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Kota: प्रत्येक व्यक्ति के मन में हर किसी के लिए अलग अलग तरह कि सोच होती है। अगर बात कि जाये पुलिस वालों कि तो उनके लिए सभी लोग अलग अलग तरह कि सोच रखते है। कुछ लोग उन्हें देश का रक्षक तो कई नियमों का पालन करवाने वाले के तौर पर देखते है।
वास्तव में पुलिसवाले देश के नागरिकों कि रक्षा और मुशीबत में उनकी मदद करने के लिए हमेशा तत्पर रहते है। लेकिन कुछ लोग उनके प्रति अलग सोच रखते है। वह लोग उन्हें घूस-खोर या फिर लोगों को परेशान करने वाले के तौर पर देखते है। लेकिन आपको बहुत अच्छे से पता है कि सभी पुलिसवाले एक तरह के नहीं होते हैं।
हमने हमेशा ही देखा है कि पुलिसकर्मी चाहे वह ड्यूटी पर हो या ना हो वह देश कि जनता किे संकट के समय में सहयता करते है और अपना फर्ज बहुत अच्छे से निभाते है। लोगो कि मदद करना वह अपना फर्ज समझते है। हालांकि वह हमेशा आक्रामक रूप में नजर आते है। इसी बीच में आक्रामक रूप में नजर आने वाले पुलिसवालों का एक ऐसा चेहरा सामने आया है। जिसे देख कर आपका मन भी उनके प्रति बदल जाऐगा।
देश के राजस्थान (Rajasthan) राज्य के कोटा (Kota) जिले में पुलिस वालों ने अपना एक अलग ही रूप दिखाया है। जिसे देख कर हर कोई उनकी तारीफ कर रहा है। उनका यह मानवीय रूप लोगों के मन में उनकी छवि बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कोटा जिले के बारां स्थान में स्थित सार्थल पुलिस स्टेशन में पुलिसकर्मीयों ने ऐसी मानवता कि मिशाल पेश कर दी है कि जिसे देख कर हर भारतीय का दिल गदगद हो गया है।
भूख से तड़प रही थी वह बच्ची
एक छोटी सी ढाई महीने की एक कोमल मासूम बच्ची जोकि इतनी चिलचिलाती गर्मी में भूख और प्यास से तड़प रही थी। उस बच्ची को इस तरह तड़पते देखकर थाना अधिकारी के साथ साथ वहॉ मौजूद हर एक पुलिसकर्मी चिंतित हो गया था।
हर पुलिसकर्मी बच्ची कि मदद करना चाह रहे थे। क्योंकि बच्ची बहुत हि तड़प रही थी। ऐसे में पुलिस विभाग में कार्य कर रही 2 महिला कांस्टेबलों (Two Woman Constables) ने उस बच्ची को देख कर उस बच्ची कि मदद करने के लिए आगे आ गई। वह खुद भी एक मॉं थी।
इस वजह से वह उस बच्ची को इस तरह तड़पते हुए नहीं देख पाई और मानवता को दिखाते हुए एक एक करके अपना दूध उस बच्ची को पिलाया (Feeding Milk To Baby Girl)। जिससे उस बच्ची कि भूख शांत हो जाये और वह स्वस्थ हो जाये। उन्होंने इस तरह का कार्य करके इंसानियत कि एक नई मिशाल पेश कर दी है।
उनके इस कार्य ने वहा मौजुद हर किसी का दिल जीत लिया और उनकी इस इंसानियत के बारे में जानकर हमारा दिल जीतने में भी वह कामयाब हो गई। उन महिला कॉंस्टेबलों किे जितनी तारीफ किे जाये उतना कम है।
यशोदा मॉं कि तरह पिलाया दूध
इस पूरी घटना के बारे में बताते हुए थाना अधिकारी महावीर किराड़ और मिस्टर एएसआई हरिशंकर नागर जी ने जानकारी दी की एक छोटी सी ढाई महीने की नाजुक बच्ची (Baby Girl) के दर्द को देखते हुए पुलिस स्टेशन में मौजूद दो महिला कांस्टेबलों ने यशोदा मां (Yashoda Maa) कि तरह उस बच्ची को अपना दूध पिलाया और उसकी भूख को खत्म किया।
