Friday, January 28, 2022
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चिप की कमी से जूझ रही दुनिया, TATA बनाएगा माइक्रोचिप और सेमीकंडक्टर, भारत का होगा दबदबा

Tata Group Microchip Business

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Delhi: देश के जाने माने बिजनेसमेन रतन टाटा (Ratan Tata) की कंपनी हर दिन सफलता के झंडे गाड़ रही है। फिर चाहे देश की डिफेन्स डील हो या टाटा की गाड़ियों का कारोबार। अब टाटा कंपनी (Tata Company) एक और नया मुकाम हासिल करने जा रही है।

एयर इंडिया को खरीदने के बाद अब टाटा समूह आउटसोर्स सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग संयंत्र (Semiconductor Assembly and Test Unit OST) में लगभग 30 करोड़ डॉलर (300 Million Dollars) इन्वेस्ट करने जा रहा है। ऐसे में भारत को अगले साल के अंत तक अपनी पहली सेमीकंडक्टर प्रॉडक्शन यूनिट हासिल होने की पूरी उम्मीद है।

इसकी मफत से अब भारत में भी चिप (Chip) बनने लगेंगे। अब आने वाले समय में भारत इन चिप्स को इंपोर्ट नहीं, बल्कि एक्सपोर्ट करेगा। जानकारी हो की ऐसे एक OST संयंत्र सेमीकंडक्टर फाउंड्री से Silicon Wafers को हासिल करने के बाद उसे पैकेज और असेंबल करता है तथा उनकी टेस्टिंग करता है और फिर उन्हें तैयार सेमीकंडक्टर चिप्स में बदल देता है।

इस काम को करने के मकसद से टाटा कंपनी (Tata Company) इस प्रकार के संयंत्र को स्थापित करने के लिए कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु सरकार के साथ सलाह मश्वरा कर रही है। इस चिप बनाने वाले संयंत्र को स्थापित करने के लिए अगले महीने फाइनल स्थान का चयन होगा, जिसके 2022 के आखिर तक शुरू होने की संभावना है।

आपको बता दें की विदेशी मीडिया रॉयटर्स (Reuters) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्लांट में 4000 कर्मचारी काम कर सकेंगे। रॉयटर्स के सूत्रों के अनुसार, सही लागत पर अच्छे और मेहनती वर्कर्स को काम पर लगाकर इस परियोजना को बड़ी सक्सेस मिल सकती है।

पिछले महीने टाटा ग्रुप के अध्यक्ष एन चंद्रशेखरन ने यह संकेत दे दिए थे कि कंपनी सेमीकंडक्टर क्षेत्र में उतरना चाहती है। एक बैठक में उन्होंने कहा था, ‘टाटा समूह पहले से ही इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, 5 जी नेटवर्क उपकरण और अर्धचालक (Semiconductor) जैसे कई नए व्यवसायों में शामिल हो चुका है।’ तब कुछ खास समझ नहीं आया था, परन्तु अब रॉयटर्स की रिपोर्ट में साफ भविष्य देखा दिया गया है।

टाटा का OST प्लांट एक बार खुलने के बाद, इसे व्यापक पैमाने में बढ़ाया जायगा। इसके लिए अभी सही स्थान को चिन्हित किये जाने का कार्य होना है। टाटा के इस चिप वाले व्यापार में उसके होने वाले कस्टमर Entel, AMD और ST Micro Electronics जैसी कंपनियां शामिल हैं।

एक बार यह काम शुरू होने के बाद टाटा इसी संयंत्र से अपनी जरूरतों के लिए सेमीकंडक्टर्स (Semiconductors) भी हासिल कर लेगा और माइक्रोचिप्स (Microchips) का भी उत्पादन करेगा। इससे भारत चिप्स के मामले में आत्मनिर्भर बन जायेगा। टाटा की बनाई माइक्रोचिप्स (Tata Will Produce Microchips) से अनेक भारतीय कंपनियों को भी फायदा पहुंचेगा।

इस डिजिटल और इलेक्ट्रानिक दुनिया (Digital and Electric World) में इन चिप्स की ख़ास अहमियत है। सिलिकॉन से बने सेमीकंडक्टर्स आज की दुनिया में बहुत ही महत्वपूर्ण चीज़ हैं। इनका इस्तेमाल आप भी अभी कर रहे है। लैपटॉप और स्मार्टफोन (Laptop and Smartphone) से लेकर अनेक रोज मर्रा के उपकरणों में सेमीकंडक्टर ही इस्तेमाल होता है। सडकों पर दौड़ने वाली कार की बैटरी में भी सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल किया जाता है। अब भविष्य में तो इलेक्ट्रिक कार (Electric Car) का ज़माना आने वाला है। ऐसे में यह सेमीकंडक्टर बहुत अहम् हो जायेंगे।

अभी के समय में एक ओर दुनिया सेमीकंडक्टर की कमी की किल्लत झेल रही है और अमेरिका व यूरोपीय संघ सेमीकंडक्टर फर्मों को अपने यहाँ आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं। तो दूसरी ओर भारत सरकार देश में सेमीकंडक्टर के निर्माण को बढ़ावा देने पर फोकस रही है। इसके लिए टाटा के साथ काम होगा।

अभी के समय में इस क्षेत्र में दक्षिण कोरिया, ताइवान और जापान की कंपनियों का दबदबा बना हुआ है। PM मोदी ने अपने अमेरिकी दौरे के दौरान भी कई अमेरिकी सेमीकंडक्टर कंपनियों के उच्च अधिकारियों के साथ बातचीत की थी। वहां उनके साथ रतन टाटा भी गए हुए थे। मतलब जल्द ही भारत माइक्रोचिप और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में ऊँची उड़ान भरता हुआ दिखाई देगा। इससे व्यापार और रोजगार दोनों उत्पन्न होंगे।

ENN Team
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