नीरज चोपड़ा ने 23 साल तक रखे लंबे बाल क्यों कटवाए, दिया दिल जीतने वाला जवाब

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Neeraj Chopra Answer On Why He Cut His Long Hair. Neeraj Chopra Reveals Why He Chopped Off His Long Hair Before Tokyo Olympics.

File Photo Credits: Twitter

Delhi: ओलिंपिक गेम्स के 125 सालों के इतिहास में नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) ने भारत के लिए ट्रैक एंड फील्ड का पहला मेडल (Gold Medal) जीता है। यह पहला मेडल ही गोल्ड है। नीरज ने वो कर दिखाया है, जो पीढ़ियों तक लोग याद रखने वाले हैं। टोक्यो ओलंपिक में नीरज ने भाला फेंक (Bhala Fenk) में गोल्ड मेडल जीतकर (Gold Medal Won) इतिहास रचा था। वे ट्रैक एंड फील्ड एथलेटिक्स में भारत के लिए अब तक का पहला ओलंपिक मेडल जीता।

हाल ही में संपन्न हुए टोक्यो ओलंपिक में भारत ने अब तक का सबसे बढ़िया प्रदर्शन करते हुए 7 मेडल जीते। इनमें 1 गोल्ड, 2 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज मेडल जीते। 41 साल बाद भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रचा। इस ओलंपिक में कई भारतीय खिलाड़ी पदक से बेहद कम अंतर से चूक गए। अब अगले ओलंपिक का आय़ोजन 2024 में फ्रांस की राजधानी पेरिस में किया जाएगा।

आपदा के बावजूद टोक्यो ओलंपिक का सुरक्षित आयोजन कराने के लिए पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान की सरकार को धन्यवाद दिया था। आपको बता दें कि इस बार ओलंपिक में 205 देशों के हजारों एथलीट्स ने हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया था।

आप नीरज चोपड़ा के ट्विटर हैंडल पर जाएंगे तो सबसे पहले आपको कुछ पंक्तियां नजर आएंगी। ये महज ऊर्जा भरने वाली चंद पंक्तियां नहीं है। ये पंक्तियां नीरज के चरित्र, ट्रेनिंग और सपनों का प्रतिबिंब हैं। ये पंक्तियां बताती हैं कि चकाचौंध से दूर एक स्टार अपनी तपस्या में लीन है।

आज उस तपस्वी को उन कई बरसों की तपस्या का फल मिल गया। नीरज ने वो कर डाला है, जिसकी कल्पना कुछ बरसों पहले तक किसी ने भी नहीं की थी। लेकिन एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर नीरज ने हर भारतीय के मन में ओलिंपिक्स मेडल का बीज बोया और आज पूरा देश नीरज का आभारी नजर आ रहा है। नीरज से समय समय पर बातचीत में उनके व्यक्तित्व के कई पहलू सामने आए।

खुद कभी दावा नहीं ठोका

ओलिंपिक्स में भाग लेने जा रहे ऐथलीटों द्वारा मेडल और गोल्ड लाने के दावे ठोकना कोई नई बात नहीं। भले ही वो ऐथलीट दुनिया के टॉप-15 में भी शामिल न हो। नीरज में 18 साल की उम्र में ही एक चैंपियन वाली चमक दिखी थी। सफलता दर सफलता हासिल करने के बावजूद वह हमेशा सामान्य जीवन जीते है।

हकीकत में मेडल का सच्चा दावेदार होने के बावजूद भी उन्होंने कभी ओलिंपिक्स मेडल जीतने का दावा नहीं ठोका। हमेशा यही कहा कि वो अपनी ट्रेनिंग कर रहे हैं और इवेंट में पूरी कोशिश करेंगे। करीब तीन साल पहले एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने के बाद नीरज नवभारत टाइम्स के दफ्तर आए थे। कुछ घंटों की उस विजिट में नीरज से अनगिनत सवाल हुए।

अखबार के साथियों के अलावा NBT के पाठकों ने उनसे बार बार यही पूछा कि ओलिंपिक्स में क्या भारत को आप गोल्ड ला कर देंगे? लेकिन उन सवालों से कभी असहज नहीं हुआ और न ही उनके चेहरे के भाव से लगा कि वह कोई दावा कर रहे हैं। उन्होंने सरलता से हर बार मुस्कुराते हुए कहा, “जी पूरी कोशिश करूंगा”। नीरज चोपड़ा ने बस यही कहा।

बाल कटवाने की वजह

कार्यक्रम के दौरान जब नीरज से उनके लंबे बालों को लेकर सवाल किया गया तो टोक्यो ओलंपिक के इस ‘गोल्डन ब्वॉय’ ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा, मैंने 9-10 साल की उम्र से लंबे बाल रखे हैं, लेकिन बाद में इसने मुझे परेशान करना शुरू कर दिया। यही वजह थी कि मुझे अपने बाल काटने पड़े।

नीरज चोपड़ा ने बताया, कुछ प्रतियोगिताओं में इन लंबे वालों की वजह से मुझे काफी दिक्कत आ रही थी। मुझे पसीना आ रहा था और यह मेरी आंखों से टपक रहा था। मैंने हेयर बैंड और कैप भी लगाकर देखी, लेकिन यह सब भागते वक्त गिर जाता था। इसलिए मैंने सोचा कि यह ओलंपिक्स है। स्टाइल बाद में हो जाएगा, गेम पहले है।

