
Info Credits: MP CM Shivraj Singh Chouhan Blog
Bhopal: हाल ही में देश का पहला वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन रानी कमलापति (Rani Kamlapati) के नाम से जाना जा रहा है। मध्य प्रदेश के भोपाल में स्थित हबीबगंज रेलवे स्टेशन (Habibganj Railway Station) का नाम बदलकर रानी कमलापति स्टेशन कर दिया गया। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस स्टेशन का लोकार्पण किया। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर रानी कमलापति कौन थीं (Who Was Rani Kamlapati) और इतिहास में उनका क्या महत्व है।
इतिहास (Bhopal History) पर नज़र डाले, तो 1600 से सन् 1715 तक गिन्नौरगढ़ किले (Ginnorgarh Fort) पर गोंड राजाओं (Gond Kings) का शासन था और भोपाल पर भी उन्हीं गोंड राजाओं का शासन था। गोंड राजा निज़ाम शाह (Gond King Nizam Shah) की 7 पत्नियां थीं, जिनमें कमलापति सबसे सुंदर और सुशिल थीं।
ऐसे में राजा निज़ाम शाह सबसे ज्यादा कमलापति को ही चाहते थे। रानी कमलापति भोपाल की अंतिम गोंड आदिवासी और हिंदू रानी (Last Hindu Queen Of Bhopal) थीं। यह बहुत कम लोग जानते हैं की अपनी इज्जत और अस्मत बचाने के लिए उन्होंने जल समाधि लेते हुए अपने प्राण दे दिए थे।
आपको जानकरी हो की 16वी सदी में भोपाल के पास सलकनपुर (जिला सीहोर) रियासत के राजा कृपाल सिंह सरौतिया थे। उनके शासन काल में वहां की प्रजा बहुत संपन्न और संतुष्ट थी। उनके यहां एक खूबसूरत बेटी (Beautiful Daughter) का जन्म हुआ।
वह बचपन से ही कमल की तरह बहुत सुंदर थी। उसकी सुंदरता और कमल जैसा मुख देखते हुए उसका नाम कमलापति रखा गया। वह बचपन से ही बहुत बुद्धिमान और साहसी थी और शिक्षा, घुड़सवारी, मल्लयुद्ध, तीर-कमान चलाने में बहुत योग्य थी।
सलकनपुर राज्य की रक्षा करने की पूरी जिम्मेदारी राजा कृपाल सिंह सरौतिया और उनकी बेटी राजकुमारी कमलापति की थी। आगे चलकर वह बढ़िया प्रशिक्षण प्राप्त कर सेनापति भी बनी थी। वह अपने पिता के सैन्य बल के साथ और अपने महिला साथी दल के साथ युद्धों में शत्रुओं के दांत खट्टे कर दिया करती थी।
राजकुमारी जब बड़ी हुई, तब उसकी सुंदरता के चर्चे दूर दूर तक होने लगे। सलकनपुर राज्य में बाड़ी किले के जमींदार का बेटा चैन सिंह (Chain Singh) जो रिश्ते में राजा कृपाल सिंह सरौतिया का भांजा लगता था, वह राजकुमारी कमलापति से विवाह करने का मन बना बैठा था। परन्तु राजकुमारी कमलापति ने शादी करने से इंकार कर दिया।
Habibganj Railway Station (Bhopal) has been renamed as Rani Kamlapati Railway Station.
Rani Kamlapati:
1. She was 18th Century Gond queen of the region.
2. She was the widow Gond ruler of Nizam Shah, chief of Ginnorgarh. pic.twitter.com/RKT9xxWNcg
— Environment and Ecology for UPSC (@EnvirForUPSC) November 13, 2021
16वीं सदी में भोपाल से 55 किलोमीटर दूर 750 गांवों को मिलाकर गिन्नौरगढ़ राज्य बनाया गया, जो देहलावाड़ी के पास आता है। इसके राजा सुराज सिंह शाह थे। इनके पुत्र निजाम शाह हुए, जो बहुत बहादुर और योग्य थे। ऐसे में निज़ाम शाह से रानी कमलापति का विवाह हुआ। उनको एक पुत्र की हुआ, जिसका नाम नवल शाह रखा गया था।
ऐसे में चैन सिंह भी राजा निजामशाह का रिश्ते में भतीजा लगता था। चैन सिंह कमलापति की शादी होने के बाद भी उनसे विवाह करने के गलत खवाब देखता था। उसने कई बार राजा निजाम शाह को मारने की कोशिश की, जिसमें वह विफल रहा। फिर एक शाम उसने राजा निजाम शाह को भोजन पर आमंत्रित किया और खाने में जहर देकर उनकी जान ले ली।
राजा निजाम शाह के देहांत की खबर से पूरे गिन्नौरगढ़ में अफरा तफरी मच गई। चैनसिंह ने रानी कमलापति को अब अकेले सोचकर उन्हें हासिल करने के इरादे से गिन्नौरगढ़ के किले पर धावा बोल दिया। रानी कमलापति ने उस समय अपने कुछ वफादारों और 12 वर्षीय बेटे नवल शाह के साथ भोपाल में बने एक महल में रहने का फैसला किया। उस समय सुरक्षा के लिहाज़ से वह महल उत्तम था और छुपा हुआ था। इस महल को आज हम ‘Rani Kamlapati Palace’ के नाम से जानते हैं।
