
Ambala: हम देखते हैं कि हर शख्स मे वो होसला नहीं रहता कि वह कुछ कर दिखाए। जिस व्यक्ति मे कुछ करने की चाह और दिल मे जुनुन रहा तो वह सब कुछ हासिल कर सकते हैं। चाहे वह कितनी भी बड़ी मुसीबत मे क्यो ना हो। वह कड़ी मेहनत करके सफ़लता प्राप्त कर ही लेते हैं।
ऐसे ही एक व्यक्ति है, जिन्होंने अपने अंदर के जज्बा, जुनून और सोच से सभी को आश्चर्यचकित कर दिया है। हम आज आपको एक विक्रम नाम के व्यक्ति के बारे में बताने जा रहे हैं। विक्रम अंबाला छावनी में निवास करते है।
आपको बता दें कि विक्रम (Vikram) नाम का यह व्यक्ति वेटर (Waiter) का काम करता है। परंतु विक्रम ने इस समय कुछ ऐसा कर दिखाया है। जिस पर भरोसा करना बहुत मुश्किल है। उन्होने इतना डिफ़रेन्ट काम किया कि लोग उन पर विश्वास तक नहीं कर पा रहे थे।
आपको बता दें कि विक्रम ने इस समय एक कबाड़ मोटर साईकिल से इलेक्ट्रॉनिक मोटर साईकिल (Electric bike) का निर्माण किया है। यह मोटर साईकिल जो विक्रम ने बनाई है कुछ अलग है और इस मोटर साईकिल को कई तरीको से खास बताया जा रहा है। आइए इस पोस्ट के तहत जानते हैं कि इस मोटर साईकिल (बाइक) मे क्या क्या खासियत है।
जानें विक्रम के परिवार, पढ़ाई तथा काम के विषय मे
विक्रम के परिवार वालों की बात करे तो उनके परिवार में उनके पिता है, जो मजदूरी का काम करते हैं। उनकी मां एक हाउस वाइफ़ है। इनके आलावा उनके परिवार मे उनका एक छोटा भाई भी है। जो कक्षा 10 वी मे पढ़ाई करता है।
आपको बता दें कि वर्ष 2019 मे विक्रम ने अंबाला शहर से आईटीआई प्लास्टिक प्रोसेसिंग ऑपरेटर की पढ़ाई सम्पन्न की थी। विक्रम ने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ वेटर की नौकरी भी करना प्रारंभ कर दिया, जिससे वह अपने घर के खर्चो मे मदद कर सके। विक्रम को इस आईटीआई के कोर्स के बाद गुरुग्राम की एक कम्पनी मे नौकरी तो मिली, परंतु उन्हे तुरंत अंबाला आना पड़ा क्योकि विक्रम की तबीयत बहुत बिगड़ चुकी थी।
यूटयूब से आया था विक्रम के दिमाग मे इलेक्ट्रानिक बाइक बनाने का विचार
विक्रम की तबीयत जल्दी ठीक हो जाए इसलिए विक्रम कुछ दिन घर पर ही रहे। लेकिन उनके घर मे हो रही दिक्कतो के कारण वही पर रहकर एक दूसरी कम्पनी मे मजदूरी करना प्रारंभ कर दिया। यह नौकरी करते करते ही विक्रम को युट्युब से उनके दिमाग मे इलेक्ट्रॉनिक बाइक तैयार करने का विचार आया।
इलेक्ट्रॉनिक बाइक बनाने के लिए विक्रम ने मजदूरी करके कमाए हुए पैसे के साथ साथ कुछ और पैसे उधार लेकर जमा किए। जिससे उन्होने कबाड़ की बाइक (Junk Bike) खरीदकर इस कबाड़ बाइक को इलेक्ट्रॉनिक बाइक मे बदलने का कार्य प्रारंभ किया।
इलेक्ट्रानिक बाइक बनाने में 50 हजार रुपए से ज्यादा हो चुके हैं ख़र्च
विक्रम बाइक की विशेषता बताते हुए कहते है कि इस इलेक्ट्रॉनिक बाइक को सिर्फ़ डेढ़ यूनिट मे 80 की रफ़्तार मे 80 किलोमीटर तक चलाई जा सकती हैं। इसका मतलब यह है कि यह बाइक 80 किलोमीटर की दूरी का सफ़र सिर्फ़ 10-11 रुपए मे तय कर सकती है। जो कि बहुत ही हैरानी करने वाली बात है। विक्रम ने यह भी बताया कि इस इलेक्ट्रॉनिक बाइक को निर्माण करने मे 56 हजार रुपए व्यय हो चुके हैं। लेकिन 2-3 हजार रुपए और भी लगना बाकी है।
आपको बता दें कि विक्रम ने इस इलेक्ट्रॉनिक बाइक को चलाकर भी देखा और उस बाइक से वह आईटीआई गये, जिससे वहा के अधिकारियो को विक्रम द्वारा बनाई गयी, यह बाइक बहुत पसंद आयी और इस बाइक को बनाने के आइडिया को विकाम ने उन अधिकारीयो बताया।
उनकी यह बाइक सभी को इतनी पसंद आई कि विक्रम अब स्वयं का एक स्टार्ट अप करना चाहते हैं। परंतु उनके परिवार की आर्थिक स्थिति के कारण वह बिजनेस को प्रारंभ करने मे सफ़ल नहीं हो पा रहे हैं। हम उम्मीद करते है कि विक्रम इसे हर किसी तक पहुंचाने में सफल होंगे।



