Tuesday, October 26, 2021
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मुंबई के युवक ने बस को ही बना दिया बच्चों की पाठशाला, 15 अगस्त को किया था शुभारंभ

Ashok Kurmi School Bus

File Photo

Mumbai: जेसा की आप सभी जानते होंगे की महामारी के कारण लगाए गए लॉकडाउन में शिक्षा भी ऑनलाइन माध्यम से हो रही थी। सरकारी विद्यालयों में शिक्षा प्राप्त करने के लिए आने वालों बच्चों का हाल तो सभी को मालूम है। अधिकतर अर्थिक स्थिति से परेशान बच्चे ही यहां अध्ययन करने जाते हैं।

उनके घर में मुश्किल से एक बटन वाला फोन होता है, तो वह स्मार्ट फोन से ऑनलाइन पढ़ाई (Online Study) कहा से करते जिसके लिए सरकार की ओर से उन्हें स्मार्ट फोन मुहैय्या करवाएं गय। आपको जानकर हैरानी होगी कि तब भी भारत मे लगभग 3 करोड़ स्कूली विद्यार्थियों के पास डिजिटल सुविधाएं ही नहीं थी।

जिसमें बिहार प्रथम स्थान पर रहा। हालांकि इस फिगर में दिल्ली, मध्यप्रदेश, पंजाब और छत्तीसगढ़ के बच्चे सम्मिलित नहीं है। जब से महामारी और आपदा ने विश्व मे अपने पैर पसारे है। तब से व्यावसाय से लेकर शिक्षा तक तकरीबन हर चीज पर असर पड़ा है। ऐसे में विद्यार्थिय किसी ना किसी प्रकार से अपनी शिक्षा को जारी रख पा रहे थे।

मुम्बई (Mumbai) के एक सामाजिक कार्यकर्ता (Social Work) अशोक कुर्मी (Ashok Kurmi) ने विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए एक पुरानी बस को ही अध्ययनकक्ष (Classroom) में परिवर्तित कर दिया। उन्होंने इस मिनी स्कूल को 15 अगस्त (15 August) के दिन लांच किया था।

गरीब बच्चों हेतु बस में बनाया स्कूल

महामारी और आपदा के कारण से विद्यार्थियों को अपने विद्यालय नहीं जा सकते। इसलिए उन्हें वर्चुअल क्लास या कहें ऑनलाइन क्लास का सहारा लेना पड़ता है। ऐसे में अर्थिक स्थिति से कमजोर परिवार के बच्चें के लिए ऑनलाइन क्लास का हिस्सा बन पाने बेहद कठिन हो गया है। अशोक कुर्मी ने गरीब बच्चों (Slum Children) की इस समस्या को देखकर उनकी सहायता के लिए बस वाले स्कूल योजना बनाई।

सायन फ्रेंड्स सर्कल कर रही है सहयोग

फिलहाल ये विद्यालय पुराने एंटोप हिल पोस्ट ऑफिस (Antop Hill Post Office) चल रहा है। बता दें इस स्कूल को साइज फ्रेंड्स समूह (Size Friends Group) भी इस रोजाना सहयोग कर रही है। ये एनजीओ (NGO) सामाजिक सेवा के लिए अपनी आय का एक प्रतिशत देता है।

महामारी के समय भी अशोक कुर्मी ने दिया था योगदान

ये पहला कार्य नहीं है, जो अशोक (Ashok Kurmi) ने गरीब लोगों हेतु किया है। महामारी और आपदा के वक़्त पर भी उन्होंने कई लोगों की सहायता की थी। उस समय उन्होंने मास्क ओर सेनेटाइजर निशुल्क बाटें थे।

इसके सिवाय उन्होंने स्पाइडर मैन का पोशाक पहन कर मुम्बई के रास्तों को साफ भी किया है। ये तो कुछ भी नहीं उन्होंने डौरेमौन की पोशाक पहनकर झुग्गी झोपड़ी वाले लोगों के बाल भी कटवाए है। अब वे एक मिसाल बन गए है और दूसरों को प्रेरणा दे रहे हैं।

ENN Team
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