पिता के साथ जूते की दुकान में काम करते थे, ऐसे बने IAS अफसर: Struggle Story

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Shubham Gupta IAS
Shubham Gupta is an IAS officer of the 2019 batch of Maharashtra cadre. Struggle Story of IAS officer Shubham Gupta, who worked in a shoe shop to earn his livelihood.

Photo Credits: Twitter(@ShubhamGupta_11)

Jaipur: राजस्थान (Rajasthan) की राजधानी जयपुर (Jaipur) के रहने वाले शुभम गुप्ता (Shubham Gupta) की कहानी काफी संघर्ष (Struggle) से भरी है और युवाओं के लिए प्रेरणा दे सकती है। बहुत से बच्चे ऐसे होते हैं, जिनके जीवन में बचपन कम समय के लिए आता है या आता ही नहीं। वे जिम्मेदारियों के बोझ तले कम उम्र में ही इस कदर दब जाते हैं कि उनके पास दूसरे बच्चों की तरह जीने का समय ही नही मिलता।

कई बार यह बच्चों को खुद का चुनाव भी होता है कि वे क्या चाहते हैं, क्या वे परिवार की हेल्प करने के लिये आगे आना चाहते हैं या जो जैसा चल रहा है उसी में अपनी खुशियां देख लेते है। शुभम के पास भी विकल्प था। उनके परिवार ने कभी उन्हें जिम्मेदारियों की भट्टी में नहीं झोंका, लेकिन परिवार के हालात समझते हुए उन्होंने खुद यह फैसला लिया और बन गये परिवार का नीव।

आज जानते हैं एआईआर रैंक 6 पाने वाले शुभम गुप्ता की कहानी (IAS Shubham Gupta Story) जिनका बचपन भी जिम्मेदारियां निभाते बीता पर वे कभी निराश नहीं हुए। हमेशा मुस्कुराते हुए हर जिम्मेदारी को बखूवी से निभाया। पिता ने कहा कि कलेक्टर बन जाओ और बेटे ने अपने पिता की बात का मान रखा। बचपन में शुभम का परिवार जयपुर छोड़कर महाराष्ट्र शिफ्ट हो गया।

उन्होंने बताया कि उस वक्त आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि उन्हें अपना शहर छोड़ना पड़ा। यूपीएससी एग्जाम 2018 में छठी रैंक हासिल करने वाले शुभम फिलहाल महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में कलेक्टर हैं। इस मौके पर हम आपको कुछ ऐसे ही लोगों की स्टोरी बता रहे हैं, जिन्होंने कई मुश्किलों का सामना कर यूपीएससी पास किया।

कौन है शुभम गुप्ता

शुभम गुप्ता (Shubham Gupta) का जन्म राजस्थान की राजधानी जयपुर में हुआ था और उन्होंने सातवीं तक की पढ़ाई यहीं से की। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने के कारण शुभम का परिवार महाराष्ट्र के छोटे से गांव में चला गया। शुभम गुप्ता के पिता जूते का कारोबार करते थे।

उनका बिजनेस महाराष्ट्र में था। घर की स्थिति ठीक नहीं थी। ये सब देखते हुये पिता की मदद करने के लिए शुभम भी महाराष्ट्र आ गए। शुभम अपने पिता के जूते की दुकान में काम करने लगे। तीन भाई-बहनों में छोटे शुभम और उनकी बहन का स्कूल बहुत दूर था। स्कूल जाने के लिये कोई पर्याप्त साधन नही था। दोनों ट्रेन से प्रतिदिन स्कूल जाया करते थे।

ट्रेन से आने-जाने के दौरान भी शुभम अपनी पढ़ाई को जारी रखते थे। शुभम तब आठवीं कक्षा में पढ़ते थे। उनके बड़े भाई आईआईटी की तैयारी के लिए बाहर रहते थे। दसवीं में अच्छे प्रदर्शन पर लोगों ने उन्हें साइंस लेने की सलाह दी, लेकिन वह शुरू से कॉमर्स करना चाहते थे तो इसी रणनीति में आगे की पढ़ाई की।

