अपने गांव के विकास के लिए डॉक्टरी छोड़ सरपंच बनी बेटी, बोली सबसे पहले गांव का विकास फिर

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Shahnaz Khan Sarpanch
Shahnaz Khan is the youngest and MBBS Sarpanch of Rajasthan Bharatpur district. Story of MBBS Doctor Shahnaz Khan Who is female Sarpanch of Bharatpur Rajasthan.

File Photo

Bharatpur: इंसान जीवन में कुछ अलग करना चाहते हैं, वह अपना रास्ता बना ही लेते हैं। आज के दौर में महिलाएं न सिर्फ अपने घर की जिम्मेदारी बखूबी निभाती है, बल्कि अपने घर और बाहर की भी जिम्मेदारी को संभालते हुए हर क्षेत्र में कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रही है। शहर में रहने वाली या फिर पढ़ने वाली महिलाओं या लड़कियों के बारे में कहा जाता है कि शहरो की लड़कियां मॉर्डन रहती है, वो गांव की जिंदगी नही जीना जानती उनसे बहुत दूर रहती है। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नही है।

चाहे गांव हो या शहर आज की महिलाए हर क्षेत्र में पुरुषों के समान अपना योगदान दे रही है। लोग कहते हैं खुली आँखों से सपने नहीं देखना चाहिए, लेकिन अगर खुली आँखों से सपने देखने के साथ-साथ उसे पूरा करने में रात दिन जुट जाएँ, तो सपने साकार भी हो जाते है। हमारे देश मे इसके बहुत सारे उदाहरण भी देखे जाते है।

इस दिशा में 24 वर्षीय युवती शहनाज खान (Shahnaz Khan) ने भी गांव की ही नही, बल्कि राजस्थान (Rajasthan) के लिए जो किया, वो किसी मिसाल से कम नही है। एक नयी सीख दी की अगर आपके हाथ में कोई अच्छा हुनर हो जो आपको और लोगो से अलग बनाये, तो आप कही भी रहते हुए भी किसी भी परिस्थिति में सफल इंसान बन सकते है।

राजस्थान के भरतपुर (Bharatpur Rajasthan) जिले के मेवात क्षेत्र में एक MBBS महिला डॉक्टर ने सरपंच बनकर इलाके में मिशाल पैदा की है। बता दें कि महिला डॉक्टर हरियाणा और मेवात के किसी एरिया से चुनाव लड़ना चाहती हैं। उनके मुताबिक उनका उद्देश्य सही तरीके से क्षेत्र के विकास पर है। महिला सरपंच (Female Sarpanch) की पूरी फैमिली राजनीति में है और वो दादा की सीट पर सरपंच बनी हैं।

कौन है ये सरपंच MBBS महिला

आज एक ऐसी ही लड़की के बारे में बताने जा रहे हैं जो 24 साल की उम्र में सरपंच गई। राजस्थान के भरतपुर जिले में रहने वाली 24 साल की शहनाज (24 Year Old Shahnaz Khan Who is Female Sarpanch) यहां के कामां पंचायत से सरपंच चुनी गई हैं। उन्होंने सरपंच के चुनाव को 195 वोटों से जीता और राजस्थान की पहली महिला MBBS डॉक्टर सरपंच बन गईं। शहनाज अपने क्षेत्र में लड़कियों की शिक्षा पर जोर देना चाहती हैं। वो लड़कियों को हर क्षेत्र में सफल बनाना चाहती है।

कोई भी लड़की अपने सपनो से भागे नही उनको पूरा करने का हौसला बनाये। शहनाज ने 5th तक पढ़ाई गुरूग्राम के श्री राम स्कूल से की और 6th से 12th की पढ़ाई मारूति कुंज से की है। उन्होंने अपनी 10वीं तक की पढ़ाई गुरुग्राम के श्रीराम स्कूल से की उसके बाद 12वीं की पढ़ाई मारुति कुंज के दिल्ली पब्लिक स्कूल से पूरी की है। उसके बाद शहनाज उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद से MBBS कर रही हैं।

नाना केबिनेट मंत्री थे

उन्होंने सरपंच के चुनाव (Sarpanch Election) को 195 वोटों से जीता और राजस्थान की पहली महिला MBBS डॉक्टर सरपंच बनीं। शहनाज के नाना पंजाब, राजस्थान और हरियाणा के केबिनेट मंत्री रहे थे और सांसद भी रहे थे। शहनाज भरतपुर (Bharatpur) के कामां पंचायत की सरपंच बनीं हैं।

राजनीति से रिश्ता

शहनाज ने बताया कि जहां से उनके दादा 55 साल तक सरपंच थे वहीं से वे चुनाव में खड़ी हुई और जीती भी हैं। शहनाज के दादा को फर्जी सर्टिफिकेट देने का आरोप था जिस कारण सरपंच चुनाव स्थगित कर दिया गया था। फिर शहनाज के दादा के बाद उस सीट को लेकर घर में बात शुरू हो गई थी कि कौन चुनाव लड़ेगा इस बात पर काफी देर बाद निर्णय हुआ कि शहनाज ही इस सीट पर सरपंच का चुनाव लड़ेंगी। जानकारी के अनुसार शहनाज की पूरी फैमिली राजनीति में ही है, पिता गांव के प्रधान, मां विधायक,संसदीय सचिव भी रह चुकी हैं। ऐसे में शहनाज का नाम सरपंच चुनाव के लिए दिया गया।

कैसे सरपंच बन गईं शहनाज

शहनाज ने बताया कि मुझसे पहले मेरे दादाजी भी यहां से सरपंच थे। लेकिन पिछले साल अक्टूबर में कोर्ट ने वो चुनाव को खारिज कर दिया गया। जिसके बाद चर्चा शुरू होने लगी कि चुनाव में कौन खड़ा होगा। उन्होंने बताया कि राजस्थान में सरपंच का चुनाव लड़ने के लिए दसवीं पास होना अनिवार्य है।

लड़कियों की शिक्षा पर जोर देना

शहनाज सबसे युवा सरपंच बन गई हैं। मीडिया को दिए इंटरव्यू में शहनाज ने कहा, कि लोग आज भी अपनी बेटियों को पढ़ने के लिए स्कूल नहीं भेजते हैं। गाँव मे लोग आज भी बेटी को बोझ समझते है उनकी जल्दी शादी करवा देते है। वो पढ़ाई से दूर हो जाती है। उनको गृहणी बना दिया जाता है, लेकिन हर लड़की के सपने होते है जिनको वो और लड़कियों की तरह पूरा करना चाहती है।

मैं लड़कियों की शिक्षा पर काम करना चाहती हूं और उन सभी अभिभावकों को अपना उदाहरण दूंगी जो बेटियों को शिक्षा नही देना चाहते है। आज जे युग मे बेटी बोझ नही वरदान है। उन्हें गुरुग्राम के एक सिविल अस्पताल में अपनी इंटर्नशिप भी पूरी करनी है, जिसके बाद वह आगे पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई भी करना चाहती हैं।

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