एक समय उनके लंबे बालों (Neeraj Chopra Long Hair) की भी खूब चर्चा होती थी और उनके लुक की तुलना किसी ‘ग्रीक गॉड’ से की जाती थी। लेकिन ओलिंपिक्स जैसे ‘महा इवेंट’ में भाग लेने से कुछ दिनों पहले नीरज ने अपने इन लंबे बालों की कुर्बानी दे दी। अपने खेल के प्रति पूरी तरह से फोकस नीरज नहीं चाहते थे कि उनके लंबे बालों की वजह से उनके थ्रो में थोड़ी सी भी परेशानी हो।

वो अपने कंधों पर सिर्फ जैवलीन का भार ही रखना चाहते थे। बालों को कटवाना भले ही बहुत से लोगों की नजरों में बहुत छोटी बात हो, लेकिन नीरज के लिए यह बड़ा कदम था। उन्हें अपने लंबे बाल बहुत पसंद थे, लेकिन ओलिंपिक्स मेडल और उनके बीच एक छोटी सी अड़चन आ जाए, ऐसा वह नहीं चाहते थे।

मोबाइल से बनाई दूरी

मौजूदा दौर में सोशल मीडिया से दूर शायद ही कोई खिलाड़ी या ऐथलीट हो, लेकिन नीरज सबसे अलग हैं। जहां हर कोई लगभग हर दिन सोशल मीडिया पर कुछ न कुछ अपडेट करता है, नीरज हफ्तों, महीनों इससे दूर ही नजर आते हैं। अपनी ट्रेनिंग में डूबे रहने वाले नीरज महीने में कभी कभार ही सोशल मीडिया पर ऐक्टिव होते हैं।

https://twitter.com/coke_biryani/status/1423993236960415755

उनसे सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखने की वजह पूछने पर उन्होंने कहा था, ‘ट्रेनिंग से समय मिले तो फिर ये सब करूं। इतना थक जाता हूं कि फिर मोबाइल को दूर रखकर सो ही जाता हूं।’ एक समय नीरज के वॉट्सअप नंबर पर डीपी में भी सिर्फ ‘फोकस’ शब्द लिखा था। उनका डीपी खेल और ट्रेनिंग के प्रति उनके फोकस का आइना था।

नहीं चाहिए सुर्खियां

जकार्ता में एशियन गेम्स के दौरान भारत की स्टार महिला रेसलर विनेश फोगाट के साथ नीरज के अफेयर की अफवाह उड़ी। खबर अखबार में भी आई। लेकिन नीरज नहीं घबराए। इस मसले पर उनसे फोन पर सीधे बात करके उनकी प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की।

मीडिया उनका पक्ष रखना चाहता था, लेकिन नीरज ने बहुत ही साफगोई से किसी भी प्रतिक्रिया से मना कर दिया। उन्होंने कहा, ‘अगर मैं इस मसले में सफाई दूंगा तो कोई लोग समझेंगे कि जरूर कोई बात है। जबकि ऐसा कुछ है ही नहीं, तो फिर ऐसी बेकार की बातों पर प्रतिक्रिया देने से ऐसी अफवाहों को ही बल मिलेगा।’ यही उनकी स्टाइल है।

सर्जरी के बाद भी हार नहीं मानी

एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने के बाद बाद नीरज ने कोहनी का ऑपरेशन कराया और इस कारण वह करीब डेढ़ साल मैदान से दूर रहे। जब वह लौटे तो फिर कुछ दिनों बाद दुनिया पर कोरोना का संकट मंडराने लगा, जिसका असर उनकी ट्रेनिंग पर भी पड़ने लगा। उस वक्त वह टर्की में ट्रेनिंग कर रहे थे और उन्हें वापस स्वदेश लौटना पड़ा।

उस ओलिंपिक्स के रद्द होने की चिंता हर ऐथलीट के चेहरे पर दिखने लगी थी। उस दौरान हुई बातचीत में नीरज ने उम्मीद जताई कि ओलिंपिक्स हो कर रहेंगे। उन्होंने कहा, ‘दुआ तो यही रहेगी कि ओलिंपिक्स हों। भले ही कुछ दिनों बात ही हों। अगर ओलिंपिक्स नहीं हुए तो हजारों सपने टूट जाएंगे।’ फिर मेहनत और किस्मत ने सपना साकार किया।

जैवलिन में आने की वजह

देश में ज्यादातर नौजवान भले ही क्रिकेटर्स को अपना रोल मॉडल मानते हों, लेकिन नीरज ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि उन्होंने बचपन से ही कभी क्रिकेटर बनने के बारे में नहीं सोचा। उनके अनुसार वह तो खिलाड़ी भी न होते, क्योंकि बचपन में उनका वजन ज्यादा था, इसलिए घरवालों ने अच्छी फिटनेस हासिल करने लिए उन्हें हर रोज स्टेडियम जाने की सलाह दी। वहां पहुंचने के बाद पहली बार कुछ सीनियर्स को जैवलिन थ्रो करते देखा और किस्मत से उनके हाथों में भी जैवलिन आ गई।

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