संघर्ष भरा रहा बचपन का सफर

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार गांव में हिंदी या अंग्रेजी मीडियम का एक भी स्कूल नहीं था और शुभम के लिए मराठी में पढ़ना सम्भव नही था। इसके बाद उनके पिता ने उनका दाखिला गुजरात के वापी में करा दिया और यहीं से उन्होंने 8वीं से 12वीं तक की पढ़ाई खत्म की। स्कूल घर से काफी दूर था, इसलिए वे अपने बहन के साथ ट्रेन से स्कूल जाते थे।

इसके लिए उन्हें सुबह 6 बजे ट्रेन पकड़नी पड़ती थी और 3 बजे के बाद ही घर वापस आ पाते थे। हार नही मानी पढ़ाई के जुनून ने उनको सफल अफसर बना दिया। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने के कारण शुभम ने अपने पिता की मदद करने का विचार बनाया।

घर चलाने के लिए शुभम गुप्ता (Shubham Gupta) के पिता ने महाराष्ट्र के धानू रोड के पास एक जूते की दुकान खोली। वापी स्थित स्कूल में पढ़ाई खत्म करने के बाद शुभम अपने पिता की दुकान पर काम करते थे। हालांकि इस वजह से उनकी पढ़ाई पर कभी असर नहीं पड़ा और उन्होंने कड़ी मेहनत कर अपने मुकाम को हासिल कर लिया।

असफलता बनी सफलता की सीढ़ी

12वीं के बाद शुभम गुप्ता (Shubham Gupta) दिल्ली आ गए और दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीकॉम और एमकॉम की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने साल 2015 में यूपीएससी की तैयारी शुरू की, लेकिन पहले प्रयास में सफल नहीं हो पाए। साल 2016 में शुभम गुप्ता (Shubham Gupta) ने दूसरी बार यूपीएससी का एग्जाम (UPSC Exam) दिया और प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू को क्लीयर करके 366वीं रैंक हासिल की।

इसके बाद उनका चयन इंडियन ऑडिट एंड अकाउंट सर्विस में हुआ। सरकारी नौकरी लगने के बाद भी शुभम गुप्ता (Shubham Gupta) यूपीएससी एग्जाम की तैयारी में लगे रहे। उन्होंने हार नही मानी। अपनी मंजिल को पाने के लिए मेहनत करते रहे।

2017 में फिर से प्रयास किया, लेकिन इस बार वो प्रीलिम्स परीक्षा को क्लियर नहीं कर पाए। साल 2018 में उन्होंने चैथी बार कोशिश की इस बार किस्मत और मेहनत दोनों ने उनका साथ दिया। ऑल इंडिया में 6ठी रैंक हासिल कर ली. इसके बाद शुभम को महाराष्ट्र कैडर मिला।

सरकारी स्कूलों में WiFi लगवा बने चर्चित

शुभम गुप्ता ने ऑनलाइन क्लास (Online Class) को सही ढंग से चलाने के लिए जलगांव जिले के परोला तालुका के सभी स्कूलों में वाई-फाई लगाने की शुरुआत की थी। हाल ही में उन्होंने ट्वीट कर जानकारी दी थी, यह काम अब पूरा हो गया है और 113 स्कूलों में वाई-फाई कनेक्शन लग गया है। इसके बाद सोशल मीडिया पर जमकर उनकी तारीफ हुई थी। सभी ने उनके इस काम की प्रशंसा की।

जिस परिस्थिति में उन्होंने ने पढ़ाई की है उसको वे किसी बच्चे के साथ दोहराना नही चाहते थे। अपने एक ट्वीट में उन्होंने बताया था, BDO चार्ज के दौरान, मैंने सभी सरकारी स्कूलों में वाई-फाई कनेक्शन लगवाने का फैसला किया था। किस्मत ने साथ नही दिया, वह काम समय पर पूरा नहीं हो पाया था। मुझे कुछ समय पहले एजुकेशन ऑफिसर की तरफ से ये तस्वीरें मिली हैं और बताया गया है कि काम पूरा हो गया है। ये सच में दिल जीत लेने वाला है।

शुभम की कहानी (IAS Shubham Gupta Story) हमें यह सीख देती है कि अगर ठान लो तो मुश्किल कुछ भी नहीं। चाहे कितनी भी हार का सामना करना पड़े पर तब तक लगे रहो जब तक मंजिल न मिल जाये। असफलता को सफलता की सीढ़ी बनाकर अपने लक्ष्य को प्राप्त करना।

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