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Banaras: ज़िन्दगी में कई बार कुछ ऐसी बातें होती हैं, जो दिल पर लग जाती हैं और उसकी टीस उम्र भर तक नहीं जाती। जब परिवार चलाने वाला एकमात्र सदस्य रिक्शा चालक हो तो बुनियादी सुविधाएं हासिल करना भी एक कामयाबी के सामान होता है। लेकिन IAS गोविंद जायसवाल की कहानी (IAS Officer Govind Jaiswal Story) इस बात का प्रमाण है कि कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ इन सभी कठिनाइयों को पार कर सफलता आवश्य प्राप्त की जा सकती है।
कुछ ऐसी बातें होती हैं जो दिल पर लग जाती हैं और उसकी टीस उम्र भर तक नहीं जाती। ऐसे में कुछ व्यक्ति खुद को अपमानित महसूस करते हैं या कुछ व्यक्ति यूपी के IAS अफसर गोविन्द जायसवाल (IAS Govind Jaiswal) की तरह होते हैं, जो अपनी मेहनत के दम पर न सिर्फ अपने माता-पिता का नाम रौशन करते हैं, बल्कि अपने सपने को भी साकार कर दिखाते हैं।
कौन है गोविन्द जायसवाल
गोविन्द जायसवाल (IAS Govind Jaiswal) उत्तर प्रदेश के वाराणसी (Banaras UP) के रहने वाले हैं, और उनके पिता एक रिक्शा चालक थे। गोविन्द के घर में बुनियादी सुविधाओं के लिए उनके पिता ही एक मात्र सहारा थे। परिवार का सहारा एकमात्र पिता ही थे। गरीबी में भी हार नही मानी बचपन मे देखे सपने कोसच करने के लिए मेहनत करनी नही छोड़ी। सफलता (Success) कभी अमीरी गरीबी नही देखती।
वहीं बचपन में एक बार गोविन्द खेलते हुए मुहल्ले में ही रहने वाले एक दोस्त के साथ उसके घर चले गए थे,जहां दोस्त के पिता ने गोविन्द को घृणा की भावनाओं से देखते हुए अपने घर से बाहर निकाल दिया और कहा तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई हमारे घर में कदम रखने की। घर से बाहर निकालने की मात्र एक ही वजह थी कि गोविन्द के पिता रिक्शा (Rickshaw Puller) चलाते थे और उनके दोस्त के पिता एक संपन्न परिवार से थे।
गरीबी का मज़ाक उड़ाया
जब दोस्त के पिता ने गोविन्द (Govind Jaiswal Biography) की गरीबी का मज़ाक उड़ाया तब उस समय गोविन्द की उम्र महज 11 साल की थी। छोटी उम्र में गोविन्द इन बातों को समझ न सके। फिर एक दिन गोविन्द ने ये सारी बातें एक वरिष्ठ व्यक्ति के साथ सांझा किया।
Salute Govind Jaiswal,son of a riksha puller and now an IAS Officer!Its just you who chalk-out for own destiny!#AAP pic.twitter.com/beCRco2K32
— K Kumar 45.2K Followers 100% Follow-back (@Yr_Conscience) June 29, 2014
फिर उन्होंने समझाया कि तुम्हारा पारिवारिक स्थिति कमजोर है, इसलिए उन्होंने तुमसे ऐसा कहा। साथ ही उस व्यक्ति ने कहा जब तुम IAS बन जाओगे तब तुम्हारे घर का परिस्थिति भी मजबूत हो जायेगी। तभी गोविन्द ने मन ही मन IAS बनने की ठान ली।
गोविन्द का बचपन
बचपन से ही अपने पिता के खिलाफ कठोर शब्द गोविंद को तीर की तरह चुभते थे। गोविन्द अपने परिवार को एक सम्मानजनक जीवन देना चाहते थे। गोविन्द ने वाराणसी से अपनी स्कूली शिक्षा प्राप्त की, तथा सरकारी स्कूल से मैथ्स में ग्रेजुएशन किया।
