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Kolkata: अब राम मंदिर बनने का काम चालू हो गया है। अयोध्या में 1992 के राममंदिर आंदोलन के समय भगवा झंडा फहराने के बाद पुलिस फायरिंग में कोठारी बंधुओं के प्राण चले गए थे। अब कोठारी बंधुओं की बहन पूर्णिमा कोठारी ने राम मंदिर निर्माण में सरकार से अपनी भी भूमिका सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि संगठन और ट्रस्ट उन्हें भी कोई कार्य करने का आदेश दे, तो वह भी कार्य करना चाहेंगी।
उन्होंने हाल ही में रामलला के दर्शन करने के लिए अयोध्या जाने से पहले भदोही में मीडिया से बातचीत की है। उन्होंने मीडिया में बताया की 1992 में मेरे दोनों भाइ शहीद हुए थे। दोनों भाइयों ने सबसे पहले गुंबद पर भगवा झंडा फहराया था, फिर कहा जाता है की इसी कारण उन्हें निशाना बनाया गया था, फिर भी राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उन्हें जीवन की सबसे बड़ी खुशी हासिल हुई है।’ अब मंदिर का काम भी चालु हो चूका है।
आपको बता दे की पत्रकारों द्वारा पूछे सवाल पर उन्होंने कहा कि वह सरकार से आग्रह करती हैं कि जब मंदिर निर्माण होने जा रहा है, तो उनकी भी भूमिका सुनिश्चित करते हुए संगठन या ट्रस्ट की तरफ से कोई कार्य करने का आदेश मिले तो वो अपना कार्य करना चाहती हैं। इस वक़्त भदोही के भाजपा विधायक रवींद्रनाथ त्रिपाठी भी मौजूद रहे। उन्होंने पूर्णिमा कोठारी को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित भी किया।
Salute to kothari brother's who sacrificed their life for Shri #RamMandir 🚩@KapilMishra_IND @RSSWarriors @RSSorg @VHPDigital pic.twitter.com/0CnqbIxNuA
— himanshu pandey (@snatanihimanshu) May 26, 2020
कोठारी बंधुओं की बहन पूर्णिमा कोठारी ने राम मंदिर निर्माण में सरकार से अपने भाई के ना होने पर उनकी जगह अपनी भी भूमिका तय करने के लिए अपील की है। उन्होंने कहा कि संगठन और समिति उन्हें भी किसी कार्य मे आगे करे, जिससे वो अपने भाई के लिए कुछ कर पाए। जब भी राम मंदिर आंदोलन की बात होती है, तो सबसे पहले उनके बलिदान को याद किया जाता है। भाइयों को खोने का गम तो बहुत है, लेकिन उनके बलिदान के बाद परिवार ने प्रण लिया था कि राम मंदिर निर्माण के लिए जब भी कारसेवा होगी तो परिवार उसमें अपनी भूमिका अदा करेगा।
गुंबद पर शरद 20 साल और रामकुमार कोठारी 23 साल नाम के भाइयों ने मिलकर भगवा झंडा फहराया। 21 से 30 अक्टूबर 1990 तक अयोध्या में लाखों की तादात में कारसेवक एकजुट हो गए थे। सब विवादित स्थान की तरफ जाने की प्लांनिग में थे। विवादित स्थल के चारों ओर बहुत अधिक सुरक्षा थी। अयोध्या में कर्फ्यू लगने के बाद भी सुबह करीब 10 बजे चारों दिशाओं से बाबरी की ओर सेवक आगे कदम रखने लगे। इनकी निगरानी कर रहे थे विनय कटियार, अशोक सिंघल, उमा भारती जैसे नेता। विवादित स्थल के चारों ओर और अयोध्या शहर में UP PAC के तकरीबन 30 हजार जवान तैनात कर दिए गए थे।
Tribute to great #KothariBrothers (Ram Kothari & Sharad Kothari),who hoisted Bhagwa Dwaj at Ram Lalla Virajman birth place on this day, 29 years ago and martyred after 2 days.#TributeToKothariBrothers#KothariBrothers#Ayodhya pic.twitter.com/TYpNQxczwC
— PTM (@IamIndianDesi) October 30, 2019
इसी दिन बाबरी मस्जिद के गुंबद पर शरद 20 साल और रामकुमार कोठारी 23 साल नाम के भाइयों ने भगवा झंडा फहरा दिया था। सेवको और साधु-संतों ने 11 बजे सुरक्षाबलों की उस गाड़ी को अपने कब्जे में कर लिया, जिसमें पुलिस ने सेवकों को गिरफ्तार करके शहर के बाहर छोड़ने के लिए तैयार की थी। इन बसों को हनुमान गढ़ी मंदिर के समीप खड़ा किया गया था।
मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) उस समय उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उनका स्पष्ट रूप से निर्देश था कि मस्जिद को कोई हानि नहीं पहुंचना चाहिए। पुलिस को पहले साफ तौर पर निर्देश दिया गया था कि जनता को भागने के लिए केवल आंसू गैस के गोले का ही प्रयोग किया जाए। लेकिन, बैरिकेडिंग टूटने के बाद सेवक विवादित ढांचे के गुंबद पर चढ़ गए। वहां, कोठारी बंधुओं ने गुम्बद में चढ़कर भगवा झंडा फहरा दिया।




