नोएडा के DM सुहास ने पैरालंपिक में मेडल जी लिया, ऐसी सफलता वाले पहले IAS अफसर की कहानी

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Noida DM Suhas Yathiraj
PM Modi speaks to Silver medal winner, para-badminton player and Noida DM, Suhas LY and congratulates him. Noida DM Suhas Yathiraj bags Silver Medal after losing to Lucas Mazur in SL4 final.

Photo Credits: Twitter

Delhi: भारत में अभी मैडल आने की लहार चल रही है। पैरालंपिक खेलों में भारत के खिलाड़ी बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहे है। जापान के टोक्यो में चल रहे पैरालंपिक में भारत के खिलाड़ियों ने अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है। फिलहाल तो हर दिन टोक्यो पैरालंपिक से कि कोई ना कोई भारतीय खिलाड़ी के द्वारा मैडल जीतने की न्यूज़ आती रहती है। पैरालंपिक्स में भारतीय खिलाड़ी देश का नाम रोशन क़र रहे हैं।

अब भारत को एक और सफलता हासिल हुई है और इसी लिस्ट में उत्तर प्रदेश के नोएडा के डीएम सुहास एलवाई (Noida DM Suhas Yathiraj) भी शामिल हो हुए हैं। उत्तर प्रदेश के नोएडा गौतम बुद्ध नगर के DM सुहास ने टोक्यो पैरालंपिक में पुरुषों की एकल SL4 केटेगरी से बैडमिंटन स्पर्धा (Para Badminton) में दूसरा स्थान हासिल करते हुए सिल्वर मेडल (Silver Medal) अपने नाम कर लिया।

इसी के साथ IAS अफसर सुहास एलवाई (IAS Officer Suhas Yathiraj) पैरालंपिक्स में मेडल जीतने वाले पहले IAS ऑफिसर भी बन गए हैं। सुहास एलवाई बचपन से ही दिव्यांग है। फिर भी अपने दिव्यांगता बावजूद सुहास एलवाई (Para-Badminton Player) में बहुत उत्तम कार्य करके दिखाया है।

टोक्यो पैरालंपिक्स की बैडमिंटन स्पर्धा के फाइनल्स में IAS सुहास एल वाई (IAS Suhas Yathiraj) का मुकाबला फ्रांस के Lucas Mazur से हुआ। इस मुकाबले में भारत के सुहास ने Mazur को बड़ी ही कठिन टक्कर दी। सुहास 62 मिनट के मैच में 21-15, 17-21, 15-21 से हार गए। बता दें कि Lucas Mazur यूरोपियन चैंपियनशिप में तीन बार गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। ऐसे वर्ल्ड चैंपियन के साथ सुहास एल वाई का फाइनल में मुकाबला होना ही बहुत बड़ी बात है।

टोक्यो पैरालंपिक्स (Tokyo Paralympics) में बड़ी सफलता (Success) हासिल करते हुए सुहास अब भारत के पहले ऐसे आईएएस ऑफिसर बन गए हैं, जो पैरालंपिक से मेडल जीत क़र ले आये है। सुहास पिछले वर्ष सुर्ख़ियों में तब आए थे, जब उन्हें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ में विशेष रुप से वायरस महामारी के दौरान नोएडा की जिम्मेदारी दी थी।

नोएडा जैसे विभाग को संभालना सुहास एलवाई के लिए काफी मुश्किल भरा काम था, परंतु उन्होंने अपनी काबिलियत के दम पर काफी अच्छा काम करके दिखाया। सुहास कर्नाटक के एक छोटे से गांव से आते हैं। वह जन्म से ही दिव्यांग रहे और उनके पैर में दिक्कत है।

IAS सुहास की कहानी (Story Of IAS Suhas Yathiraj)

सुहास ने अपने परिश्रम और संघर्ष से अपने दिव्यांग होते हुए भी सफलता की सीढ़ी चढ़ी। सुहास बचपन से ही खेल में रुचि रखते थे। उनकी फॅमिली भी उनका सपोर्ट क़र रही थी। खेल के अलावा सुहास पढ़ाई में भी बहुत अच्चे थे। उनके पैर पूरी तरह से ठीक नहीं होने के कारण समाज में लोगो का ताना सुना करते थे।

उनके परिवार ने उनका पूरा साथ दिया। सुहास के पिता ने उन्हें हमेहा सपोर्ट किया। पिता की नौकरी में ट्रांसफर होता रहता था, तो सुहास भी शहर बदलते रहे थे। गांव में प्रारंभिक पढ़ाई के बाद उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की क़र ली। फिर साल 2005 में उनके पिता का निधन हो गया, इससे वह काफी निराश हो गए, लेकिन हार नहीं माने। इसके बाद उन्होंने सिविल सर्विस की तैयारी शुरू कर दी। यूपीएससी एग्जाम में सफलता हासिल करने के बाद उन्हें आगरा में पोस्टिंग हुई।

एक अफसर के तौर पर वे जौनपुर सोनभद्र, आजमगढ़, हाथरस, महाराजगंज, प्रयागराज और गौतमबुद्धनगर के जिलाधिकारी रहे। खेल में रूचि होने के चलते हमेशा उन्हें खेल का मैदान आकर्षित करता रहा। सुहास काम की थकान मिटाने के लिए बैडमिंटन खेलने जाय करते। कुछ प्रतियोगिताओं में मेडल भी जीत लाये, तो वह प्रोफेशनल स्तर पर खेलने लगे।

फिर कुछ समय बाद साल 2016 में सुहास ने इंटरनेशनल मैच खेलना शुरू किया। आज के समय में टोक्यो पैरालिंपिक में उनका प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा है। फाइनल के पहले उन्होंने पुरुषों के LS4 वर्ग के एकल में इंडोनेशिया के सेतिवान फ्रेडी को सीधे गेम में उन्होंने 21-19 और 21-15 से हराया और पैरालिंपिक में सिल्वर मेडल पक्का क़र लिया। आज बे एक प्रेरणास्त्रोत है।

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