घर में खाना न था, तो 6 दिन पानी पीकर की पढ़ाई, ऐसे JEE टॉपर बना केशव: Struggle Story

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Keshav Cleared JEE Mains Exam. Struggle Story of a student Keshav Raj who cleared JEE mains. inspirational story of a student of JEE.

Patna: देश में हर मैथ्स का स्टूडेंट JEE का एग्जाम पास करके अच्छा कॉलेज पाना चाहता है। शहर के अन्य कई इंस्टीट्यूट से सैकड़ों युवाओं ने जेईई मेंस को क्वालीफाई किया है। इस वर्ष करीब 9 हजार स्टूडेंट्स ने जेईई मेंस की परीक्षा दी थी। इस बार जेईई मेंस में कट ऑफ नम्बर 81 तक पहुंचा है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले काफी नीचे गया। हालांकि केटेगिरी में कट ऑफ नम्बर 32 तक नीचे गए हैं।

देशभर में दो लाख से ज्यादा छात्रों ने जेईई मेंस की परीक्षा (JEE Mains Exam) दी थी। रविवार को जेईई एडवांस का परिणाम घोषित हुआ। इसमें सफल केशव के संघर्ष की दास्‍तान उदाहरण है। केशव की बहन रश्मि ने बताया कि उनका परिवार पहले से ही गरीबी में जी रहा था। पिता विनय कुमार सिंह प्राइवेट जॉब करते थे। अचानक उन्‍हें कैंसर हो गया।

इलाज में सबकुछ खर्च हो गया, लेकिन उन्‍हें बचाया नहीं जा सका। 2013 में उनकी मौत के बाद परिवार में कोई भी कमाने वाला नहीं बचा। पिता की मृत्यु के बाद पूरा परिवार सड़क पर आ गया था। रश्मि ने बताया कि उसने परिवार चलाने के लिए पढ़ाई छोड़ नौकरी करने का निर्णय किया। तब पिता की मृत्यु के बाद केशव के टूटे मनोबल को मजबूत करने का काम किया।

उस वक्‍त केशव आठवीं में, बहन रश्मि 12वीं में थी। यह फैसले की घड़ी थी। पटना में रहकर ही उसको पढ़ाने का फैसला कर लिया। इसी बीच केशव के वार्तालाप एक शिक्षक ने अभयानंद से करवायी। उन्होंने रश्मि को नौकरी दी, साथ ही केशव को अपनी कोचिंग में पढ़ने की परमिशन दी। इस तरह परिवार के लिए रोटी का इंतजाम हुआ तो केशव के सपनों को उड़ने के लिए पंख मिले।

बहन बनी सफलता की साथी

रश्मि ने बताया कि उसने पढ़ाई छोड़ पटना में नौकरी तलाशना शुरू कर दिया। लेकिन बहुत मुश्किल आई। एक वक्त ऐसा भी था जब घर में छह दिनों तक खाने को कुछ नहीं था। भावुक रश्मि ने बताया कि उन्‍होंने छह दिनों तक पानी पीकर गुजारे। केशव ने उस समय भी पढ़ाई नहीं छोड़ी। अपनी पढ़ाई जारी रखी। वह पानी पीकर दिन भर पढ़ता रहता था। हार नही मानी।

बहन ने बताया जहां भी मुझे पता चलता कि जॉब मिलने की संभावना है मैं कोशिश करने से पीछे नही हटती लेकिन कुछ दिनों तक मुझे काम नहीं मिला। इस कठिन दौड़ में भी मैंने हिम्मत नहीं हारी। इसी का रिजल्ट था कि मुझे एक प्राइवेट जॉब मिली और घर के लोगों के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम हो सका।

अभयानंद सुपर 30 ने सपने को दी उड़ान इसी बीच केशव के एक टीचर पंकज ने हमारी मुलाकात अभयानंद से करवायी। उन्होंने मुझे नौकरी और केशव को अपनी कोचिंग में पढ़ने की अनुमति भी दी। यह मेरे अच्छे दिनों की शुरुआत थी। मुझे वेतन के रूप में कुछ ज्यादा पैसा मिलने लगे। वहीं, मेरे भाई के सपने को उड़ान मिली। सफलता की राह आसान होती चली गई।

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