फौजियों की खान है यह जाट परिवार, अब बेटी सेना में बनीं पिता से भी बड़ी अफसर: Inspirational Story

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Pyari Chaudhary Army
Barmer daughter Pyari Choudhary become first woman lieutenant in Indian Army. Subedar father's daughter Pyari Chaudhary became a lieutenant.

Barmer: भारत-पाकिस्तान की सरहद पर बसे बाड़मेर (Barmer) की बेटी ने कामयाबी की ऊंची उड़ान भरी है नाम है प्यारी चौधरी। बाड़मेर के छोटे से गांव राऊजी की ढाणी काउखेड़ा की बेटी प्यारी चौधरी भारतीय सेना में अफसर बनी है। अपने परिवार से इंडियन आर्मी ज्वाइन करने वाली प्यारी छठी सदस्य हैं। प्यारी (Pyari Chaudhary) भारतीय सेना (Indian Army) में लेफ्टिनेंट बनी है।

सेना में अफसर बनने के बाद पहली बार अपने गांव आने पर गांववासियों ने अफसर बिटिया का जश्न मनाकर किया भव्य स्वागत। भारत पाकिस्तान पर बसे सरहदी बाड़मेर जिले के राऊजी की ढाणी काऊ खेड़ा कवास निवासी प्यारी चौधरी का भारतीय सेना में मेडिकल विभाग से लेफ्टिनेंट के पद पर सेलेक्शन हुआ है। प्यारी ने सेना में ऑफिसर बन कर बाड़मेर जिले का नाम गर्व से ऊंचा कर दिया है।

पश्चिमी राजस्थान (Rajasthan) में भारत-पाकिस्तान सीमा पर बसे बाड़मेर की बेटी प्यारी चौधरी ने सेना में लेफ्टिनेंट (Lieutenant) पद पर तैनात होकर सूबे का ही नहीं, बल्कि देश का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। प्यारी चौधरी ने भारतीय सेना (Indian Army) में पश्चिमी राजस्थान की पहली महिला लेफ्टिनेंट (First female lieutenant) बनकर गांव की महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए पंख दिये है।

लोग कहते थे गांव की लड़की की जिंदगी गृहस्थी संभालने के लिए है, वो पढ़ लिखकर करेगी क्या आज प्यारी (Pyari Chaudhary) ने उन सभी को मुंह तोड़ जवाब दिया है, जो लड़की को पढ़ाने का विरोध करते है। प्यारी गांव की लड़कियों के लिए एक मिसाल से कम नही। प्यारी ने अपने साथ गांव की लड़कियो का भी सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।

राजस्थान की राजधानी जयपुर (Jaipur) से 510 किलोमीटर दूर भारत-पाकिस्तान सीमा के पास 492 घरों का छोटा सा गांव है राऊजी की ढाणी काउखेड़ा। बाड़मेर जिले के इस गांव का एक जाट परिवार भारतीय सेना के अफसरों की खान है। यहां के बेटे ही नहीं बल्कि बेटी भी इंडियन आर्मी में अफसर (Indian Army Officer) है।

सेना से खास रिश्ता

बाड़मेर जिला मुख्यालय से 29 किलोमीटर दूर गांव राऊजी की ढाणी काउखेड़ा के भानाराम व अणची देवी के इस परिवार से छठे सदस्य के रूप में प्यारी चौधरी ने इंडियन आर्मी में शामिल हुई है। भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनने के बाद हाल ही में प्यारी चौधरी पहली बार घर पहुंची तो परिवार से लेकर गांव के सभी लोगो ने उनका स्वागत खास अंदाज में किया।

बाड़मेर की पहली बेटी सेना में

मीडिया से बातचीत के दौरान भारतीय सेना के सूबेदार किस्तूरा राम चौधरी ने बताया कि उनकी बेटी प्यारी चौधरी का भारतीय सेना की मेडिकल कोर में लेफ्टिनेंट के पद पर चयनित हुई है। प्यारी चौधरी भारतीय सेना (Pyari Chaudhary Indian Army) में ऑफिसर बनने वालीं बाड़मेर जिले की पहली महिला है। प्यारी ने गांव की महिलाओं को उड़ने के लिए पंख दिये। जो सोचते थे लड़की सेना में नही जा सकती उन सभी को करारा तमाचा मारा है सेना में शामिल होकर।

