भारतीय सेना जवान सौरभ कटारा को जन्मदिन के दिन मुखग्नि, शादी करके ड्यूटी पर लौटे थे

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Sourabh Katara Indian Army
Indian Army jawan Saurabh Katara martyred after 18 days of his marriage. Army jawan from Rajasthan martyred in Kupwara Kashmir during patrolling. Saurabh Katara was married on 8 December. returned to his duty last week after marriage.

भारतीय सेना के जवान एक ही मकसद के लिए जीते है और उसी मकसद के लिए अपने प्राण भी दे देते हैं। भारत माता की सेवा करना ही उनका मुख्य लक्ष्य होता है। ऐसा ही कुछ देखने मिला राजस्थान के वीर जवान के साथ। जिसने अपनी भारत माता की रक्षा करते हुए, खुशी खुशी अपने प्राणों का बलिदान दे दिया।

राजस्थान में भरतपुर के रहने वाले 22 साल के सौरभ कटारा आर्मी की 28वीं राष्ट्रीय राइफल में तैनात थे। उनकी पोस्टिंग जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में थी। जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटते ही वहाँ आतंकी ने अपनो काम को विफल देख बड़े आतंकी हमले की सुराग में थे। लेकिन सरकार ने जम्मू कश्मीर में इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया था, जिससे आतंकी अपने इरादों में सफल नही हो सके।

जम्मू कश्मीर में मंगलवार रात को बम ब्लास्ट हुआ, जिसमें सौरव अपनी जान नही बचा पाये, और देश के लिए शहीद हो गए। कुछ ही दिन पहले शहीद सौरव अपनी शादी के बंधन में बंधे थे। वो अपनी शादी को लेकर बहुत खुश थे। शहीद सौरभ कटारा की शादी इसी साल 8 दिसंबर को ही हुई थी। शादी के बाद वह 16 दिसंबर को फिर से अपनी ड्यूटी के लिए कुपवाड़ा चले गए थे।

सौरव का जन्मदिन भी पास आ गया था, उनकी पत्नी अपने पति के पहले जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए तैयारियो में जुट गई थी, वह अपने पति को बहुत ही खूबसूरत गिफ्ट देना चाहती थी, लेकिन उनकी ये मुराद पूरी ना हो सके और जन्मदिन से पहले ही सौरव शहीद हो गए। मंगलवार को सौरव शहीद हुए और बुधवार को जन्मदिन था।
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शहीद के परिवार वालो में सौरव के जन्मदिन को लेकर बहुत खुशी थी। इतने में उनको खबर मिली क‍ि सौरभ बम ब्लास्ट में शहीद हो गए जिसको सुनते ही परिवार पर दुख की गाज गिर गई। मानो दुखों का पहाड़ सा टूट गया था। सौरव के शहीद होने की पूरे गांव में फैली तो सभी की आंखे नम हो गई।
शहीद सौरभ कटारा को अंतिम विदाई देने के लिए पूरे गांव के हजारों की संख्या में जनसैलाब उमड़ पड़ा और गांव के सभी लोगो ने अपनी नम आखों से शहीद के अंतिम दर्शन कर अंतिम विदाई दी।

नवविवाहित अपने पति के शहीद होने की खबर सुन अपने होश खो बैठी थी, मानो उसकी सारी जिंदगी ही खत्म हो गई हो। शहीद की नवव‍िवाह‍िता पत्नी पूनम देवी के आंसू आंखों से रुकने का नाम ही नही ले रहे थे। वह भी अपने शहीद पति को अंतिम विदाई देने के लिए श्मशान तक पहुंची। शहीद के पिता नरेश कटारा उनकी माता, दादी और दो भाई का भी रो-रोकर बुरा हाल था।

सौरव के शहीद होने की ख़बर सुन पत्नी पूनम देवी को कुछ भी समझ ही नहीं आ रहा था क‍ि कुछ दिन ही पहले जल्दी आने की बात कहकर गए थे, लेखों क्या पता था ये सब होगा, वो तो नही आये उनका शव ही वापस आया। पत्नी का भी रो-रोकर बुरा हाल था और कई बार वह बेहोश हो गई थी लेकीन सभी ने उनको समझाया उनको हौसला टूटने नही दिया। हिम्मत रखकर वह श्मशान तक अपने पति की अर्थी के साथ पहुंची और उसको अंतिम विदाई दी।

शहीद सौरभ कटारा के पिता नरेश कटारा भी आर्मी में थे, जो 2002 में रिटायर्ड हो गए थे। उन्होंने 1999 में कारगिल युद्द में अपना भी सहयोग दिया था। सौरभ के परिवार में बड़ा भाई गौरब कटारा खेती करता है और छोटा भाई अनूप कटारा MBBS कर रहा है।

सौरभ आर्मी से छुट्टी लेकर 20 नवंबर को अपनी बहन दिव्या की शादी में शामिल होने आया था, फिर 8 दिसंबर को उसकी खुद की शादी थी। इसलिए वह बहन और अपनी शादी करने के बाद 16 दिसंबर को वापस अपनी ड्यूटी पर चले गए थे। सौरभ की पत्नी पूनम देवी की अभी हाथों की मेहंदी भी नहीं छूटी थी कि उनके पति के शहीद होने खबर आई।

शहीद के पिता नरेश कटारा ने बताया क‍ि मैंने आर्मी में रहकर खुद कारगिल युद्ध लड़ा है। मुझे अपने बेटे पर गर्व है क‍ि मेरा पुत्र देश के लिए शहीद हुआ है। अब अपने छोटे पुत्र अनूप कटारा को भी देश सेवा के लिए आर्मी में भेजूंगा। पिता की इस बात को सुन सबकी आंखे नम हो गई। पिता ने अपनी हिम्मत नही हारी।

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