
Delhi: यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में सफल होना ही अपने आप में बड़ी बात है, उस पर अगर स्टूडेंट्स परीक्षा में टॉप कर ले, तो उनकी बात ही सबसे अलग हो जाती है। नम्रता जैन (Namrata Jain) छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के दंतेवाड़ा (Dantewada) जिले की रहने वाली हैं। उनके पिता का नाम झानवरलाल और माता का नाम किरन जैन है। पिता एक बिजनेसमैन हैं, वहीं मां एक गृहणी हैं।
नम्रता का परिवार आर्थिक रूप से ज्यादा संपन्न नहीं था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई दंतेवाड़ा जिले (Dantewada District) के निर्मल निकेतन स्कूल से की। बचपन से ही वो पढ़ाई में बहुत होशियार थी। वो एक साक्षात्कार में बताती हैं कि 10वीं पास करने के बाद उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें माना कर दिया गया। दरअसल दंतेवाड़ा के जिस स्कूल में वो पढ़ाई कर रही थी, वो सिर्फ 10वीं तक ही था। आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें उस गाँव से बाहर जाकर पढ़ाई करनी थी।
कठिन परिस्थितियों में सफलता हासिल करना हर किसी के बस की बात नही है। कई स्टूडेंट्स (Students) विकट परिस्थितियों से घबरा जाते है और वही अपने लक्ष्य से पीछे हट जाते है। लेकिन कठिनाई सर लड़कर कुछ ऐसी ही सफलता हासिल की नम्रता जैन ने। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की नम्रता मुख्यता बस्तर की रहने वाली हैं। यह वहां का नक्सल प्रभावित क्षेत्र है जहां नक्सली आए दिन किसी न किसी वारदात को अंजाम देते रहते हैं।
नम्रता (Namrata Jain) के बचपन में भी एक इस इंसिडेंट हुआ था, जब नक्सलियों ने पुलिस चौकी में आग लगा दी थी। उस समय यह देखकर नम्रता इतनी घबरा गई थीं कि उन्होंने तभी निश्चय कर लिया था कि वे बड़ी होकर कोई ऐसा काम करेंगी, जिससे वारदात पर रोक लग सके। समय के साथ उन्होंने जाना कि सिविल सर्विसेस (Civil Service) एक ऐसा माध्यम है, जिसमें जाकर वे अपने बचपन का देखा सपना साकार कर सकती हैं।
संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 12 वां स्थान प्राप्त कर(IAS) नम्रता जैन जी ने हमारे प्रदेश का नाम रोशन किया है …आपकी स्वर्णिम सफलता पर बहुत-बहुत बधाई व शुभकामनाएं। pic.twitter.com/RyW9XnF5Ga
— Bhaskar sahu (@Bhaskar66175657) April 6, 2019
हालांकि जब वे इस राह पर चलीं, तो एक बार उनके मन में यह विचार जरूर आया कि वे जिस इलाके से संबंध रखती हैं, वहां से आज तक किसी का सिविल सर्विसेस में चयन नहीं हुआ। लेकिन नम्रता ने हार नहीं मानी और और अपने सपनो को पूरा करने आगे कदम बढ़ा लिए। फर पीछे पलटकर नही देखा। आपने सपने को ही अपना लक्ष्य बना लिया। आज परिणाम सबके सामने है।
आगे बढ़ने के लिए किससे ली सीख
