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Delhi: पूरी दुनिया में महिलाएं घर-गृहस्थी के कामों में अपने घंटों लगाती हैं और इसके लिए उन्हें कोई पैसा नहीं मिलता है। इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइज़ेशन (ILO) के मुताबिक़, बिना किसी सैलरी वाले काम करने में सबसे ज़्यादा इराक़ में महिलाएं हर दिन 345 मिनट लगाती हैं, वहीं ताइवान में यह आंकड़ा सबसे कम 168 मिनट है। भारत में वैसे तो महिलाओं को समान दर्ज़ा प्राप्त है। भारत का संविधान महिलाओं को न केवल समानता का दर्जा प्रदान करता है, अपितु राज्य को महिलाओं के पक्ष में सकारात्मक भेदभाव के उपाय करने की शक्ति भी प्रदान करता है।
लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के ढांचे के अंतर्गत हमारे कानूनों, विकास संबंधी नीतियों, योजनाओं और कार्यक्रमों में विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की उन्नति को उद्देश्य बनाया गया है। पांचवी पंचवर्षीय योजना (1974-78) से महिलाओं से जुड़े मुद्दों के प्रति कल्याण की बजाय विकास का दृष्ठिकोण अपनाया जा रहा है। हाल के वर्षों में, महिलाओं की स्थिति को अभिनिश्चित करने में महिला सशक्तीकरण को प्रमुख मुद्दे के रूप में माना गया है।
महिलाओं के अधिकारों एवं कानूनी हकों की रक्षा के लिए वर्ष 1990 में संसद के एक अधिनियम द्वारा राष्ट्रीय महिला आयोग की स्थापना की गई। भारतीय संविधान में 73वें और 74वें संशेाधनों (1993) के माध्यम से महिलाओं के लिए पंचायतों और नगरपालिकाओं के स्थानीय निकायों में सीटों में आरक्षण का प्रावधान किया गया है जो स्थानीय स्तरों पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।
आज हम एक सफल महिला (Success Woman) की बात कर रहे है, जिन्हे लोग चाची कहते हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर की किसान चाची (Kisan Chachi) आज हजारों महिलाओं के लिए रोल मॉडल हैं। गांव की एक आम महिला पहले साइकिल चाची (Cycle Chachi) बनी और फिर किसान चाची (Kisan Chachi) बनी। एक आम महिला से खेतों से होते हुए पद्मश्री अवार्ड (Padma Shri Award) तक का सफर मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) के सरैया की रहने वाली राजकुमारी देवी (Rajkumari Devi) के लिए काफी संघर्ष भरा रहा है।
चाची (Rajkumari Devi) का संघर्ष से भरा रहा है
एक गरीब परिवार में जन्मीं राजकुमारी देवी (Rajkumari Devi) की शादी एक किसान परिवार में हुई थी। राजकुमारी देवी ने जैसे ही ससुराल में एंट्री की, उनके ससुरालवालों ने उन्हें पति के साथ घर से अलग कर दिया। बंटवारे के बाद मिले 2.5 एकड़ जमीन से उन्हें परिवार चलाने की चौनौती थी। ढाई एकड़ जमीन से परिवार का पेट पालना मुश्किल था, ऐसे में राजकुमारी देवी ने निर्णय लिया कि वो घर में ना रह कर जमीन से पैसे कमाएंगी, ताकि उनका परिवार अच्छे से जीवन यापन कर सके।
Honoured to meet an inspirational farmer & Padma Shri Rajkumari Devi from Bihar fondly called Kisan Chachi. Born in poor family & got married in young age, but she continued pursuing her dream. She formed SHGs & gave job to many poor families. @blsanthosh @dushyanttgautam pic.twitter.com/fHxin6REqh
— Vanathi Srinivasan (@VanathiBJP) July 17, 2021
उन्होंने खेतों में काम करना शुरू किया। उन्होंने (Kisan Chachi Rajkumari Devi) पूसा कृषि विद्यालय से उन्नत कृषी की जानकारी ली और अपने खेतों में ओल और पपीता लगाया। खेतों में लगे ओल को उन्होंने सीधे बाजार में भेजने की जगह उसका आटा और आचार बनाया। आचार (Achar Business) के बिजनस से उन्हें आय का मौका मिला।
राजकुमारी देवी से के किसान चाची बनने की कहानी
यहाँ गांव की महिलाओं को जब इसका पता चला तो वो भी सीखने आने लगीं। उन्होंने अपने घर पर ही महिलाओं को खेती और आचार बनाने का काम सिखाया। फिर धीरे-धीरे उनके बाकी फूड प्रोडक्ट भी बाजार में आये और राजकुमारी देवी के पडले वो “किसान चाची” के नाम से फेमस हो गईं। इन सफलता के बाद कई पुरस्कार जीतने के बाद आस-पास के लोग भी उनसे सलाह लेने और काम सीखने आने लगे और उनसे अपने घर की महिलाओं को भी कृषि के गुर सिखाने की बात की।
Hearty congratulations to Ms Rajkumari Devi from #Bihar for being awarded #PadmaShri for the year 2019. Known as ‘Kisan Chachi’ or ‘Farmer Aunty’, she has been helping the rural population with tips on kitchen farming and developing the right agro-based products for business. pic.twitter.com/QfLO0QgbQK
— Vice President of India (@VPSecretariat) January 26, 2019
किसान चाची ने गांव की महिलाओं के लिए काफी काम किया। वो गांव-गांव जाकर महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूह (Helping Group) बनाने लगी। साइकिल से ही वो हर दिन 40-50 किलोमीटर का सफर करती है। वो महिलाओं को गांव-गांव जाकर खेती, फूड प्रोसेसिंग और मूर्ति बनाने के की कला सिखाती हैं।
Celebrating Womanhood:
Rajkumari Devi, a farmer, popularly known as Kisan Chachi (Farmer Aunty).
She was awarded with India's fourth highest civilian award Padma Shri and Bihar CM Nitish Kumar awarded her Kisan Shri.#womenpower #womenempowerment #womensday2021 #womanhood pic.twitter.com/Cbw7LlsTOe
— Volunteer Here (@VolunteerHereIn) March 4, 2021
मीडिया की खबर की माने तो अब तक 58 साल किसान चाची 40 से अधिक स्वयं सहायता समूह बना चुकी है। उनका कहना है कि महिलाएं बहुत ही खुशहाल है। आचार के काम में महिलाएं अच्छा काम करती हैं। 10 महिला तो हमेशा तैयार रहती हैं। किसान चाची आज भी रोज गांव में घूमकर किसानों के बीच अनुभव बांटती है। वो गांव-गांव घूमकर फ्री में किसानों को अपने अनुभव बांटती हैं। उनके अनुभव से देश भर के किसानों को लाभ हुआ है और उनके ऊपर फिल्म भी बनाई जा चुकी है।
किसान चाची को पद्मश्री सम्मान प्राप्त हुआ
बताया जाता है की किसान चाची के बारे में जब सदी के महानायक को पता चला, तो उन्होंने किसान चाची को 5 लाख रुपए, आटा चक्की और जरूरत के सामान दिए ताकि उन्हें व्यापार में लाभ मिले। बदलते वक़्त को देखते हुए नरेंद्र मोदी सरकार ने पद्म पुरुस्कारों की प्रक्रिया बदली और किसान चाची को भी पद्मश्री सम्मान (Padma shri) से सम्मानित किया गया।



