रिश्तेदारों ने छोड़ा साथ, तो बहु ने ससुर को अंग दान देकर बचाया, लोगो ने कहा बहु हो तो ऐसी

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Ekta Gupta Bahu
Ekta Gupta Story Her father-in-law was suffering from liver cirrhosis. Ekta Gupta donated her liver to father-in-law and safe his life.

Jhansi: बेटिया हमेशा ही कुछ अलग ही कर समाज में एक संदेश छोड़ जाती है और बेटियो ने हमेशा ही साबित किया है, जब अपनों पर मुसीबत आती है, तो यह बेटियां ही अपनी जान की परवाह न कर के हमेशा अपनों के लिए खड़ी रहती है। एक बेटी नही बहु ने सभी का सीना गर्व से ऊंचा कर दिया, खुद की जान की परवाह न करके आज एक बहु ने अपना लीवर अपने पिता समान ससुर को देकर जान बचाई।

हम अक्सर आजकल न्यूज़ में यही पढ़ते हैं की बहू को ससुराल में मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। लेकिन आज जिस बहू (Bahu) की हम कहानी (Story) लेकर आए हैं, वह आपके लिए प्रेरणास्पद है। अक्सर हमने सास-ससुर (Saas-Sasur) की जबान से बहू (Daughter In Law) की बुराई ही सुनी होगी। लेकिन हरियाणा में एक महिला ने एक ऐसी मिसाल कायम की है।

जिसको देखकर हर कोई यही बोला रहा है कि भगवान ऐसी बहू सबको दे। जिसने अपनी जान की फिक्र किए बिना अपने ससुर की जिंदगी बचा ली। यह कहानी है झांसी की रहने वाली एकता गुप्ता (Liver Donner Ekta Gupta From Jhansi) की।

उन्होंने अपने ससुर (Father In Law) को लीवर दान (Liver Donate) कर उनका अमूल्य जीवन बचाया। एकता के ससुर लिवर सिरोसिस नामक बीमारी से पीड़ित है। कुछ साल पहले भी उन्होंने उनका लिवर ट्यूमर का ऑपरेशन भी करवाया था।

बहु ने दिया जीवनदान

एक मीडिया साइट से बात करते हुए पूनम ने कहा कि करीब 10 साल पहले उनके ससुर लिवर पूरी तरह से खराब हो गया था। डॉक्टरों ने भी कह दिया था कि अब रामगोपाल ज्यादा नहीं जी सकते हैं, उनकी जिंदगी के सिर्फ 5 साल ही हैं। वो आए दिन बीमार रहने लगे। पूरा परिवार उनको देखकर आंसू बहाने लगा था। कोई खुश नहीं था हर कोई गम में था।

फिर मेरी सास ने अपना लीवर ससुर को देने का फैसला किया। लेकिन उनका जब टेस्ट हुआ तो उसको लेने से डॉक्टरों ने इंकार कर दिया। इसके बाद पति और देवर की बीमारी के चलते अपना लिवर नहीं दे सके। फिर क्या था मैंने सोचा कि क्यों ना में अपना अंगदान करके ससुर की जान बचा लूं। इसके बाद मैंने अपने लिवर का टेस्ट करवाया तो वह एकदम सही निकला और मैच हो गया।

लिवर ट्रांसप्लांट ही एक रास्ता

कुछ समय बाद डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें दोबारा से ट्यूमर हो सकता है। बहुत हॉस्पिटल और दवाइयां इलाज कोई भी काम नहीं आ रहा था। इसके बाद लिवर ट्रांसप्लांट ही एक ऐसा रास्ता था जो उनके पास बचा था। आखिरकार घरवालों ने लिवर ट्रांसप्लांट करवाने का मन बना लिया, लेकिन अब सबसे बड़ी परेशानी यह थी की मैचिंग वाला लीवर (Matching Liver) कहां से लेकर आए। ऐसे में सबसे पहले जब सभी घर वालों ने अपनी जांच करवाई तो बहू का ही लीवर उनसे मैच हो गया।

जान कीमती है

सब घरबराये हुए थे, लेकिन बहु नहीं डरी हुई थी, उसने कहा कि मैं अपने ससुर को लीवर दूंगी और उनकी जान बचाऊंगी। एकता गुप्ता (Ekta Gupta) के अनुसार घर में और कोई भी सदस्य इतना स्वस्थ नहीं था कि वह अपना लिवर डोनेट कर सके। उन्होंने बताया कि जब उनको पता चला कि मैं लीवर देने के लिए बिल्कुल योग्य हूं, तो मैंने तुरंत लीवर देने का फैसला कर लिया।

एकता गुप्ता कहती हैं कि जब उन्होंने लिवर देने का फैसला किया तो उनके माता-पिता को भी फोन कर कर पूछा गया बहुत लोगों ने मुझे मना कर दिया था कि तुम अभी जवान हो तुम अपना शरीर खराब मत करो लीवर देने से तुम्हारे अंदर कमजोरी आ जाएगी।

15 साल की उम्र में पिता को खोया

लेकिन मैं उस समय सिर्फ वह पल याद कर रही थी जब 15 साल की उम्र में मैंने अपने पिता को खो दिया था और मैं अपने दूसरे पिता को नहीं खोना चाहती थी। एकता गुप्ता का कहना है कि यह सब सोचकर बहुत से लोगों ने मुझे मना किया था, लेकिन जब भी मुझे मेरे पिता का ख्याल आता, तो मैंने निश्चय कर लिया था कि अब मैं पीछे नहीं हटूंगी।

उन्होंने बताया कि बिना किसी हिचकिचाहट के उन्होंने चेकअप करवाया। सर्जरी से पहले डॉक्टरों ने उसे बता दिया था कि वह उनके लीवर का लगभग 60% हिस्सा लेंगे। लेकिन वह फिर भी नहीं डरी और अपने ससुर की कीमती जान बचाई।

बहु बनी मसीहा

दरअसल, हम जिस बहू की बात कर रहे हैं, वह है हरियाणा झज्जर की रहने वाली पूनम माथुर, जो पेशे से बीएमएस डॉक्टर हैं। पूनम ने अपने लिवर का बड़ा हिस्सा ससुर रामगोपाल के लिए डोनेट करके उनकी जान बचाई है। उनके इस कदम की तारीफ करता है।

बचा ली ससुर की जिंदगी

डॉक्टरों ने मेरे माता-पिता से कहा कि आपकी बेटी अपना लिवर ससुर को डोनेट कर रही है। यह ऑपरेशन बहुत ही कठिन है, इसमें उसकी जान भी जा सकती है। पूनम के पिता ने कहा-अगर मेरी बेटी के शरीर से दमाद के पिता की जान बच सकती है, तो इससे अच्छा और क्या होगा। हमको इसमें कोई परेशानी नहीं है, आपको जो सही लगे वह करिए। इसके बाद साल 2014 में लिवर ट्रांसप्लांट कर दिया। आज हमारा परिवार बहुत खुश है, सब लोग मुझे अपनी बेटी की तरह मानते हैं।

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