Friday, January 28, 2022
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भारत की ओर से अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेला खिलाड़ी अब गाँव में भैंस चराने को मजबूर, जाने।

Babaji Damor Cricket India 1998

वर्तमान समय मे बहुत अधिक संख्या में क्रिकेट प्रेमी देखने को मिलेंगे। क्रिकेट लोगो के सर चढ़कर बोल रहा है। भारत मे क्रिकेट लोगो का पसंदीदा गेम होता जा रहा है। क्रिकेट को पसंद करने वालो की संख्या दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है। क्रिकेट खेलने वाले क्रिकेटर लाखो में नही करोड़ो में खेल खेल रहे है। उनकी जिंदगी में किसी प्रकार की कोई कमी नही है।

उनको इतना पैसा मिलता है कि वो अपनी जिंदगी आराम से जी सकते है। जो उन्हें सब लोगो से अलग बना देता है। लेकिन हर बात में अपवाद होता ही है ऐसा ही कुछ देखने को मिला एक क्रिकेटर के साथ, जिसने खेला तो बहुत लेकिन कुछ बचा नही पाया।

ये क्रिकेटर है, भालाजी डामोर (Babaji Damor)। जो एक समय भारत का उँगता हुआ सूरज कहे जाने लगे थे। लोग उनकी बहुत प्रशंसा करते थे। भालाजी एक दृष्टिहीन खिलाड़ी थे। उन्होंने भारत की ओर से दृष्टिबाधित क्रिकेट मुकबला भी खेला और वो उस टूर्नामेंट के सुपस्टार भी कहे गये थे।

Cricketer Babaji Damor उस समय 18 वर्ष के थे

उस समय उनकी आयु केवल अठारह वर्ष थी। उन्होंने मैच में अपनी जिंदगी के अच्छे दिन देखना शुरू कर दिए थे। लेकिन किस्मत को ये मंजूर नही था। अब उनकी आयु बहुत हो चुकी है। उस समय उन्होंने से सोचा था कि कुछ दिन बाद उनको कोई सरकारी जॉब मिल जाएगी, लेकिन ये सब सम्भव नही हुआ। परिस्थितियों ने कुछ ऐसा खेल खेला की भालाजी डामोर को अपने गाँव वापिस आना पडा।

उन्होंने अपनी जिंदगी से हार नही माना और अपनी जिंदगी को नई दिशा की ओर ले गए। आज वो अपबे गांव में गाय भैस को सेवा कर रहे है। खेत मे वो गाय भैंस को चराते है और अपने परिवार के साथ रहकर अपनी जिंदगी जी रहे है। उन्होंने ने अपनी जिंदगी में बहुत कुछ सीखा कभी हार नही मानी, वर्तमान समय मे उनकी आय तीन हजार रूपये है।

वो दिन भर मेहनत करके इतना ही कमा पाते है। इसी में वो अपने परिवार के साथ जिंदगी बिता रहे है। ये अपने आप में बदकिस्मती की बात है कि एक टाइम का विजेता खिलाड़ी आज ऐसी परिस्थितियों में जिंदगी जी रहा है। उनकी खबर लेने वाला कोषों दूर तक कोई नही है। न ही किसी ने आकर कभी उनकी सहायता के लिए कदम बढ़ाया।


Star Of 1998 Cricket World Cup of Indian Team, Blind Cricketer Balaji Damor tends cattle nowadays.

उनके गांव में किसी की कोई राजनीति दिखाई नही देती। न ही किसी को कोई मुनाफा होता है उस गांव से। ऐसे हालात में कोई भी उनकी सहायता करने के लिए कभी आगे नही आया, भालजी डामोर जैसे दिव्यांग खिलाडियों की जिंदगी इतने में ही सिमट कर रह गई। ये हम सब के लिए भी विचार करने वाली बात है कि अपने समय का विजेता आज भैस चराकर अपनी जिंदगी जी रहा है।

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