बेटी का पद पिता से बड़ा

भारतीय सेना में सूबेदार (Subedar) के पद पर 47 आर्म्ड रेजिमेंट में तैनात किस्तूरा राम चौधरी बताते हैं कि बेटी ने परिवार के साथ-साथ पूरे गांव का नाम गर्व से ऊंचा कर दिया। एक पिता के लिए इससे बड़ी गर्व की बात क्या हो सकती है कि उसकी बेटी अपने पिता से भी ऊपर का पद प्राप्त कर अफसर बन जाए। प्यारी का भाई है जिसका नाम गोरख है।

कौन है लेफ्टिनेंट प्यारी चौधरी

लेफ्टिनेंट प्यारी चौधरी (Lieutenant Pyari Chaudhary) ने प्रारंभिक शिक्षा पटियाला के आर्मी नर्सरी स्कूल से प्राप्त की। पिता की नौकरी के चलते देश के विभिन्न केंद्रीय व सैनिक स्कूल से शिक्षा प्राप्त की। बीएससी नर्सिंग महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी मुंबई से पास की। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद प्यारी ने भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त करने के लिए ऑल इंडिया स्तर पर लिखित परीक्षा देकर मेरिट में आकर उसके बाद इंटरव्यू व मेडिकल टेस्ट देकर सभी को अच्छे नम्बर से पास कर सेना में चयन हुआ। पिछले साल ही ऑल इंडिया मैरिट के आधार पर प्यारी चौधरी को सेना के मेडिकल कोर में लेफ्टिनेंट के पद पर चयन हुआ है।

आर्मी अफसरों से खास रिश्ता

31 दिसम्बर 1997 को जन्मी प्यारी चौधरी कहती हैं कि मेरी रगों में आर्मी अफसर का खून दौड़ रहा है। भारतीय सेना के प्रति बचपन से ही लगाव था।
बचपन से ही सेना में जाने का सपना था। पिता को वर्दी में देखकर प्रेरित होती थी। मेरा भी सपना था कि आर्मी अफसर बनूं बचपन का सपना सच कर आज सेना में अफसर बनी।

माता-पिता बढ़ाया हौसला

प्यारी चौधरी ने अपनी सफलता का श्रेय पिता किस्तुरा राम चौधरी व कमला देवी देते हुए ​कहा कि माता-पिता ने उसके होसलो को कभी कम नही होने दिया। हर परिस्थिति में खड़े रहने के लिए मजबूत बनाया, जबकि सरहदी जिले बाड़मेर में बेटियों को अधिक पढ़ने-लिखने का मौका नहीं दिया जाता और उनका विवाह भी कम उम्र में ही कर दिया जाता है। प्यारी के साथ ऐसा नहीं हुआ है। उनके माता पिता ने उनको कभी कमजोर नही पड़ने दिया। शायद यही कारण है कि आज वे अफसर बनने में कामयाब हुई।

फौजी परिवार

जिले की पहली युवती प्यारी चाैधरी का भारतीय सेना के मेडिकल कोर में लेफ्टिनेंट पद पर चयन परिवार के लिए गर्व की बात है, उन्होनें परिवार की परंपरा को कायम रखा। राऊजी की ढाणी निवासी भानाराम व अणसी देवी का यह परिवार फौजियों वाला है। इनके तीन बेटे हैं तीनों ही फौजी है। प्यारी के ताऊ जोधाराम, कैप्टन, कलाराम, हलवदार (ताऊ), हीराराम पुत्र जोधाराम, नायक, जसवंत सिंह पुत्र कलाराम, नायक, किस्तुरा राम, सुबेदार (पिता), प्यारी देवी पुत्री किस्तुरा राम (लेफ्टिनेंट) सभी का फौजी से खास रिश्ता है।

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