Tuesday, October 26, 2021
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ऑर्गेनिक फार्म बनाया बिल्डिंग की छत को, आज आरती पूरी सोसाइटी को ऑर्गेनिक सब्जियाँ खिला रही हैं

Farming At Home Roof

Mumbai: एक ओर जहां देश में कुछ लोग खेती के क्षेत्र बेहद कम मुनाफे के कारण या फिर प्राकृति की मार से होने वाली हानी की वजह से अपना मुंह मोड़ रहे हैं और रोजगार की खोज में शहर का रुख कर रहे हैं, वही दूसरी ओर कुछ लोग अपनी लाखो की नौकरी (Job) को दरकिनार कर और परंपरागत खेती को छोड़कर लाखो का लाभ कमा रहे हैं।

एक महिला हैं, जिनका नाम आरती चौहान (Mumbai Woman Aarti Chauhan), हाल के दिनों में दिनों वह मुंबई स्थित अपनी बिल्डिंग की छत पर जीविक खेती (Organic Farming) सफल पूर्वक कर अभी काफी चर्चा में है। उम्र 50 साल की आरती चौहान मुंबई की रहने वाली हैं और जिस सोसाइटी में वह रहती हैं वहाँ लगभग 50 परिवार रहते हैं।

गौरतलब है कि आरती (Aarti Chauhan) के लिए यह यात्रा तकरीबन 5 वर्ष पूर्व तब प्रारंभ हुई एक दिन बीएमसी (BMC) ने सोसाइटी को एक नोटिस जारी कर गीले और सूखे दोनों प्रकार के कचरे को अलग-अलग कर रखने का निर्देश दिया, जिससे उस कचरे से खाद बनाई जा सके।

सोसाइटी ने दिखाई गंभीरता

प्रकृति को लेकर आरती की सोसाइटी ने पूरी गंभीरता के साथ वर्ष 2016 में ही कचरे से खाद निर्माण करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दिया था। आरती के हिसाब से उनकी बिल्डिंग (Building) में हर वर्ष तकरीबन 6 हज़ार किलो कचरा उत्पन्न होता है, जिससे तकरीबन 500 किलो खाद निर्मित हो जाती है।

प्रारंभ के समय में सोसाइटी के लोग उस खाद को अपनी बालकनी में लगे गमलों के लिए उपयोग किया करते थे, परंतु तब भी काफी मात्रा में खाद बाकी रह जाती थी। इस परेसानी को सुलझाने के लिए आरती ने रिसर्च करने का कार्य प्रारंभ कर दीया और तभी उन्होने छत पर करी जाने वाले खेती के बारे में जानकारी हासिल की।

छत पर शुरू हुई ऑर्गेनिक खेती

आरती ने अपनी बिल्डिंग की छत (Building Roof) पर ही कुछ सब्जियों के बीज लगाना प्रारंभ कर दिया। आरती के हिसाब से वे ऐसी सब्जियाँ उगाना चाहती थीं जिनमें कम मेहनत के साथ अधिक पैदावार प्राप्त हो सके।

आज आरती छत पर जीविक पालक, सेम, टमाटर, गोभी और बैंगन जैसी सब्जियाँ उगा रही हैं। जानकारी के लिए बता रहे है कि आरती बीते दो वर्ष में इसके लिए करीब 50 हज़ार रुपये खर्च कर चुकी हैं।

छत पर खेती (Farming At Roof) करने के लिए आरती प्लास्टिक कंटेनर और गमले आदि का उपयोग करती हैं। मीडिया से बात करते हुए आरती ने बताया है कि वे रोजाना लगभग 2 किलोग्राम जेविक सब्जियों का उत्पादन कर रही हैं।

छत पर अपनी जेविक सब्जियों का ध्यान रखने के लिए आरती रोज़ाना तकरीबन 3 घंटे का वक़्त देती हैं। आरती के हिसाब से वह ऐसी शख्स नहीं हैं जो केवल किचन के कामों तक ही सीमित रहें, वे लगातार नए-नए प्रयोग करती रहती हैं।

पूरी सोसाइटी को मिल रहा है लाभ

जिस छत पर आरती जेविक खेती (Organic Farming at Roof) कर रही हैं उसका क्षेत्रफल लगभग 3 हज़ार वर्गफुट है। आरती अब जो भी सब्जियाँ छत पर उगाती हैं, वे उन्हें सोसाइटी के परिवारों में बाँट देती हैं। अपनी सोसाइटी में सेक्रेटरी पद का उत्तरदायित्व भी संभाल रहीं हैं। आरती के इस प्रयास को मुंबई की तमाम सामाजिक संस्थाओं द्वारा सराहा गया है।

उस वक़्त के समय में कई क्षेत्रों में भी महामारी के तेजी से संक्रमण फैलने के कारण पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था, जहा लोगों को फल-सब्जि, आवश्यक वास्तु भी मिलना कुछ समय के लिए एक प्रकार से असंभव हो गया था और खेतों से बाजारों तक फल सब्जियों के पहुँचने का माध्यम पर भी रोक लग गई थी।

जिसकी वजह से खाद्य पदार्थों के दाम में वृद्धि हुई थी, उस समय कुछ लोगों ने घर बेठ कर ही घर में मौजूद सब्जियों के बीज की मदद से छत पर ही सब्जियां उगानी सुरु कर दिये और एसी अर्थिक मंदी के समय में छोटा ही सही, लेकिन बचत की और साथ ही केमिकल मुक्त अहार से तंदुरुस्त मे भी इजाफा हुआ।

ENN Team
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