उत्तराखंड के इस गाँव की महिलाओं ने स्वरोजगार से जीवन सवारा, हैंडीक्राफ्ट विलेज के नाम से फेमस हुआ

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Handicraft Business
Uttarakhand village Talla Gethiya's women started self employment handicraft work and became successful. Village known as handicraft village.

Nainital: भारत में कई ऐसे खूबसूरत राज्य हैं, जिन्हें देखकर मन प्रसन्न हो जाता है, इन्हीं में से एक है उत्तराखंड (Uttarakhand)। उत्तराखंड जैसे देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है। इस भूमि को देवभूमि इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इस जगह पर भगवान शिव के वराह अवतार के ढेरों साक्ष्य मिलते हैं। पहाड़ों में बसी होने की वजह से इस राज्य की खूबसूरती और भी ज्यादा बढ़ जाती है।

उत्तराखंड की खूबसूरत वादियां पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करने में पर्याप्त है। आए दिन सोशल मीडिया पर कई तरह की चीजें देखने को मिलती है। जो इस राज्य को गौरवान्वित करने के लिए पर्याप्त है। दोस्तों उत्तराखंड में कहा जाता है कि पहाड़ों में बसी होने की वजह से इस राज्य में रोजगार संभव नहीं है, खेती किसानी तो बहुत दूर की बात होती है।

लोग रोजगार की तलाश में यहां से पलायन कर जाते थे, परंतु अब महिलाओं ने इस राज्य के पलायन को रोकने के लिए कई प्रकार के स्वरोजगार को अपनाया है। आज हम इन्हीं स्वरोजगार (Self-employment) में से एक स्वरोजगार की बात करेंगे, वह है ‘हैंडीक्राफ्ट’ (Handicraft)। तो चलिए दोस्तों हम उत्तराखंड की उन महिलाओं के विषय में चर्चा करते हैं जो हथकरघा का काम करती हैं।

उत्तराखंड बना हाथ की कारीगरी का गढ़

दोस्तों यह मामला उत्तराखंड राज्य के अंतर्गत आने वाले नैनीताल जिले के तल्ला गेठिया गांव (Talla Gethiya Village) की है। इस गांव की महिलाएं अपने हाथों से सुंदर-सुंदर चीजें बनाकर लोगों को बेचती हैं। लोगों को उनकी बनाई हुई चीजें काफी ज्यादा पसंद आती है। पहले के समय में महिलाएं खाली समय का उपयोग ऐसे ही कामों में किया करती थी।

आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में लोग इन सब चीजों को भूल गए हैं, परंतु आपको बता दें आज भी कुछ महिलाएं हैं, जो हाथों की कला से खुद को आत्मनिर्भर बना रहे हैं। अपने हाथों के हुनर के कारण गांव का नाम रोशन किया है।

साथ ही सोशल मीडिया में एक चर्चा का विषय भी बन गई है। तल्ला गेठिया गांव की महिलाएं अपने हाथों के हुनर से काम करके अपना घर परिवार संभाल रहे हैं। हम कह सकते हैं कि उत्तराखंड की यह महिलाएं सशक्त महिलाये है।

एक व्यक्ति के कार्य ने महिलाओं को बनाया सशक्त

कहते हैं एक व्यक्ति की सफलता के पीछे किसी महिला का हाथ होता है। परंतु आज हम देख रहे हैं, इन सफल महिलाओं की कहानी के पीछे एक सफल व्यक्ति का हाथ है। जी हां दोस्तों हम बात कर रहे हैं गौरव अग्रवाल की, जिसने इन महिलाओं के प्रति समर्पण और प्रयास करके उन्हें एक ऐसा मुकाम दिया, जहां वे कार्य को करते हुए सशक्त बन रहे हैं।

आपको बता दें गौरव अग्रवाल इन्हीं पहाड़ों में रहकर पले बढ़े हैं। अपने करियर के चलते उन्हें इस गांव को छोड़कर दिल्ली जाना पड़ा, परंतु दिल्ली जाने के बाद भी उनका मोह इन पहाड़ों से ज्यादा था। भले ही दिल्ली में रहते थे, परंतु हर वर्ष अपने दोस्तों के साथ या फिर अकेले ही इन पहाड़ों की यात्रा करने आते थे।

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Handicraft Product Demo Photo

गौरव बताते हैं कि जब भी पहाड़ों में यात्रा करने आते थे। उस दौरान वे यहां की महिलाओं के हाथों से निर्मित कुछ चीजों को देखते थे, जो दिखने में काफी सुंदर और उपयोगी लगती थी। तभी उन्होंने सोचा कि क्यों ना इस गांव के लिए कुछ किया जाए।

गांव की महिला रजनी देवी का मिला सपोर्ट

आपको बता दें गौरव अग्रवाल की मदद के लिए रजनी देवी ने हाथ बढ़ाया। रजनी देवी तल्ला गेठिया गांव की महिलाओं और बेटियों को सिलाई कढ़ाई सिखाया करती थी। जिससे गांव की महिलाएं महीने का 300 से 400 RS सिलाई कढ़ाई के माध्यम से कमाए लिया करती थी।

गौरव का कहना है कि यहां की महिलाओं के हाथों में जादू है, वे सुई धागे से ऐसी चीजों का निर्माण कर सकती हैं, जिसके बारे में लोग अंदाजा भी नहीं लगा सकते। गौरव का कहना है कि जरूरी नहीं है कि सभी चीजें मशीनों द्वारा ही की जाए पहले की महिलाओं के हाथों में भी काफी हुनर था।

उन्होंने इस गांव की महिलाओं को कुछ नया करने के लिए प्रेरित किया। गौरव बताते हैं कि उन्होंने महिलाओं से कपड़ों के गहने बनाने के लिए कहा रजनी देवी के लिए यह प्रोसेस नहीं थी, परंतु उन्होंने गौरव को आश्वासन दिया कि वह इस काम को जरूर प्रारंभ करेंगे।

कपड़े की टाई से हुई इस कला की शुरुआत

गौरव बताते हैं कि इस कला की शुरुआत कपड़े की टाई के निर्माण से हुई है। उत्तराखंड के लोगों का कहना है कि कपड़े की टाइम उनके राज्य मैं एक पारंपरिक आभूषण है, जिसे वे अपने ट्रेडिशनल त्योहारों में पहना करते हैं। इस टाई का निर्माण रजनी देवी और उनकी बेटी नेहा ने किया था, जिसे गलूबंद कहा जाता है। इस वस्तु का एक और प्रचलित नाम है जिसे चोकर भी कहा जाता।

गौरव बताते हैं कि रजनी देवी का काम बहुत ही अच्छा है। वे सोने की वर्किंग काफी सजावट करते हैं, जो कि काफी खूबसूरत नजर आता है। धीरे-धीरे कपड़े से बने झुमके, पायल और कमरबंद बनाना शुरू किया। साथ ही कई महिलाएं उनसे जोड़ने लगे, तब गौरव ने कर्तव्य कर्म संस्था की स्थापना की।

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