कठिन हालातो के बीच पति-ससुराल के सहयोग ने दिलाई सफलता, टीचर से UPSC का सफर: Success Story

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Poonam Dalal Dahiya IPS
Success Story of Poonam Dalal Dahiya who became Primary School Teacher to ACP Officer. Poonam Dalal Dahiya IPS Success Story Hindi. How to crack Civil Services Exam 2018 by Poonam Dalal Dahiya tips.

Delhi: जब भी कोई व्यक्ति यूपीएससी की परीक्षा देता है, तो वह IAS बनने के लिए लिखता है। ऐसे में खुद में आत्मविश्वास का होना सबसे ज्यादा जरूरी है। इसी के साथ अगर आप ये सोचते हैं कि 20 घंटे पढ़ाई करने के बाद ही यूपीएससी की परीक्षा क्लियर होती तो ये बात अपने दिमाग से हटा दीजिए। एक दो नहीं पूरे तीन बार यूपीएससी की परीक्षा (UPSC Exam) पास कर चुकी आईआरएस अधिकारी की परीक्षा की तैयारी को लेकर विचार बिल्कुल अलग हैं।

जहां हम आज तक यही सुनते आये हैं कि इस कठिन परीक्षा में सफल होने के लिये स्टूडेंट्स को दिन-रात कड़ी मेहनत करनी पड़ती। एक दिन में 14 से 16 घंटे पढ़ाई करनी होती है। एक ऐसी महिला की कहानी बताने जा रहे है जिसने गर्भवती होने के बावजूद यूपीएससी परीक्षा को पास करने की जिद बनाई और अपने सपने को साकार किया। वह देश की अन्य महिलाओं के लिए एक प्रेरणा हैं, जो थोड़ी सी भी कठिनाई पर हार मान लेती हैं। उसने अपने हौसलों को कभी कम नही होने दिया।

अनेक का मानना है कि घंटे नहीं नियमित पढ़ाई करना जरूरी है। उनका मानना है कि दिन में 6 से 7 घंटे पढ़ाई करके भी यह परीक्षा पास की जा सकती है बशर्ते पढ़ाई नियमित रूप से की जाए। हरियाणा (Haryana) के झज्जर जिले की रहने वाली पूनम दलाल दहिया (Poonam Dalal Dahiya)। यूपीएससी में चयनित होने से पहले पूनम दलाल हरियाणा में डीएसपी के पद पर भी थीं। वर्तमान में वह आयकर विभाग में सहायक आयुक्त हैं।

सफलता का मंत्र (Success Mantra)

कई स्टूडेंट्स के मन मे सपना तो होता है, बड़ा अधिकारी बनने का, लेकिन मेहनत नही करना चाहते। कई लोग का कहना होता है कि इसमें दिन रात पढ़ाई करनी होती है यही सुनकर कई स्टूडेंट्स पीछे हट जाते है। लेकि ऐसा नही है अगर आप पढ़ाई का मंत्र जान लेंगे तक आप भी सफलता जरूर हासिल कर सकते है। कम पढ़िये पर रोज़ पढ़िये, यही मन्त्र उनके अनुसार इस परीक्षा की तैयारी के लिये काम आती है।

हरियाणा के झज्जर जिले की पूनम ने इसी मन्त्र पर हमेशा पढ़ाई की और सफलता भी हासिल की। उनका कहना है कि वे उस तरीके को बिल्कुल समर्थन नहीं करतीं, जहां स्टूडेंट्स एक दिन तो 18 घंटे पढ़ लेते हैं, फिर दो दिन का गैप कर देते हैं। फिर एक दिन 20 घंटे पढ़ लिया और तीन दिन किताब को हाथ नहीं लगाया। वे कहती हैं भले आप 6 घंटे पढ़ें पर रोजाना पढ़ें।

शुरुआत का सफर कठिनाई से भरा

पूनम का जीवन इतनी आसान नहीं था। वह पहले प्राइमरी स्कूल में शिक्षक थी। 21 साल की उम्र में दिल्ली के MCD स्कूल में उनकी सरकारी नौकरी लग गई थी। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने बैंक पीओ का फॉर्म भरा जो क्लियर हो गया था, जिसके बाद स्टेट बैंक में पीओ के पद पर नौकरी की। बैंक पीओ पद पर काम करने के बाद उन्होंने SSC की परीक्षा दी, जिसमें उनकी ऑल ओवर इंडिया में सातवीं रैंक आई थी। इतनी अच्छी रैंक आने के बाद पूनम ने 28 साल की उम्र में यूपीएससी परीक्षा के लिए पहली बार कोशिश की।

पूनम दहिया (Poonam Dalal Dahiya) ने 28 साल की आयु में यूपीएससी (UPSC) की पहली परीक्षा (Exam) दी थी। उस समय यूपीएससी में जनरल कैटेगरी वालों के लिए आवेदन करने की अधिकतम आयु सीमा 30 साल हुआ करती थी। वर्तमान में अधिकतम उम्र सीमा 32 साल है।

पूनम ने अपने हौसलों को मजबूत बनाते हुए साल 2011 में तीसरा अटेम्प्ट दिया था, जिसके बाद प्रीलिम्स क्लियर नहीं हुआ, उनकी उम्मीद टूट गई थी। लेकिन कुछ कर गुजरने का जुनून था। यूपीएससी का सफर यही समाप्त कर दिया। ऐसे में उन्होंने फिर हरियाणा सिविल सर्विसेज की परीक्षा दी थी, जिसमे उन्हें सफलता (Success) मिली। पेपर क्लियर होने के बाद उनके चहरे पर खुशी दिखाई दी। फिर हरियाणा पुलिस (Haryana Police) में शामिल हो गई थी।

