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Delhi: देश और दुनिया के राम भक्त खुश है की अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो गया है। अब राम लला का विशान मंदिर भी जल्द ही तैयार हो जायेगा। कल राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने 28 साल बाद रामलला के दर्शन किए। अब राम मंदिर का कार्य शुरू होने पर नेपाल के पूर्व उप प्रधानमंत्री ने भी खुशी ज़ाहिर की है।
नेपाल के पूर्व उप-प्रधानमंत्री कमल थापा ने राम मंदिर निर्माण का कार्य शुरू होने पर कहा, “यह सुनकर बहुत खुशी हुई कि भगवान रामचंद्र की जन्मस्थली अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य आज शुरू हो गया है। वास्तव में नेपाल के लोगों के लिए भी यह एक खुशी का क्षण है। जहां सीता माता का जन्म हुआ था। उन सभी को बधाई जिन्होंने मंदिर को लेकर लंबी लड़ाई लड़ी और जीती।” पूरे विश्व में राम भक्तो में ख़ासा उल्लास है।
ट्विटर पर एक यूजर (@Saaho_Sher) का दावा है की एक स्थान पर अयोध्या के राम मंदिर की कुछ प्राचीन मुर्तिया राखी हुई है, जिन्हे बाबर के आक्रमण से पहले अयोध्या के राम मंदिर से निकाल कर सुरक्षित कर लिया गया था। यूजर ने एक फोटो पोस्ट करते हुए लिखा की “ये प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण जी और माता सीता की वो वास्तविक मूर्तियां हैं, जो श्रीराम मंदिर, अयोध्या से बाबर के आक्रमण से पहले हटा कर सुरक्षित जगहों पर रख दी गईं थीं।” आगे यूजर ने बताया की “जब बाबर ने अयोध्या पर हमला किया तो मन्दिर के सेवादार पण्डित श्यामानन्द महाराज ने मूर्तियों को साथ लेकर इन्हें स्वामी एकनाथ महाराज को (पैठण, महाराष्ट्र) को दे दिया।” साथ में तस्वीर भी है।
यूजर ने आगे बताया की “इसके पश्चात ये मूर्तियां छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरु, स्वामी समर्थ रामदास के संरक्षण में दी गईं। जब स्वामी समर्थ दक्षिण भारत की यात्रा पर गए, तब उन्होनें इन मूर्तियों को पवित्र तुंग और भद्रा नदियों के संगम तुंगभद्रा में एक छोटे से कस्बे हरिहर, कर्नाटक में स्थापित किया।” अब इसे लोग साँझा कर रहे है।
यूजर ने आगे दावा किया की “मूर्तियों की पूजा तब से हरिहर के नारायण आश्रम के गुरुओं द्वारा की जाती है। सर्वोच्च न्यायालय के अयोध्या पर दिए निर्णय के बाद हरिहर में एक बड़ा उत्सव मनाया गया था। हरिहर और नारायण आश्रम के लोग अब इन मूर्तियों को श्री राम जन्मभूमि अयोध्या को वापस करने की तैयारी कर रहे हैं।” अब ऐसे में यह पुख्ता करना बहुत जरुरी हो गया है।
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अभी ट्विटर यूजर के इन दावों की पुष्टि तो “एक नंबर न्यूज़” की ओर से नहीं की जा सकती हैं, परन्तु इस बात में दम होने की पूरी सम्भावना है। भारतीय इतिहास में इन बातों का उल्लेख है की जब जब मुस्लिम आक्रमणकारी हिन्दू धनमिक नगरी की तरफ बढ़ते थे, तब तब वहां के लोग और मंदिर के पुजारी मंदिर की प्राचीन और कीमती मूर्तियों को सुरक्षित स्थानों में भिजवा देते थे या पवित्र नदियों में विसर्जित करवा देते थे, ताकि क्रूर आक्रमणकारी देवी देवताओ की मूर्तियों को नुक्सान ना पहुंचा पाए। अब विशाल मंदिर तो कही नहीं ले जाया जा सकता था, वर्ना मंदिर भी बचा लिए जाते।
भारत के ऐसे कई मंदिर है, जो क्रूर आक्रमणकारी द्वारा तोड़े गए थे, परन्तु इस मंदिरों की मुर्तिया और खजाना सुरक्षित कर लिया गया था। भारत के इतिहास में ऐसे अनेक उदहारण है। उस हिसाब से यूजर की इस जानकारी को बल मिलता है और अब यह जाँच का विषय है। सही पाए जाने पर इन भगवान् राम, सीता और लक्मण जी की मूर्तियों और शिवलिंग को अयोध्या में बन रहे राम मंदिर में स्थापित किया जा सकता है।
पिछले साल सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद मंदिर निर्माण के लिए कुछ दिन पहले ही समतलीकरण का कार्य शुरू हुआ है। मंदिर के एरिया के खुदाई के दौरान कई कलश, पत्थर के स्तंभ और देवी देवताओं की खंडित मूर्तियां मिली थी। इसके अलावा कुछ और सामान भी मिट्टी के नीचे से मिले हैं। जो हिंदू संस्कृति से जुड़े हैं। 17 सालों बाद राम जन्म भूमि परिसर में खुदाई की गई।
आपको बता दे की लॉक डाउन के दौरान अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए 4 करोड़ 60 लाख रुपए दान के रूप में आए हैं। इन पैसों को अलग-अलग दानदाताओं ने राम मंदिर निर्माण के लिए खोले गए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खाते में जमा कराए गए है।
राम मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का कहना है कि पैसे की कमी के चलते राम मंदिर निर्माण में कोई बाधा ना उत्पन्न हो और भव्य और दिव्य गगनचुंबी राम मंदिर का निर्माण हो यही भक्तों की कामना है और इसीलिए वह दान दे रहे हैं। राम मंदिर निर्माण के लिए लगातार भक्त दान दे रहे हैं और इसके लिए मैं सभी दानदाताओं को धन्यवाद देता हूं।




