कश्मीर अपने अंदर बहुत बड़ी ऐतिहासिक विरासत संजोए हुए हैं, यहाँ 5000 साल पुरानी सभ्यता के सबूत हैं

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Kashmir heritage Site
All about Kashmir heritage, archaeology site and historical place. Burzahom is very important Archaeological site in Srinagar Kashmir.

Srinagar: कश्मीरी भाषा में एक कहावत कही जाती है, गर फिरदौस जमी अस्तो हमीं अस्तों हमीं अस्तों अर्थात दुनिया में अगर कहीं कोई जन्नत है तो वह यही है कश्मीर में। जहां हम सब जानते हैं कश्मीर अपनी सुंदर वादियों प्राकृतिक पहाड़ झील बर्फ से ढकी हुई ऊंचे पर्वत और कितने ही सुंदर पेड़ों फल और फूल के लिए प्रसिद्ध है।

इसकी डल झील को देखने लाखों लोग आते हैं हर मौसम में परंतु कश्मीर सिर्फ इतना ही नहीं है। दोस्तों पुरातत्व विभाग के हिसाब से यदि कश्मीर को देखा जाए, तो 5000 सालों (5000 Years Before) से लोग यहां रहते आए हैं। जिस वजह से इसमें ढेरों ऐसी ऐतिहासिक धरोहर (Heritage Sites) है, जिन्हें सही से खोजना और सहेजना बहुत आवश्यक है।

बुर्जहोम (Burzahom) जैसे कुछ ऐतिहासिक स्थान है, जिनको सही से यदि रिसर्च की जाए, तो निश्चय ही मानव इतिहास की कुछ नई कड़ियां सामने आ सकती हैं। इनमें से कुछ चीजें हम आपसे आज शेयर करने वाले हैं।

कश्मीर में पिछले 30 सालों तक ना ही कोई खुदाई हुई ना ही कोई शोध कार्य किए गए

पुरातत्व विभाग की जानकारी के अनुसार कश्मीर में लगभग 80000 साल पहले कुछ जमीनी हलचल हुई, जिसकी वजह से वहां जो झील हुआ करती थी, कुछ सूख गई, जिससे वो जमीन खेती करने के लिए सबसे उपयुक्त बन गईं, जिस वजह से पिछले कुछ हजार साल से मानव वहां बसता रहा है।

वही पाषाण काल की 10 से अधिक ऐतिहासिक स्थल है, जिसमें सबसे जो खास है, उसे बुर्जहोम कहा जाता है, आपको बताना चाहेंगे यह वह जगह है जहां मानव के धरती के नीचे निवास करने के सबूत पाए गए।

परंतु पुरातत्व विशेषज्ञ के अनुसार सरकार ने अभी तक बुर्जहोम की नीचे की ना ही ठीक से खुदाई की और ना ही उसे रिसर्च के लिए पुरातत्व विभाग को सौंपा गया। यह बहुत ही महत्वपूर्ण स्थल है और यदि इसका सही से रिसर्च की जाएगी तो निश्चय ही कुछ अमूल्य जानकारी निकलेगी।

पुरातत्व विभाग का न ही कोई ऑफिस बचा और ना ही शिक्षण संस्थान में इसे पढ़ाया गया

दोस्तों कश्मीर में किसी भी विश्वविद्यालय में पुरातत्व से संबंधित नाही कोई कोर्स और ना ही कोई विभाग था इसी वजह से कश्मीर महज एक पर्यटन स्थल बनकर रह गया और ऐतिहासिक धरोहरों की जांच पड़ताल खुदाई जैसी चीजों का काम रुका हुआ था।

आंकड़ों के रूप में देखा जाए तो 1990 के दशक में कुछ दिन खुदाई का काम हुआ उसके बाद 2017 तक पुरातत्व विभाग के ना होने की वजह से किसी भी प्रकार की खुदाई या रिसर्च का काम नहीं हुआ। फिर सरकारें बदली और 2017 में दोबारा से एतिहासिक धरोहरों में खुदाई की शुरुआत की गई।

कश्मीर का पुरातत्व विभाग 1990 के समय ही जम्मू शिफ्ट हो गया था। विशेषज्ञों के अनुसार अब विश्वविद्यालय में पुरातत्व और ऐतिहासिक विरासत से संबंधित कोर्स भी शुरू किए गए हैं। वही बकायदा इसके डिपार्टमेंट की स्थापना भी कर दी गई।

कश्मीर के प्रसिद्ध गार्डन भी पुरातत्व विभाग की पहुंच के बाहर

पुरातत्व विभाग के अनुसार कश्मीर में 2 महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक विरासत है एक बुर्जहोम दूसरी गुफकराल। इनके अलावा पूरे भारत में जितने भी मुगल गार्डन हैं वह सब पुरातत्व विभाग एवं सरकार के दायरे में आते हैं जिससे उनका रखरखाव बेहतर है।

आश्चर्य की बात है कि कश्मीर में इतने बड़े और सुंदर मुगल गार्डन होने के बावजूद वो सरकार के ऐतिहासिक विरासत के विभाग की पहुंच से बाहर है। जिस वजह से यह मुगल गार्डन ऐतिहासिक धरोहर होने के बजाय पुष्प कृषि विभाग का हिस्सा बन के रह गया।

पहली सदी में कभी बुद्ध धर्म का भी मुख्य केंद्र कश्मीर हुआ करता था

आपको जानकार आश्चर्य होगा की कश्मीर से बौद्ध धर्म का भी गहरा नाता है। माना जाता है कुषाण के राजा कनिष्क के नेतृत्व में पहली से दूसरी सदी के आसपास यहां बौद्ध धर्म की बड़ी बैठकें हुआ करती थी। जिसकी वजह से ही बौद्ध धर्म कश्मीर से होता हुआ, एशिया के दूसरे हिस्सों तक पहुंच पाया। यह मठ हरवान के नाम से प्रसिद्ध है जो श्रीनगर के समीप स्थित है।

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