एशिया की पहली महिला लोको पायलट का नाम इतिहास में दर्ज हुआ, अब वंदे भारत एक्सप्रेस दौड़ा रही हैं

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Surekha Yadav vande bharat
Asia's first woman loco pilot Surekha Yadav adds another feather to her cap, becomes first female to operate Vande Bharat Express train.

Delhi: भारत की महिलाएं अब इतिहास रच रही है। इन महिलाओं ने न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी अपने नाम के परचम गाड़ रखे है। महिलाओं ने ठान लिया है कि अभी वह हर वह काम करेंगे, जो इस धरती में संभावना है। आज महिलाओं के काम करने का हुनर बता रहा है कि वह कभी भी किसी मामले में कम नहीं है।

देश के लिए यह एक बहुत बड़ी बात है कि महिलाएं भारत देश को विकसित करने में अपना योगदान दे रही है। दोस्तों ऐसी महिला के बात करेंगे, जो भारत ही नहीं बल्कि पूरे एशिया की पहली महिला लोको पायलट (First Female Loco Pilot) है। जिनका नाम सुरेखा यादव (Surekha Yadav)। दोस्तों यह महिला भारतीय रेलवे की सबसे वरिष्ठ लोको पायलट है। आज हम इन के विषय में विस्तार से जानेंगे।

जाने लोको पायलट सुरेखा यादव के बारे में

सुरेखा यादव का जन्म 2 सितंबर 1965 में जन्मी सुरेखा यादव भारत की पहली महिला लोको पायलट है। इन्होंने वर्ष 1988 को भारतीय रेलवे ज्वाइन किया था। इस हिसाब से देखे तो सुरेखा पहली सबसे बुजुर्ग महिला लोको पायलट है। इनकी शुरुआत मध्य रेलवे के लिए पहली “लेडीज़ स्पेशल” लोक ट्रेन अलर्ट, चलाई थी।

यह ट्रेन अप्रैल 2000 में दीप्ति रेल मंत्री ममता बनर्जी द्वारा चार मेट्रो शहरों में प्रारंभ की गई थी वर्ष 2000 से लेकर 2010 तक उपनगरीय स्थानीय ट्रेन मोटर महिला रही उसके बाद 2010 में सीनियर लोको पायलट मेल में कार्य किया।

उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट 8 मार्च 2011 को हुआ, जब वे अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कठिन लेकिन सुंदर स्थलाकृति के माध्यम से सीधे सीएसटी तक डेकन क्वीन को ड्राइव करने वाली एशिया की पहली महिला ट्रेनर बन कर कार्य किया।

सुरेखा की निजी जानकारी

जानकारी के अनुसार सुरेखा का जन्म 2 सितंबर 1965 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के एक परिवार में हुआ था। सुरेखा के पिता रामचंद्र भोसले एक किसान है और दिव्यांग व्यक्ति भी और उनकी माता सोना बाई एक ग्रहणी है।

सुरेखा अपने पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी है इसीलिए उनकी जिम्मेदारियां भी काफी ज्यादा थी। उनकी प्रारंभिक शिक्षा सेंट पॉल कॉन्वेंट हाई स्कूल, सारा से हुई है। इसके बाद उन्होंने व्यवसायिक क्षेत्र में अपनी पढ़ाई की।

पश्चिमी महाराष्ट्र केरा सत जिले के कराड में सरकारी पॉलिटेक्निक से विद्युत रणनीति में प्रवेश हेतु तैयारी प्रारंभ की। सुरेखा एक शिक्षक बनना चाहती थी, इसके लिए उन्होंने बीएससी और B.ed की पढ़ाई की। परंतु भारतीय रेलवे की नौकरी उनका इंतजार करें इसीलिए वे टीचर नहीं बन सके।

वंदे भारत एक्सप्रेस की पहली महिला लोको पायलट

दोस्तों इस समय सुरेखा यादव सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियां बटोर रहे हैं, क्योंकि उनके हाथों एक और उपलब्धि लगी है। आपको बता दें भारत की पहली महिला लोको पायलट के हाथों अब वंदे भारत एक्सप्रेस लगी है। वंदे भारत एक्सप्रेस सेमी हाई स्पीड ट्रेन है जिसके बारे में सोशल मीडिया पर काफी चर्चाएं हुई हैं।

अब इस ट्रेन के संचालन की जिम्मेदारी सुरेखा यादव पर आ गई है। मध्य रेलवे के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार सुरेखा यादव ने सोमवार को सोलापुर स्टेशन और मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) के बीच इस सेमी-हाई स्पीड ट्रेन को चलाया है।

मध्य रेलवे के द्वारा एक विज्ञापन जारी किया गया जिसके द्वारा यह जानकारी दी गई कि ट्रेन 16 मार्च को अपने निर्धारित समय पर सोलापुर से रवाना कर दी गई थी और आगमन के 5 मिनट पहले ही वह अपने गंतव्य तक पहुंच गई थी। 450 किलोमीटर की यात्रा पूरी करने पर सुरेखा यादव को रेलवे स्टेशन पर सम्मानित भी किया गया।

ट्विटर से मिली है जानकारी

सुरेखा यादव की इस उपलब्धि के बारे में रेल मंत्री अश्विन वैष्णव ने अपने ट्विटर पर उनकी उपलब्धि शेयर की। ट्रेन के साथ तस्वीर निकालकर कैप्शन में लिखते हैं कि “पहली महिला लोको पायलट श्रीमती सुरेखा यादव ने ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ (Vande Bharat Express) का संचालन किया।” दोस्तों यह रेल मंत्रालय के साथ-साथ महिला और भारत के लिए बहुत ही गर्व की बात है।

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