Alka Lamba Image Credits: Social Media
दिल्ली विधानसभा चुनाव में इस बारी भी ‘आप’ पार्टी ने बाज़ी मार ली है, अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी ने 62 सीटों के साथ जीत हासिल की है, वहीँ भाजपा को मात्र 8 सीटों पर संतोष करना पड़ा है, जबकि कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला है, साल 2015 में भी कांग्रेस को जीरो सीट मिली थी।
दिल्ली चुनाव परिणाम में सबसे चौंकाने वाला नतीजा चांदनी चौक सीट का रहा, क्योंकि अलका लांबा यहाँ की विधायक थी और चुनाव से ठीक पहले आम आदमी पार्टी से कांग्रेस में शामिल हुईं थी, अलका लांबा को इस चुनाव में अपनी ही चांदनी चौक सीट से बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा है, अलका को मात्र 3881 वोट मिले हैं, इस वजह से अलका लम्बा की जमानत तक जब्त हो गई।
अलका लांबा ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा कि मैं परिणाम स्वीकार करती हूं, पर हार नहीं, हिन्दू-मुस्लिम वोटों का पूरी तरह से ध्रुवीकरण किया गया। उन्होंने लिखा कि कांग्रेस पार्टी को अब नए चेहरों के साथ एक नई लड़ाई और दिल्ली की जनता के लिए एक लंबे संघर्ष के लिए तैयार होना पड़ेगा, अलका ने आगे लिखा कि आज लड़ेंगे, तो कल जीतेंगे भी।
2024 तक दिल्ली में #काँग्रेस का एक भी सांसद नहीं,
2025 तक दिल्ली में काँग्रेस का एक भी विधायक नहीं,
ना ही 2022 तक दिल्ली में एक भी कॉंग्रेस शासित MCD,फिर भी हम #दिल्ली वालों की आवाज बनेंगे और लोगों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।#हम_लौटेंगे 💪#JaiHind 🙏 🇮🇳@INCDelhi @INCIndia
— Alka Lamba (@LambaAlka) February 11, 2020
सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात तो यह है की पिछले चुनाव में अलका लांबा आम आदमी पार्टी के टिकट पर 18287 वोटों के अंतर से जीत कर विधायक बनी थीं, फिर इस बार बुरी हार का सामना करना पड़ा है, इस बार अलका लम्बा भाजपा और आप के प्रत्याशी के सामने ज़रा भी नहीं टिक पाई, इस बार चांदनी चौक सीट से आप पार्टी के प्रहलाद सिंह साहनी ने जीत दर्ज की है।
https://twitter.com/I_Ajay_Parmar/status/1227423975304765440
हमें दिल्ली के एक वोटर ने बताया की आप उनकी एकजुटता का नमूना देखिए, अलका लांबा एक हिंदू होकर बकायदा बुर्का पहनी और बुर्का में ही जीप में बैठकर वोट मांगने निकली। अलका लांबा ने बुर्का पहनकर कई शांति दूत क्षेत्रों में प्रचार किया, लेकिन शांति दूत इतने बेवकूफ नहीं है कि वह अपना वोट बर्बाद करें। जुम्मे के दिन उनके धार्मिक अड्डों से फैसला हो जाता है की कौन सी पार्टी को हराना है और किस पार्टी को एकमुश्त वोट देना है और वह इस बात का इंतजाम रखते हैं कि उनका एक भी वोट छूटने ना पाए।
कांग्रेस की #AlkaLamba बेचारी ने जीतने के लिए बुर्का भी पहन लिए फिर भी दिल्ली वालों ने सिर्फ 157 वोट ही दिए बेचारी को ☹️ ऐसा कोई करता है क्या ? #DelhiElection2020 #DelhiResults pic.twitter.com/Xhbr9ZgM9W
— Sanatani Nikhil 🇮🇳 सनातनी निखिल 🚩 (@sanatani_nikhil) February 11, 2020
दिल्ली के वोटर ने बताया की शांति दूत क्षेत्रों में मतदान केंद्रों पर लंबी लंबी लाइनें लगी हुई थी और करीब 96% वोटिंग शांति दूत कौम की हुई, जबकि मात्र 50% हिन्दुओ ने वोट दिया और इन 50% वोटों में से हिंदुओं का वोट तीन पार्टियों में बिखर गया, लेकिन शांति दूत संप्रदाय का 96 प्रतिशत वोटिंग सिर्फ एक ही पार्टी (आम आदमी पार्टी) को गया।
Victory in Delhi is vital for the Congress to lead the war against Communal forces…#AlkaLamba#ChandiniChowk#CongressWaliDelhi#DelhiVotesForCongress
pic.twitter.com/7VvowjQY5p— INC akhter (@INC_akhter) February 8, 2020
पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के नेतृत्व में दिल्ली में 15 साल तक शासन करने वाली कांग्रेस लगातार दूसरी बार विधानसभा चुनाव में एक भी सीट जीतने में नाकाम रही। कांग्रेस का न 2015 में खाता खुला और ना ही 2020 में। इस बार तो मत प्रतिशत का भी नुकसान हुआ। इस चुनाव में शून्य पर सिमटने वाली दिल्ली कांग्रेस में हड़कंप मचा हुआ है। दिल्ली कांग्रेस के प्रभारी पीसी चाको ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इनके साथ ही दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने भी इस्तीफा दे दिया।
इस चुनाव में कांग्रेस की बुरी स्थिति का इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि 66 में से मात्र तीन प्रत्याशियों की जमानत बच पायी। दिल्ली कांग्रेस प्रचार समिति के अध्यक्ष कीर्ति आज़ाद की पत्नी पूनम आजाद संगम विहार सीट पर अपनी जमानत नहीं बचा पाईं। दिल्ली विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष योगानंद शास्त्री की बेटी प्रियंका सिंह की भी जमानत जब्त हो गई।



