
Delhi: लोग कहते हैं खुली आँखों से सपने नहीं देखना चाहिए, लेकिन अगर खुली आँखों से सपने देखने के साथ-साथ उसे पूरा करने में रात दिन जुट जाएँ, तो सपने साकार भी हो जाते हैं। अगर आप में मेहनत और लगन से काम करने की ताकत है तो एक दिन आपको वो सभी कुछ मिल जाता है, जिसके लिए आपने कभी घर को छोड़ा था।
ये कहानी उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मेरठ (Meerut) की संजू रानी वर्मा (Sanju Rani Verma) के लिए एकदम सही बैठती है। हमने ना जाने कितनी बार ऐसा सुना और देखा है कि किसी व्यक्ति या महिला ने दुनिया भर की कठिनाइयों का सामना करने के बाद कामयाबी हासिल की। उत्तर प्रदेश की बेटी ने अपनी हिम्मत के बल पर ऐसा काम कर दिखाया कि आज हर कोई उसकी तारीफ कर रहा है। कुछ ऐसा ही किस्सा एक बार फिर सामने आया है।
शादी के डर से भागी
संजू के पिता उसकी शादी करना चाहते थे। परन्तु संजू (Sanju Rani Verma) ने कुछ और ही बनाने की ठान ली थी, उनके सपने कुछ और ही थे। वो अपने सपनो को उड़ान देना चाहती थी। लेकिन परिवार वाले उनका साथ नही दे रहे थे। इन सबके बाद उसके पास एक ही विकल्प था, सपनो को उड़ान देने के लिए घर से भागना, वह शादी से बचने के लिए घर छोड़कर भाग गयी और जब वापस लौटी तो सरकारी अफसर बनकर। अपनी बेटी की सफलता को देखकर उसके पिता आज खुशी से झूम उठे। आजकल की लड़कियों को संजू वर्मा से प्रेरणा (Inspiration) लेनी चाहिए, जिसने अपने पिता का सर गर्व से ऊंचा कर दिया।
कैसे लिया घर छोड़ने का फैसला
अपने सफर के बारे में बात करते हुए संजू वर्मा ने बताया की, वह मध्यवर्गीय परिवार से आती है। जहां दसवीं पास करने के बाद लड़की की शादी की चर्चा शुरू हो जाती है। मैंने भी जब 12वी पास किया तो मेरे पिता भी मेरी शादी की तैयारियों में जुट गए थे। लड़कियों को ज्यादा पढ़ने नही दिया जाता। परन्तु मैं अभी शादी नहीं करना चाहती थी।
मैं पढ़-लिखकर कुछ बनना चाहती थी, अपने माता-पिता का नाम रोशन करना चाहती थी। अपने सपनो को पूरा करना चाहती थी। इस बीच मेरी माँ का देहांत हो गया, जिसके बाद मेरे पिता जल्दी ही शादी करके जिम्मेदारी से छुड़करा पाना चाहते थे। शादी को लेकर घर में दवाब बढ़ता ही जा रहा था। फिर इन सबको देखते हुये मैंने घर छोड़ने का फैसला ले लिया।
टीचर की सलाह बनी सफलता
एक दिन मैं घर छोड़कर चली गयी। बाहर मैं हॉस्टल में रहने लगी, खर्च के लिए पैसे चाहिए थे, इसके लिए मैने लोगों को कोचिंग पढ़ाना शुरू कर दिया। साथ ही सिविल सेवा की तैयारी भी करती रही। अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। कई स्कूलों में भी पढ़ाया।
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टीचर अभिषेक के कहने पर संजू ने यूपी-पीसीएस 2018 की परीक्षा में बैठी और उसमे सफल भी हुयी। वह अब वाणिज्य कर अधिकारी बन गई हैं। संजू का अगला लक्ष्य आईएएस अधिकारी बनने का है। संजू ने बताया की उन्हें कठिन परिस्थिति के दिनों में टीचर अभिषेक और मंगेतर ने उनका हौसला बढ़ाया।
परिवार वालो ने नही दिया साथ
मेरठ की रहने वाली संजू रानी वर्मा ने सात साल पहले जब घर छोड़ा था, तो उन्हें पता नहीं था कि उन्हें किन मुसीबतों का सामना करना होगा। कितनी मुसीबतों से लड़ना होगा। लेकिन हां उन्हें इतना पता था कि अगर घर में रही तो किस तरह की परिस्थिति बनी रहेगी। परिवार वाले उनकी बात को नही समझेंगे। साल 2013 में उनकी उम्र 28 की थी। जब उनकी मां का देहांत हो गया। घरवालों ने उनसे कहा कि वह कॉलेज बीच में ही छोड़कर शादी कर लें।
परिवार और सपने के बीच चुनाव
संजू मेरठ के आरजी डिग्री कॉलेज से स्नातक कर चुकी थीं और दिल्ली यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही थीं। शादी करने का दबाव जैसे-जैसे बढ़ा उनका धर्म संकट बढ़ता गया। उनके मन मे एक ही बात थी अपने सपनो को पूरा करना है। हौसला बनाये रखना है। उन्हें अपने सपनों और पारिवारिक जीवन के बीच चुनाव करना था।
28 year old Sanju Rani Verma forced to get married, She leaves Meerut home, returns 7 years later as PCS officer. pic.twitter.com/XUrepeIf6X
— Aarif Shah (@shahaarrif) September 15, 2020
उनके सपने सभी से बढ़कर थे। सपनो को उड़ान देना ही उनकी तमन्ना थी। इस बात को सात साल बीत गुजर चुके हैं, संजू को इस बात का गम नहीं है कि उन्होंने अपने सपनों को चुना। उन्हें फक्र है, अपने आप पर सबसे लड़कर उन्होंने अपने सपनो को उड़ान दी।
जॉब के साथ पढ़ाई को रखा जारी
उन्होंने जॉब के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखी, कुछ दिन बाद उनका नाम उन सफल प्रतियोगियों की सूची में था। जिन्होंने यूपी पीसीएस परीक्षा (2018) में कामयाबी हासिल की थी। संजू बताती हैं, उस साल 2013 में मैंने न केवल अपना घर छोड़ा, बल्कि मुझे डीयू का अपना वह पीजी कोर्स भी छोड़ना पड़ा।
मैंने किराए पर एक कमरा लिया और बच्चों को पढ़ाने लगी। मन मे कई सवाल भी थे। लेकिन सपनो को पूरा करना था। अपने आप से लड़कर आगे बढ़ती चली गई। परिस्थितियों से डटकर मुकाबला किया। आज नतीजा सबके सामने है। अगर मैं उस वक्त हार मान लेती तो मेरे सपने अधूरे ही रहते।
सपना है आईएएस बनना
अब जल्द ही संजू कमर्शल टैक्स ऑफिसर के रूप में अपना पदभार ग्रहण कर लेंगी। लेकिन उनके सपने अभी और ऊंचे हैं। वह कहती हैं, मुझे विश्वास था कि मुझे एसडीएम का पद मिलेगा। मेरा अंतिम लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षाओं (Civil Service Exam) में सफल (Success) होना है। मैं जिलाधिकारी बनना चाहती हूं।