पूनम ने कहा, किस्मत सबसे बड़ी चीज होती है

कभी भी परिस्थिति को देखकर अपनी हार नही मनाना चाहिये। क्योंकि परिस्थिति कभी एक जैसी नही होती। सफलता किसी परिस्थिति की मोहताज नही होती। जिसने कठिनाइयों से लड़ना सिख लिया उसके जीवन मे सफलता आनी तय है। लेकिन उसके लिए शर्त है कठिनाइयों से घबराना नही है।अपने लक्ष्य से पीछे नही हटना है।

पूनम की किस्मत ने फर एक बार करवट ली। उसको भरोसा भी नही था कि कुछ समय बाद उसके साथ कुछ ऐसा होगा कि उसकी किस्मत ही पलट जाएगी। कुछ सालों बाद सरकार की ओर से एक नोटिफिकेशन जारी हुआ जिसमें कहा गया था कि जिसने साल 2011 में यूपीएससी की परीक्षा दी, उसे दोबारा मौका दिया जा रहा है। क्योंकि उस दौरान सिलेबस में कुछ बदलाव हुआ था।

शादी के बाद कई लड़कियां अपने आप को हारा हुआ समझ लेती है अपने सपने वही छोड़ देती है लेकिन पूनम ने आपने सपने शादी के बाद भी बरकरार रखे। अपने लक्ष्य से पीछे नही हटी। जब पूनम ने 2015 में यूपीएससी की परीक्षा दी उस समय प्रीलिम्स के दौरान गर्भवती थीं और उनका नौंवा महीना चल रहा था।

वहीं जब मेन्स का पेपर दिया उस उनका बेटा ढाई महीने का था। ये मुश्किल सफर था। इस दौरान उनकी काफी अच्छी रैंक आई और IRS ऑफिसर के पद पर नियुक्ति हुई। उन्होंने कहा, जो यूपीएससी क्लियर करना चाहते हैं उनके अंदर हार्ड वर्क, स्मार्ट वर्क और किस्मत इन तीनों का होना सबसे ज्यादा आवश्यक है।

अगर आप यूपीएससी की परीक्षा पास करना चाहते हैं, तो रोज पढ़ना जरूरी है। भले ही आप 6 घंटे पढ़ रहे हैं, लेकिन रोजाना पढ़ें। प्रेक्टिस अपनी जारी रखे। आप रोज टेस्ट सीरीज में अपना कुछ समय दे जिस्ड आपको पता चलेगा कि आपको पेपर सोल्ब करने में कितना टाइम लगता है। किस विषय पर आप कमजोर, किस सब्जेक्ट में आपको उत्तर देने में कठिनाई हो रही। यही सब आपको सफलता की ओर ले जाते है। ऐसा न हो आज पढ़ लिया, कल छोड़ दिया या फिर आज 18 घंटे पढ़ लिया उसके बाद तीन दिन तक नहीं पढ़ा। इसी के साथ अपने ऊपर पूरा विश्वास रखें कि आप ये काम कर सकते हैं।

संघर्ष की कहानी (Struggle Story)

पूनम दलाल कुछ दिनों में आईपीएस बन जाएंगी। लेकिन उनकी जिंदगी संघर्षों से भरी रही है, उनके जीवन मे कुछ ऐसे भी पल आये जिससे वो टूटा हुआ महसूस करने लगी लेकिन परिवार के साथ ने उनको हौसला दिया। हर परिस्थिति का डटकर सामना किया। शादी के बाद हर लड़की अपने सपनो को साकार करने में सफल नही होती। लेकिन पूनम ने शादी के बाद भी अपने सपनो को जिंदा रखा और सफलता भी हासिल की। जो मध्यम क्लास की हर लड़की को आगे बढने की प्रेरणा देती है।

12वीं पास करने के बाद उन्होंने जेबीटी की। 2002 में उन्होंने एमसीडी स्कूल सेक्टर-24 रोहिणी में शिक्षक की नौकरी शुरू की। इससे पहले कोचिंग पढ़ाई। दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्राचार से ग्रेजुएशन किया और वर्ष 2007 में वह दिल्ली के असीम दहिया के साथ शादी कर अपना जीवन जिंदगी जीने लगी। कस्टम एक्साइज डिपार्टमेंट में कार्यरत उनके पति ने हमेशा पूनम को आगे बढ़ाने में उनका साथ दिया।

उनको हर परिस्थिति में खड़े रहने के किये प्रेरित किया। उनकी साथ परछाई बनकर उनका हौसला बढ़ाया। उनकी सास ने भी उनका बहुत सपोर्ट किया।उनके छोटे बच्चे को माँ बनकर पाला, ऐसे में उनकी सास ने मां की भूमिका निभाते हुए बच्चे को खुद संभाला और बहू को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। ससुर रणधीर सिंह दहिया ने बेटी की तरह सम्मान दिया।

2002 प्राइमरी स्कूल में टीचर, इसके बाद बैंक पीओ के रूप में चंडीगढ़ की एसबीआई ब्रांच में नौकरी की, एसएससी में ऑल इंडिया लेवल पर सातवीं रैंक ली। दो बार रेलवे की एलाइड सर्विस में चयन हुआ। आरपीएफ में असिस्टेंट कमांडेंट की नौकरी छोड़ी। 2010 में एचपीएस के रूप में चयनित। फरीदाबाद और गुड़गांव में एसीपी (ACP) के पद पर कार्यरत हैं। उनकी सफलता की कजनी हर लड़की के लिए प्रेरणा से भरी है।

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