Rani Kamlapati Mahal, part of palace complex built in 1722, named after Rani Kamlapati, widow Gond ruler of Nizam Shah, Chief of Ginnorgarh, now ASI monument, Bhopal
pic frm wiki pic.twitter.com/FZ3r0RdcOL— g katyan misra (@kamlesm) November 15, 2021
फिर रानी कमलापति को जानकारी मिली कि भोपाल की सीमा के पास कुछ अफगानी (Afghani) आकर रूके हुए हैं, जिन्होंने जगदीशपुर (आज के इस्लाम नगर) पर आक्रमण कर उसे अपने कब्जे में ले लिया था। इन अफगानों का सरदार दोस्त मोहम्मद खान (Dost Mohammad Khan) था, जो पैसा लेकर किसी के लिए भी युद्ध लड़ता था।
ऐसे में कुछ जानकार और भोपाल के इतिहासविद बताते है की रानी कमलापति ने दोस्त मोहम्मद (Dost Mohammad Khan of Bhopal) को एक लाख रुपये के बदले चैनसिंह पर हमला करने और उसका काम तमाम करने की डील की थी। रानी कमलतती से डील करके दोस्त मोहम्मद ने गिन्नौरगढ़ के किले पर धावा बोलै और चैनसिंह का काम तमाम कर दिया।
फिर खान ने उस किले को भी हड़प लिया गया। रानी कमलापति ने भी बदला पूरा होने के चलते दोस्त मोहम्मद की इस गुस्ताखी पर कोईआपत्ति नहीं जताई और उसे राज करने दिया। परन्तु दुष्ट दोस्त मोहम्मद खान अब पूरे भोपाल की रियासत पर कब्जा करना चाहता था। इसके अलावा वह रानी कमलापति को भी पाना चाहता था। खान के इरादे रानी को अपने हरम में रखने के इरादे थे।
ऐसे में दोस्त मोहम्मद खान के इन गलत इरादों को देखते हुए रानी कमलापति का 14 वर्षीय बेटा नवल शाह अपने 100 योद्धाओं के साथ लाल घाटी में खान से युद्ध करने चला गया। इस बड़े युद्ध में दोस्त मोहम्मद खान ने नवल शाह के प्राण ले लिए। इस स्थान को लाल घाटी नाम दिया गया।
India's first World Class Railway Station #Habibgunj is renamed as Rani Kamlapati Railway Station. She was the most beautiful Queen of Gond Dynasty.
Best decision. ❤️
Shree @narendramodi ji will be inaugurating this Station on 15th at #Bhopal. #ModiHaiToMumkinHai@ChouhaShivraj pic.twitter.com/TBt4TvwluH— Monika Sharma (@moni_tiwari) November 12, 2021
ऐसे में अब खान रानी कमलापति की तरफ बढ़ रहा था, तो रानी ने इन परिस्थति को देखते हुए अपनी अस्मत और धर्म को बचाने के लिए बड़े तालाब बांध का संकरा रास्ता खुलवाया और बड़े तालाब का पानी उसमे रिसवाकर एक छोटा तालाब बनवा दिया।
इसे आज छोटा तालाब के रूप में जाना जाता हैं। इसमें रानी कमलापति ने अपने महल की पूरी धन-दौलत, सोना, हिरे-जेवरात, अपने गहने डालकर खुद भी जल-समाधि ले ली। अतः भोपाल में आज भी कहानी प्रचलित है की इस तालाब में बहुत खज़ाना (Gold Treasure) दवा है और यह तालाब श्रापित (Haunted Lake) भी है।
रानी के जल समाधि लेने के बाद जब दोस्त मोहम्मद खान अपनी सेना लेकर लाल घाटी से इस किले तक पहुंचा, तो उसे कुछ न मिला। दोस्त मोहम्मद खान को न रानी कमलापति मिली और न ही धन-दौलत, ना सोना। भोपाल के इतिहास के स्रोतों बतात्ते है की उस वक़्त 1723 में में यह घटना घटित हुई थी, जब भोपाल की अंतिम हिन्दू रानी ने अपनी लीला समाप्त कर ली।
Calling tribals "Hindu" is the real conversation. CM of a State is openly amplifying propaganda.
Tribals are not Hindus, they're driven by their own customs says Our Constitution.
Rani Kamlapati was the last tribal (Gond) queen of Bhopal @TribalArmy @TribalAffairsIn @MundaArjun pic.twitter.com/4eByrI15Io
— काश/if Kakvi (@KashifKakvi) November 14, 2021
रानी के देहांत के बाद दोस्त मोहम्मद खान ने यहाँ का राज पाठ अपने हाँथ में ले लिया और तब से भोपाल में नवाबों का दौर शुरू हो हुआ और भोपाल में नवाबों का शहर कहा जाने लगा। अब यह कहना कितना सही है, इसका निर्णय देश की जनता तय करें। इस कहानी को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अपने ब्लॉग पर कवर किया है।



