बीमार किसान पिता के पास खेती के लिए ना बैल थे, ना पैसे, बेटियों ने पूरा खेत जोत दिया: Ek Number News

0
739
Ek Number News
Farmer Daughters Working In The Field With Father Gets Oxen In Karnataka. Karnataka farmer who ploughed fields with daughters gets oxen. A video of the girls working in the field went viral. Farmer Kallappa Jawoor’s daughters pull a plough in Madakihonnalli village of Dharwad district.

File Crap Image

Jaipur: भारत कृषि प्रधान देश हैं और यहां बड़े पैमाने पर खेती की जाती है। चुनावी मौसम जब आता है तो राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र का मुख्य एजेंडा किसान होता है, लेकिन सत्ता में आते ही नेता, किसानों को इस तरह नजरअंदाज करते हैं, जैसे चाय से मक्खी। देश मे कई किसान बहुत गरीब है उनके पास खेती करने का हुनार तो है लेकिन पेसो की कमी है।

देश में कई किसान ऐसे हैं, जिनके पास खेत तो है, लेकिन खेती करने के लिए बैल या मशीन नहीं है। आर्थिक गरीबी से मजबूर किसान और सरकार के घोषणा पत्रों के वादों से दूर ये किसान अपनी शारीरिक शक्ति से ही खेत जोतकर फसल पैदा करते हैं। कर्नाटक के धारवाड़ जिले के एक छोटे से गांव के 43 वर्षीय किसान कलप्पा जवूर (Farmer Kallappa Jawoor) की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। उनके पास ना तो खेत जोतने के लिए बैल थे और ना कोई मशीनरी। इसके बावजूद भी उन्होंने खेती करने का फैसला किया।

धारवाड़ में मदकिहोन्नल्ली गांव (Madakihonnalli village of Dharwad district) के रहने वाले किसान कलप्पा जवूर की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि वह अपनी एक एकड़ की जमीन को जोतने के लिए बैल या ट्रेक्टर भी किराए पर नहीं ले सकते। 43 साल के जूवर अपने खेत में फसल की बुवाई करना चाहते थे, लेकिन खेत जोतने का कोई रास्ता नजर नही आ रहा था, इस कारण बहुत चिंतित थे। कलप्पा जवूर बीते कुछ दिनों से एक बीमारी से भी जूझ रहे थे जिसके चलते उन्हें दो सर्जरी भी करानी पड़ी।

जवूर की तीन बेटियां (Farmer Daughters) हैं और इन्हीं बेटियों के कारण इस किसान के लिए खेती कर पाना संभव हो पाया। जब वह स्वथ्य हुए तो उन्होंने अपनी जमीन पर खेती करने का फैसला किया, लेकिन वो अकेले खेत जोतने में असमर्थ थे। ऐसे में बेटियों (मेघा और साक्षी) ने अपने पिता का साथ दिया और ‘बैल’ की जगह लगकर हल खींचा, जिससे परिवार सोयाबीन की बुवाई करने में सफल रहा।

कलप्पा (Kallappa Jawoor) ने बताया, बेटियों ने साथ देकर मेरा आत्मविश्वास बढ़ाया है। मेघा और साक्षी दोनों हल खींचती थीं और मैं बुवाई करती थी। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कलप्पा की खराब परिस्थिति जानने के बाद हुबली से पूर्व एमएलसी नागराज चेब्बी ने परिवार को एक जोड़ी बैल भेंट किए।

कलप्पा की बड़ी बेटी मेघा, हुबली से कंप्यूटर साइंस में डिप्लोमा कर रही हैं। जबकि साक्षी 10वीं क्लास में पढ़ रही है, और उनकी तीसरी बेटी सरला गांव के ही स्कूल में 7वीं कक्षा में पढ़ती हैं। असल में, कलप्पा अपनी बेटियों को अच्छी शिक्षा देने के लिए पैसा कमाना चाहते थे। लेकिन उनके शरीर ने भी उनका साथ छोड़ दिया था उनको बीमारी ने अपना शिकार बना लिया था।

उनको अपनी बेटियों की पढ़ाई की चिंता दिन रात सताने लगी। वे यही विचार करते कि कैसे पैसा कमाया जाए। उन्होंने जो गरीबी के दिन देखे है वो चाहते थे कि उनकी बेटियां वो दिन कभी ना देखे। अच्छी शिक्षा प्राप्त करके अफसर बने। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कलप्पा जवूर अपनी बेटियों की पढ़ाई और बेहतर भविष्य के लिए अधिक पैसा कमाना चाहते थे, लेकिन बीमारी ने उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया।

कलप्पा कहते हैं, खेत जोतने में बेटियों ने साथ देकर मेरा आत्मविश्वास में जान डाल दी थी। मेघा और साक्षी दोनों हल खींचती थीं और मैं बुवाई करता था। सूत्रों जानकारी के मुताबिक जब बेटियों के जज्बे की खबर मीडिया में आग की तरह फैली, तो सभी उनकी मदद के लिए आगे आने लगे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here