जिस तरह यशोदा मॉं ने भगवान कृष्ण की मॉं बनाकर उन्हें अपना दूध पिलाया था। ठीक उसी तरह महिला कांस्टेबलों ने एक एक करके अपने आंचल का दूध उस बच्ची को पिला कर उस बच्ची कि भूख शांत कि और उस बच्ची कि जान बचा ली।
बाबड़ नाम के जंगल कि है घटना
कोटा जिले के सारथल थाना अधिकारी महावीर किराड़ जी ने जानकारी दी कि 4 मई को दोपहर में जब सूरज अपने चरम पर था। उस वक्त कड़ी धूप में उन्हें कही से खबर दी गई कि कोई व्यक्ति जिसकी उम्र करीब 23 वर्ष कि है, वह बाबड नाम के जंगल वाले एरिया में पैदल गुजर रहा है और वह पूरी तरह से नशे में लिप्त है और उसके पास एक बच्ची है।
जब ये जानकारी थाने के पुलिस अधिकारी को लगी, तो वह इस खबर के मुताबिक बाबड नाम के जंगल में उस शख्स की खोज में निकल पड़े। जैसे वह आगे बढ़े, कुछ दूरी पर उन्हें वह शख्स दिखाई दिया, जो कि नशे में धुत था और वह बच्ची झाडियों के पास गर्मी कि धूप किे वजह से बेहोश डली हुई थी।
नन्ही बच्ची धूप कि वजह से हो गई थी बेहोश
उन्हें इस हालत में पुलिस थाने लेकर आया गया और कुछ समय बाद जब उस नशे में धुत व्यक्ति से पुछा गया कि वह कौन है। तो उसने बताया कि वह उस मासूम छोटी सेी ढाई महीने की बच्ची का पिता है और उसका नाम राधेश्याम काथोड़ी है। वह छीपाबडौद थाना के क्षेत्र सालापूरा गॉंव का रहने वाला है।
जब और जानकारी पता लगाई गई, तो मालूम हुआ कि वह झालावाड नाम के जिले के कामखेड़ा क्षेत्र में सुबह 4:00 से 5:00 बजे के बीच अपने ससुराल से अपनी बिटिया को लेकर किसी को बिना बताये पैदल ही निकल गया था। वह पैदल चलकर अपनी बच्ची को नशे की हालत में 15 किलोमीटर दूर सालापूरा ले जा रहा था।
मां के थाना पहुंचने तक महिला कॉंस्टबलों ने पिलाया अपना दूध
जब यह खबर उस बच्ची की मॉं को दे दी गई तो उस मॉं के थाना आने तक महिला कांस्टेबल मुकलेश और पूजा जी ने उस बच्ची का पूरी तरह ख्याल रखा। जब भी बच्ची को भूख लगती तो वह दोनों महिला कांस्टेबल एक एक करके उस बच्ची को अपने आंचल से दूध पिलाती।
महिला कांस्टेबल मुकलेश और पूजा जी ने बताया कि उस बच्ची कि कंडीशन देखकर लग रहा था, कि वह बच्ची बहुत समय से भूखी है और भूख प्यास कि बजह से उसके होठ भी सूख गये थे। बच्ची के छोटी होने के कारण उसे ऊपर का कुछ खिलाया पिलाया नहीं जा सकता था। इसलिए उन दोनों महिला कांसटेबलों ने उस बच्ची को अपना दूध पिलाया वह दोनो बताती है कि उनके भी एक एक साल के बच्चे हैं।
वह दोनों महिला कांस्टेबल कहती है, कि उस बच्ची कि मदद करना और उसे अपना दूध पिलाना यह एक मॉं होने के नाते हमारा फर्ज था और ईश्वर कि इच्छा से ही यह हुआ है और हमें इस कार्य से बहुत ही खुशी मिल रही है।
हमें यह देख कर अच्छा लग रहा है कि एक आदिवासी छोटी बच्ची जिसे हम नहीं जानते वह हमारा दूध पी कर स्वस्थ हो गई। यह हमारे लिए बहुत ही फक्र कि बात है। उन महिला कांस्टेबलों का यह कार्य बहुत ही सराहनीय है, ऐसे देश के रक्षकों पर हमें बहुत ही फक्र महसूस होता है। हमारे देश को इसी तरह की मानवता कि जरूरत है।



