपनी आई, तो लोगों में बदलाव आने शुरू हो गए। धीरे धीरे माँग बढ़ती गई और Bata ने भारत में भी अपने व्यापार की जड़े मजबूत कर ली।

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