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Delhi: हर इंसान यह सोचता है की वह भी कार खरीदे और कार में घूमे। आज के समय में अपने घर पर कार रखना एक स्टेटस सिंबल की तरह हो गया है। देश का हर व्यक्ति तो कार नहीं खरीद सकता और मिडिल क्लास परिवार को कार वहन करना काफी महंगा पद जाता है। ऐसे में एक वक़्त एक ऐसी कार भारतीय मार्किट में आई, जो देश की मिडिल क्लास की जनता (Middile Class People) में छा गई।
14 दिसंबर वर्ष 1983 को प्रतिष्ठित मारुति 800 का जन्म हुआ, जो भारत की अब तक की सबसे कामयाब कारों में से एक थी। उस वक़्त जिसे ‘पीपुल्स कार’ (Peoples Car) कहा जाता था, वह भारतीय नागरिकों के लिए किसी ख्वाब से कम नहीं था, क्योंकि मारुति 800 उनके कार खरीदने के सपने को पूरा करने के लिए आई थी। मारुति सुजुकी 800 (Maruti Suzuki 800) को भारत में पहली बार लगभग 47,500 रुपये की कीमत पर बाजर मे उतारा गया था।
हरपाल सिंह (Harpal Singh) वह खुशकिस्मत व्यक्ति थे, जिन्हें मारुति 800 की सबसे पहली कार (India’s First Maruti 800 Car) की चाबी प्राप्त करने का सौभाग्य मिला। मारुति सुजुकी की प्रथम मारुति 800 कार इंडियन एयरलाइंस (Indian Airlines) के कर्मचारी हरपाल सिंह (Harpal Singh) को सौंपी गई थी। इन्होंने 47,500 रुपए में यह कार 1983 में खरीदी थी।
हरपाल सिंह कि कार का नंबर प्लेट भी खूब पसंद किया गया, जिसका पंजीकरण संख्या (Registration Number)-DIA 6479. हरपाल सिंह ने मारुति 800 कार को खरीदने के लिए अपनी फिएट कार (Fiat Car) को भी बेच दिया था।
Pictures of Late Harpal Singh and his wife Late Gulshanbeer Kaur, proud owners of India’s first Maruti 800 car. pic.twitter.com/TNrq3aaHnp
— ANI (@ANI) April 18, 2015
हरपाल सिंह का निधन 2010 में हुआ। 1983 में कार खरीदने के बाद वह पूरी जिंदगी उसी कार को चलाते रहे। उनका मानना था कि यह कार उन्हें भगवान की कृपा से मिली है, इसलिए उसे कभी नहीं बेचा। हरपाल सिंह को अपनी इस कार से बेहद प्यार था।
कार को किया गया रीस्टोर
हरपाल सिंह के निधन के बाद उनकी कार कोई नहीं चलाता था, जिसके कारण जंक लगने से वह खराब हो रही थी। सड़क के किनारे खड़ी उनकी कार की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल भी हुई थीं। उसके बाद कार को मारुति के सर्विस सेंट्र ले जाया गया और वहां उसे अंदर और बाहर हर जगह से पूरी तरह रीस्टोर किया गया। वैसे तो बहुत सारे लोगों ने इस कार को खरीदने की इच्छा जताई, लेकिन हरपाल सिंह के घरवालों (Maruti 800 Owner Harpal Singh Family) ने यह कार बेचने से इंकार कर दिया।
दो महीनों में ही हुई रेकॉर्ड तोड़ बुकिंग
मारुति सुजुकी ने 9 अप्रैल 1983 को कार की बुकिंग प्रारंभ की और केवल दो महीनों में ही तकरीबन 1.35 लाख कारों की बुकिंग हो चुकी थी। देखा जाए तो आज के स्टैंडर्ड के हिसाब से भी यह बुकिंग बहुत बड़ी थी। यह कार ना केवल अपनी कीमत के लिए प्रसिद्ध हुई, बल्कि इसे चलाना भी आसान था और इसका माइलेज भी उस समय की गाड़ियों के मुकाबले में अच्छा था। भारतीय मध्यम वर्ग के लिए मारुति 800 स्टेटस् सिंबल का प्रतीक बन गई थी।
Sale of First Maruti Car In 1983
Prime Minister Mrs. Indira Gandhi Giving Keys of First Maruti 800 Car to First Customer Mr. Harpal Singh pic.twitter.com/8tTtRTlWXm
— indianhistorypics (@IndiaHistorypic) May 1, 2020
भारत में यह गाड़ी बहुत लोकप्रिय हुई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने सेना में काम करने वाले हरपाल सिंह को पहली कार की चाबी सौंपी थी। उन्होंने कहा था, मैं चाहती हूं कि यह कार भारत के आम लोगों के काम आए। हालांकि, इस गाड़ी की लॉन्चिंग उनके लिए भावुक लम्हा भी था, क्योंकि मारुति कंपनी के जरिए उनके बेटे संजय गांधी ने भारत में आम आदमी के लिए कार का सपना देखा था।
एक दुर्घटना में संजय गांधी के निधन के बाद यह सपना पूरा होता नजर नहीं आ रहा था। 14 दिसंबर 1983 को संजय गांधी के जन्मदिन के मौके पर इंदिरा गांधी ने यह गाड़ी लॉन्च की थी। 14 जनवरी 2014 को भारत के लोगों की फेवरेट कार आखिरी बार असेंबली लाइन से गुजर चुकी है।