मीडिया से बातचीत करते हुए नम्रता जैन बताया था, उनके इलाके में एक पुलिस स्टेशन में नक्स-लियों ने विस्-फोट कर दिया था, जिससे उन्होंने प्रेरणा लेकर उसको जड़ से समाप्त करने का मन बना लिया। सिविल सेवा (Civil Service) में शामिल होकर गरीबों की सेवा करने और माओ-वाद प्रभावित क्षेत्र में विकास लाने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने बताया था, मैं जिस इलाके से आती हूं वह नक्स-लवाद से बुरी तरह प्रभावित है। वंहा के लोग शिक्षा को महत्व नही देते। जिस कारण वहां कम ही लोग शिक्षित है। उस इलाके में शिक्षा के पर्याप्त संसाधन भी उपलब्ध नही है। वहा लड़कियों को पढ़ने से रोका जाता है। उनको शिक्षा से दूर रखा जाता है। वहां के लोगों के पास शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। मैं अपने राज्य के लोगों की सेवा करना चाहती हूं। दंतेवाड़ा में विकास लाना वहां से नक्स-लवाद को समाप्त करने में मदद करेगा।
प्रारंभिक पढ़ाई की जानकारी
नम्रता जैन (IAS Namrata Jain) ने अपनी प्रारम्भिक पढ़ाई दंतेवाड़ा के कारली के निर्मल निकेतन स्कूल से की, लेकिन 10वीं पास करने के बाद पढ़ाई जारी रखना उनके लिए मुश्किलों से भरा रहा। पढ़ाई में बचपन से ही होशियार थी। क्योंकि उनके घरवालों ने आगे की पढ़ाई के लिए बाहर भेजने से मना कर दिया। मन मे बहुत विचार थे कि कही पढ़ाई से दूर ना होना पड़े। गांव में आगे पढ़ाई के लिए कोई रास्ता ही नही मिल रहा था। फिर उन्होंने अपने आप से लड़ा आगे पढ़ाई जारी रखने के लिए परिस्थितियों से डटकर सामना किया। मुसीबतों से हार नही मानी।
आगे पढ़ाई जारी रखने के लिए परिवार वालो को किसने समझया
नम्रता की मां ने उनका पूरा साथ दिया और परिवारवालों को नम्रता की पढ़ाई जारी रखने के लिए मनाया। इसके बाद नम्रता ने 5 साल भिलाई Bhilai और 3 साल दिल्ली Delhi में रहकर पढ़ाई की। नम्रता ने अपना ग्रेजुएशन भिलाई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से पूरा किया। इसके बाद का पूरा समय उन्होंने अपनी तैयारी में लगाया। नम्रता अगर संभव हो तो यूपीएससी परीक्षा के साथ कुछ और काम करने पर यकीन नहीं करतीं। उनका मानना है कि यह परीक्षा कड़ी मेहनत मांगती है, तभी तैयारी ठीक प्रकार से हो पाती है।
असफलता से सीख ली
नम्रता ने अपना पहला अटेम्पट 2015 में दिया था पर इस समय उनका प्री में भी चयन नहीं हुआ था। चयन ना होने पर वो निराश नही हुई। फिर उन्होंने अपने आपको मजबूत किया आगे कदम बढ़ाने के लिए। हालांकि नम्रता बहुत निराश होने वाले लोगों में से नहीं हैं। उनका मानना है कि एक असफलता आपको बहुत कुछ सिखाती है।
आपकी असफलता (Success) में ही आपकी जीत छुपी होती है, आपको उस गलती को ढूंढ कर सही करना ही आपकी कामयाबी का रास्ता है। उन्होंने अपनी गलतियों से सीख ली और दोबारा साल 2016 में परीक्षा दी। इस साल नम्रता का सेलेक्शन हो गया और उन्हें 99वीं रैंक मिली। इस स्टेज पर भी वे दंतेवाड़ा से चयनित होने वाली पहली स्टूडेंट्स थी, हालांकि अभी उन्हें बहुत से रिकॉर्ड अपने नाम करने थे।
She’s Namrata Jain, who will be the first IAS officer from Naxal-affected Bastar region of Chhattisgarh. All India Rank: 12 in #UPSCResults
(Photo: At SVP National Police Academy, Hyderabad) pic.twitter.com/G9kZqUj1kd— Shantanu Nandan Sharma (@shantanunandan2) April 6, 2019
