8000 करोड़ में पानी के अंदर चलने वाली भारत की पहली अंडर वॉटर ट्रेन आ रही है, यह सुविधाएं मिलेंगी

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India first underwater train
India's first underwater train to be launched in Kolkata soon. India plans to build first underwater road-cum-rail tunnels across Brahmaputra.

Presentation Photo

Kolkata: पुरे विश्व में यातायात के तीन मार्ग बनाए गए है, एक जल मार्ग, दूसरा वायु मार्ग, तीसरा थल मार्ग विश्व की हर जगह अपने आप में ही बहुत खास है। कोई अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। तो कोई अपने खान पान और रीति-रिवाज के लिए। दुनिया में घूमने के लिए एक यातायात मार्ग और यातायात साधन की जरुरत होती है।

जल मार्ग के लिए जलयान, वायु मार्ग के लिए हवाई जहाज और थल मार्ग के लिए रेल बहुत सुविधाजनक मानी जाती है लोग रेलों से 24 घंटो का सफर भी बहुत ही अच्छी तरह कर सकते है। क्योंकि रेल के अंदर बहुत सी सुविधाएं होती है, जिससे लोगो का सफर आसानी से कट जाता है।

कई रेलें तो इतनी स्पीड में चलती है कि 1000 किलोमीटर का सफर भी बहुत ही आसानी से हो जाता है। अभी तक तो ट्रेनें ट्रेन की पटरी पर दौड़ रही थी। परंतु आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिको के क्रिएटिव माइंड के कारण ट्रेन को पानी के अंदर से भी चलाने का मार्ग बना लिया है।

आप सोच रहे होंगे की क्या बाकई ऐसा संभव है। तो आपको बता दें कि ऐसा बिल्कुल संभव है। ये भारत के लोग है, जनाव जब लोग चाँद पर जाने का मार्ग बना सकते है फिर तो ये पानी के अंदर जाने का मार्ग है, तो चलिए जानते है क्या है इस बात सच।

कोलकाता शहर

भारत के पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजधानी कोलकाता, जिसे कलकात्ता के नाम से भी जाना जाता है। भारत के विशाल और महत्वपूर्ण महानगरों में से एक है। भारत के पूर्व में स्थित इस नगरी को “सिटी ऑफ ज्वाय” भी कहा जाता है। बहुत से विशेष नाम जैसे मदर टेरेसा, रबींद्रनाथ टैगोर, सत्यजीत रे और सुभाष चंद्र बोस जैसे नाम कोलकाता शहर (Kolkata City) से जुड़े हैं।

कोलकाता शहर 22.82 डिग्री उत्तर में 88.20 डिग्री पूर्व में स्थित है। यह शहर हुगली नदी (Hubli River) के तट तक बसा हुआ है और इसकी ऊँचाई 30 फीट है। कोलकाता का कुल क्षेत्रफल 1886 वर्ग किलोमीटर है। सुन्दरवन डेल्टा, कोलकाता से बंगाल की खाड़ी को अलग करता है।

अब कोल्कता की हुगली नदी पर देश का पहला अंडवाॅटर मेट्रो टनल (India’s First Underwater Train Tunnel) बन गया है। जो हावड़ा को कोलकाता से जोड़ कर रखेगा। 16.6 किलोमीटर लंबे ईस्ट-वेस्ट मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए यह टनल बहुत खास है। बनाए गए टनल के अंदर से मेट्रो ट्रेन (Metro Train) करीब 80 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से गुजरेगी।

520 मीटर है टनल की लंबाई 2020 में इसका कॉरिडोर तैयार किया गया

कोलकाता की हुगली नदी में बनाई गई टनल नदी के तल से 30 मीटर गहरी है और इसकी कुल लंबाई 520 मीटर है। हम कह सकते है कि यात्री करीब 1 मिनट के लिए नदी के गर्त में से होकर गुजरेंगे। आप अनुमान लगा सकते है कि यह सफर कितना दिलचस्प हो सकता है।

कोलकाता के पूरे ईस्ट-वेस्ट प्रोजेक्ट में लगी लागत लगभग 9000 करोड़ रुपए है। मात्र अंडरवाॅटर टनल बनाने पर ही 60 करोड़ रुपए खर्च हुए है। इस टनल प्रोजेक्ट के लिए जापान बैंक ऑफ इंटरनेशनल को-ऑपरेशन के द्वारा पश्चिम बंगाल की सरकार को 5000 करोड़ की मदद प्रदान की गई है।

यह प्रोजेक्ट को कोलकाता मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (केएमआरसी) के द्वारा बनाया गया है। केएमआरसी के एमडी श्रीमान सतीश कुमार ने बताया कि ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर पर ट्रेन 2020 से चलना प्रारम्भ हुई है, जो भारत वासियो और कोलकता वासियो के लिए अच्छी खबर है।

कितना समय लगा

इस टनल को बनाने में करीब 14 महीनो का समय लगा। टनल बनाने का काम वर्ष 2019 में अप्रैल माह से शुरू हुआ था। यह समय काफी लंबा था। इस टनल के निर्माण होने से नदी के पश्चिम दिशा में स्थित हावड़ा स्टेशन, पूर्व दिशा में स्थित महाकरन, सियालदह, साल्टलेक स्टेडियम, फूल बागान, सिटी सेंटर, बंगाल केमिकल्स, सेंट्रल पार्क, करुणामई और साल्ट झील सेक्टर-5 स्टेशनों से अपना संपर्क स्थापित कर लिया।

आपको बता दे की कोलकाता मेट्रो भारतीय रेल के अंतर्गत आती है और भारत रेलवे ने संपूर्ण प्रोजक्ट पर लगभग 8 हजार करोड़ रुपये खर्च किए। इसी लाइन पर भारत में पहली बार नदी के अंदर आयात निर्यात के लिए एक टनल बनाई है। अप और डाउन लाइन पर दो सुरंगें भी डिज़ाइन की है। जो लगभग 1.4 किलोमीटर लंबी है।

भारत देश में रेल विभाग खूब तरक्की कर रहा

दी गई जानकारी के अनुसार इस रेलगाड़ी को सुरंग पार करने में मात्र एक मिनट का समय लगेगा। हुबली नदी के अंदर बनी यह टनल देश की सुरक्षा की हाईटेक तकनीक सिद्ध हुई है, क्योंकि देश में ट्रेनें जमीन के नीचे बनी सुरंग पार करती थी, परंतु इस रेल से पहले कोई भी रेल ने कभी किसी नदी के अंदर बनी सुरंग को पार नहीं किया।

पहले भी देश में सी प्लेन के माध्यम से हवाई जहाज पानी के ऊपर चलाया जा चुका है। आने वाला समय देश में खूब तरक्की लाएगा। देश अब उड़ने वाली बसों को बनाने की तैयारी में है। पानी के अंदर ट्रेन चलना हमारे भारत के लिए बहुत गर्व की बात है, हमारे देश ने इतिहास रचा है।

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