मगर ग्रेजुएशन की तैयारी के दौरान 14-14 घंटे तक लाइट गायब रहती थी। इसके अलावा पडोसी वाले जनरेटर चलाते थे,जिसकी वजह से काफी ज्यादा शोर होता था। ऐसे में पढ़ाई करने के दौरान किसी प्रकार की रूकावट न हो, गोविन्द अपने कानों में रूई डालकर पढ़ाई करते थे।
पढ़ाई के लिए पिता ने अपनी पुश्तैनी जमीन बेची
ग्रेजुएशन में अच्छे अंक प्राप्त करने के बाद गोविन्द IAS की तैयारी में जुट गये। मगर एक ही कमरे में पूरे परिवार के साथ रहने की वजह से सिविल सर्विसेज की तैयारी करना बहुत कठिन साबित हो रहा था। फिर IAS बनने का सपना आंखो में लिये गोविन्द 2005 में तैयारी के लिए दिल्ली चले गए।
This is "Govind Jaiswal", a son of Rikshawala from Varanasi, an IAS Officer. #Inspiring #story @ShashiTharoor pic.twitter.com/TkowE2eY0C
— Sahil Khatri (@sahilkhatri82) December 28, 2013
ऐसे में गोविंद की पढ़ाई के लिए उनके पिता ने अपनी पुश्तैनी जमीन 30,000 रुपए में बेच दी थी। वहीं रिक्शा चलाने के दौरान गोविन्द के पिता के पैर में चोट लग गई। ठीक से दवा न लेने के कारण टिटनेस हो गया। लेकिन इस बात की भनक गोविन्द को नहीं लगी। क्योंकि पिता चाहते थे की उनका बेटा अफसर बनकर परिवार का नाम रौशन करें।
खाने को नही थे पैसे
गोविंद ने सोच लिया था कि एक दिन लोगों को इसी रिक्शेवाले के बेटे पर गर्व हो। दिल्ली में IAS की तैयारी के दौरान भी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। गोविंद पार्ट टाइम कुछ बच्चों को मैथ का ट्यूशन देने लगे थे। कई बार गोविन्द के पास खाने तक के पैसे नहीं होते थे।
एक बार घर का रेंट देने के बाद उनके पास केवल 150 रु बचे थे। ऐसे में गोविन्द पूरे दिनभर में एक टाइम ही खाना खाने लगे, लेकिन समय से खाना न खाने की वजह से उनकी तबियत खराब होने लगी थी, मगर तब भी उन्होंने हार नहीं मानी और IAS की तैयारी जारी रखी।
एपीजे अब्दुल कलाम से हुये प्रभावित
साल 2006 गोविंद ने पहली बार IAS की परीक्षा दी। अपने पहले ही प्रयास में गोविंद जायसवाल ने IAS परीक्षा में 48 वां रैंक हासिल किया। हिंदी माध्यम से परीक्षा देने वालों की श्रेणी में वह टॉपर (UPSC Topper) रहे थे। गोविन्द को अपने रिजल्ट देखने के बाद खुशी का ठिकाना न रहा, गोविन्द हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे कि इस खुशखबरी को अपने पिता तक कैसे पहुचाये।
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फिलहाल गोविंद ईस्ट दिल्ली एरिया के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट हैं। IAS गोविन्द जायसवाल का मानना है कि अगर उन्होंने बुरे दिन नहीं देखे होते तो वह सफलता और जिंदगी का मतलब कभी समझ नहीं पाते।
गोविंद जायसवाल ने कहा कि वो एपीजे अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) से काफी प्रभावित हैं। वो पूर्व राष्ट्रपति की किताबें पढ़ा करते हैं। हिंदी मीडियम से सफलता हासिल करने वाले इस आईएएस ने कहा था कि महात्मा गांधी के बाद कलाम ने हमें सपने देखने की ताकत दी।



