
Mumbai: हम जानते हैं कि भारत काफी लंबा समय अंग्रेजों की गुलामी में बिताया है और जब भारत आजाद हुआ तो अंग्रेजों ने भारत को पूरी तरह खोखला कर दिया था। उस समय भारत में उद्योग से लेकर हर क्षेत्र पूरी तरह सुखा हुए थे।
ऐसी स्थिति में सभी क्षेत्र खुद को डिवेलप करने में लगे हुए थे, इसी के साथ व्हीकल्स की भी ढेरों कंपनियां थी जो खुद को सफल बनाने में लगी हुई थी। कुछ कंपनियों ने तो देश में अपना नाम काफी मजबूती से बना लिया, परंतु कुछ कंपनी ऐसी थी जो असफल रही। इन्ही कंपनियों में से एक है मीरा ऑटोमोबाइल्स। तो आइए जाने मीरा मिनी कार के बारे में जो आजादी के समय भारत में देखी गई।
जाने मीरा मिनी कार का इतिहास
सैकड़ों वर्ष पहले आजादी के बाद भारत में एक मिनी कार लांच की गई थी, जिसका नाम मीरा मिनी कार (Meera Minicar) था। आपको बता दें चीन और यूएस के बाद भारत का कार बाजार तीसरे नंबर पर है, जहां पर बड़ी-बड़ी नामचीन कंपनियां हर वर्ष दो से तीन कारें लॉन्च करती है। भारत का कार बाजार हर नई नई कारों के लिए काम करता है।
आपको बता दें भारत की कई कंपनियों ने इलेक्ट्रिकल व्हीकल्स का निर्माण किया, जो कि भारत के लिए काफी गौरव की बात है मीरा मिनी कार आज के समय की टाटा नैनो कार की तरह ही थी, परंतु यह कार एक ऐतिहासिक कार है, जो आजादी के समय निर्मित की गई थी। मिनी कार निर्माण का उद्देश्य केवल इतना होता है कि इन कारों को आम आदमी आसानी से खरीद सके और उसका उपयोग कर सके।
मीरा मिनी कार के निर्माता मीरा ऑटोमोबाइल्स के मालिक है। आजादी के बाद जब भारत में हर तरफ सूखे की स्थिति थी। उस समय ऑटोमोबाइल कंपनियों में से मीरा ऑटोमोबाइल्स सामने आई और इस कार को निर्माण कर एक विकासशील भारत का निर्माण करने में योगदान दिया।
मात्र 12000 RS की कीमत इस कार्य की
मिनी कार (Mini Car) का निर्माण वर्ष 1949 में उस वक्त के बहुत बड़े बिजनेसमैन जिनका नाम शंकरराव कुलकर्णी (ShankarRao Kulkarni) था, के द्वारा यह कार का निर्माण किया गया और इस कार की कीमत मात्र 12000 RS रखी गई, इसका कारण यह है कि शंकरराव कुलकर्णी भारत के आम नागरिकों के लिए यह कार उपलब्ध कराना चाहते थे।
जिसके चलते उन्होंने इस मिनी कार को बनाया और उसकी कीमत मात्र 12000 RS रखी। वर्ष 1949 में इसका पहला प्रोटोटाइप का निर्माण हुआ, जो कुलकर्णी के द्वारा मुंबई के इर्द-गिर्द चलाया जाता था। कार को आरटीओ में रजिस्टर्ड कराया साथ ही उस गाड़ी की नंबर प्लेट का निर्माण भी हुआ, जिसका MHK 1906 नंबर था।
टाटा नैनो के जैसी ही थी मीरा मिनी कार
मीरा मिनी कार को इस तरह डिजाइन किया गया था कि उसमें केवल 2 सीट ही थी। कुलकर्णी द्वारा निर्मित यह पहली कार थी। इसके बाद उन्होंने 5 और अलग-अलग मॉडल दिए थे। पांचवां और आखिरी मॉडल 1970 में लांच हुआ था जिसका नंबर MHE 192 था।
शंकरराव कुलकर्णी के पोते हेमंत कुलकर्णी ने बताया कि उनके दादा जी द्वारा निर्मित मीरा मिनी कार वर्तमान समय की टाटा नैनो कार के जैसी ही थी। सिंगल वाइपर, रियर इंजन, समान माइलेज (पेट्रोल पर 20 kmpl) यही दोनो मे समानता है।
कुछ कारणों के चलते बाजार में नहीं उतर सकी मीरा मिनी कार
ब्यूरोक्रेसी के कारण मीना मिनी कार को मार्केट में उतरने का मौका नहीं मिला। शंकरराव ने काफी हाथ पांव मारे केंद्र सरकार से संपर्क किया, यहां तक की यह फैक्ट्री लगाने के इच्छुक हैं। इस बात का प्रस्ताव भी उन्होंने केंद्र सरकार के सामने रखा, परंतु केंद्र सरकार ने उनके प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
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— CNBC-AWAAZ (@CNBC_Awaaz) September 27, 2022
यह बात 1975 की है जिस समय मारुति सुजुकी बाजार में अपनी कार लॉन्च करने वाली थी। स्टार तक शंकरराव ने अपने इस गाड़ी के लिए करीब 5000000 रुपए खर्च कर दिए थे। अब उनके पास फैक्ट्री लगाने के लिए पैसे नहीं थे, इसलिए वे चाहते थे कि सरकार से उनको मदद मिल सके।



