युवा भारतीय रिसर्चर ने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में 2500 साल पुराना संस्कृत का सिद्धांत सॉल्व कर दिया है

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Ashtadhyayi Sanskrit
Indian researcher student Rishi Rajpopat created history at Cambridge University In UK. He solved 2500 years old Sanskrit mystery.

Delhi: दोस्तों हमारा मानव विज्ञान एवं सभ्यता दिन प्रतिदिन तरक्की करता जा रहा है, आज विज्ञान ने अंतरिक्ष के भी लाखों-करोड़ों किलोमीटर तक अपनी खोज बढ़ा दी है, परंतु हमारे भारत का इतिहास है बहुत ही स्वर्णिम रहा है। एक ओर धन समृद्धि के नाम पर भारत सोने की चिड़िया कहलाता था।

वहीं अगर हम ज्ञान की बात करें, तो हमारे धर्म ग्रंथ में तरह-तरह का विज्ञान छुपा हुआ है और हर काल और युग में बड़े-बड़े साधु संत वैज्ञानिक के रूप में एक से बढ़कर एक सूत्र संपादित करके गए हैं। ऐसे ही एक विद्वान जिन्हें हम पाणिनी के नाम से जानते हैं।

उन्होंने आज से ढाई हजार साल पहले (2500 Year Before) ही बहुत सारे सूत्र संपादित किए थे, जिनकी गुत्थियां आज तक भी सॉल्व नहीं हो पाई थी, परंतु भारत के ही एक रिसर्च करने वाले छात्र ने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी (Cambridge University) में अपनी लंबी रिसर्च के दौरान उनके इस सूत्र का अर्थ ज्ञात कर लिया है।

जिसे अब कंप्यूटर के माध्यम से आने वाली बच्चों को पढ़ाया भी जाएगा और कहते हैं यह एक अमूल्य ज्ञान साबित होने वाला है भविष्य के लिए। आइए जानते हैं रिसर्च करने वाले विद्वान विद्यार्थी के बारे में।

कौन थे सूत्र के रचयिता और कब लिखे गए ये सारे ग्रंथ

भारतीय इतिहास में ऐसा बताया जाता है कि ईसा से भी 700 वर्ष पूर्व भाषाओं को बनाने रचने करने वाले एक विद्वान पुरुष हुए जिन्हें पढ़ने के नाम से जाना जाता है, जो लगभग 2500 वर्ष पूर्व हुए उन्होंने संस्कृत के व्याकरण में अष्टाध्याय नामक एक ग्रंथ लिखा, जिसमें मानव सभ्यता एवं भाषाओं के बारे में 4000 से ज्यादा सूत्र दिए हुए थे।

इनमें से अधिकतर सूत्र ऐसे हैं, जिन्हें आज भी संस्कृत भाषा के बड़े-बड़े विद्वान समझ ना सके ऐसा माना जाता है कि उन सूत्र में वर्तमान एवं भविष्य में तरक्की के लिए बहुत सारा ज्ञान छुपा हुआ है और इसी में से एक सूत्र हमारे भारतीय विद्यार्थी श्री ऋषि राजपोपट (Rishi Rajpopat) ने अपने लंबे रिसर्च के बाद सॉल्व किया।

असफल होने पर छोड़ दिया था रिसर्च करना और खुद को लगाया Self-Improvement में

ऋषि के अनुसार 9 से 10 महीने वह लगातार प्रयास करते रहे पाणिनी के सिद्धांत को समझने में परंतु बहुत प्रयत्न के बाद भी जब कोई गुत्थी (Sanskrit Mystery) नहीं सुलझी। तो उन्होंने खुद को एक छुट्टी देने की सोची, फिर कई महीनों तक उन्होंने अपने आपको खाली रखा।

https://twitter.com/Cambridge_Uni/status/1603326448361738240

ये समय Self-Improvement को देने में लग गए जैसे कुकिंग करते थे, साइकिलिंग करते थे एवं मेडिटेशन द्वारा जप भी करते थे। जिससे कुछ महीनो में ही उनका एनर्जी लेवल वापस रिस्टोर हो गया और फिर से शुरू कर दिया और उन्हें अपना रिसर्च वर्क।

सूत्र समझने के बाद भी लगे 2 साल से भी ज्यादा उन्हें सॉल्व करने में

खुद को रिफ्रेश करने के बाद ऋषि बताते हैं कि जब वह वापस रिसर्च के लिए आए तो पहले दिन ही अष्टाध्यय खोलने के बाद चमत्कारिक रूप से सूत्र की लाइनें समझ में आने लगी। इससे उनका उत्साह वर्धन हुआ और ऐसा एनर्जी लेवल बढ़ा की रात दिन नींद भी नहीं आती थी, फिर घंटो-घंटो लाइब्रेरी में रिसर्च में बिताने लगे। इतना करने के बाद भी पूरे-पूरे ढाई साल लग गए उन्हें एक सूत्र को सॉल्व करने में।

पाणिनी जैसे विद्वान सदियों में भी नहीं होते इस खोज से होगा आने वाली मानव सभ्यता को फायदा

एक बार जर्मनी के विख्यात विद्वान मैक्स मूलर ने कहा था कि पाणिनी (Panini) जैसा मस्तिष्क सदियों में पैदा होता है, उन्होंने जो अष्टाध्याई (Ashtadhyayi) के जरिए ढाई हजार पहले दे दिया था, उसके सामने आज के लोगों का ज्ञान कुछ भी नहीं।

https://twitter.com/gopsec2/status/1607303882614661120

वही ऋषि राजपोपट के अनुसार भी अष्टाध्याई में सभी प्रकार के विषय में शोध दी गई है। जैसे राजनीतिक विज्ञान, सामाजिक वर्णन, आर्थिक दृष्टि से व्याख्यान उन्हें लगता है कि यदि अष्टाध्याई को और अधिक शोध करके सॉल्व किया गया, तो मानव सभ्यता के लिए यह बहुत ही फायदेमंद साबित होगा।

https://twitter.com/TheQuint/status/1607746196449415168

इसलिए वह आने वाले समय में इस ग्रंथ को और बारीकी से रिसर्च करने में बताने वाले। ऋषि ने यह शोध कार्य कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में संस्कृत के प्रोफेसर वसेंजो वर्जीनिया के संरक्षण में किया। प्रोफेसर का कहना है उन्हें अपने शिष्य पर नाज है।

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