नम्रता (Namrata Jain IAS) को रैंक के अनुसार आईपीएस सर्विस (IPS Service) मिली और वे सरदार वल्लभ भाई पटेल नेशनल पुलिस एकेडमी (National Police Acadamy), हैराबाद में ट्रेनिंग करने लगीं। हालांकि उन्होंने अपनी प्रेक्टिस बंद नहीं कि, क्योंकि उनके दिमाग में अभी भी आईएएस (IAS) बनने का जुनून था।
TV देख दादी कहती थीं लाडली आईपीएस बने
संघ लोक सेवा आयोग 2017 के परीक्षा में देश में 99वीं रैंक हासिल करने वाली नम्रता जैन आईएएस बनने से कुछ कदम पीछे रह गईं हैं उन्हें अब आईपीएस बनना होगा। दंतेवाड़ा बचेली की रहने वाली नम्रता सामान्य वर्ग से हैं। आल इंडिया सिविल सर्विस के सर्विस अलाटमेंट में नम्रता को आईएएस नहीं मिल पाया। पिछली बार की तुलना में इस बार आईएएस की सीट सीमित थी।
इसके बाद से मन मे विचार आने लगा कि आईएएस की पोस्ट मिलना मुश्किल है। हालांकि छत्तीसगढ़ के लिए एक अच्छी खबर ये है कि चंद्रकांत वर्मा छत्तीसगढ़ से आईएएस बने। हालांकि यूपीएससी की रैंक के लिहाज से चंद्रकांत वर्मा को 352वीं रैंक मिली थी ओबीसी केटेगरी में चंद्रकांत वर्मा को आईएएस अलॉट हो गया है। लेकिन नम्रता सामान्य वर्ग में आती थी इसलिए उनके लिए बहुत कठिन होगया था। आईएएस बनाना।
आईएएस बनने का सपना पीछे नही छोड़ा
भारत सरकार के डीओपीटी ने आईएएस के 2019 बैच का राज्यवार कैडर आबंटन कर दिया। इसमें छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा की नम्रता जैन को होम कैडर मिला है। बिलासपुर के वर्नित नेगी को कर्नाटक कैडर आबंटित किया गया है। नम्रता को दो साल पहले यूपीएससी में आईपीएस मिला था। लेकिन उनका सपना IAS बनने का था। अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी।
99वी रैंक के बाद भी नम्रता जैन IAS नहीं बन पाई जबकि 352वी रैंक लाने के बाद भी चंद्रकांता वर्मा IAS बन गई ।
यदि संबिधान निर्माण के समय जनता कांग्रेस की अंधभक्त न रही होती तो आज हम और हमारी संताने आरक्षण का दंश न झेल रहे होते। pic.twitter.com/85IabZhMWB— Bablu Sharma 🇮🇳 (@Bsharmaks) March 21, 2018
नम्रता ने फिर से यूपीएससी की तैयारी की। और, उन्होंने आईएएस पास कर लिया। उनको रैंक भी देश में बारहवां मिला है। वर्नित का रैंक भी 13वां है। दोनों सामान्य वर्ग में आते हैं। उस समय छत्तीसगढ़ को पांच आईएएस मिले हैं। इनमें नम्रता जैन छत्तीसगढ़ के अलावा विश्वदीप उत्तरप्रदेश, रीना जीमल झारखंड, जीतेंद्र यादव हरियाणा और नीलम ललीतादित्या तेलांगना से हैं।
नम्रता जैन को 12 वां रैंक, विश्वदीप को 360 रैंक, रीना को 380 रैंक, जीतेंद्र को 403 रैंक मिला है। वहीं नीलम को 470 रैंक मिला है। नम्रता सामान्य वर्ग से विश्वदीप, रीना और जीतेंद्र ओबीसी वर्ग और नीलम एससी वर्ग से। नम्रता जैन ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया, मैं हमेशा से कलेक्टर बनना चाहती थी। जब मैं आठवीं कक्षा में थी, एक महिला अधिकारी मेरे स्कूल आई थी। बाद में मुझे पता चला कि वह कलेक्टर थी। मैं उनसे काफी प्रभावित हुई। उसी वक्त मैंने तय कर लिया था कि मैं भी कलेक्टर (Collector) बनूंगी।



