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Delhi: मेहनत करने वालो की कभी हार नही होती। जीवन संघर्षो से भरा हुआ है। हर किसी के जीवन मे आशा निराश होती। कोई टूट जाता है, तो कोई ऊंचाई को छू लेता है। कड़ी मेहनत से IAS बनने वाले कई शख्सियतों की चर्चा अब तक हम कर चुके हैं। आज हम राजस्थान के एक माता-पिता के त्याग और मेहनत की बात कर रहे हैं, जिन्होंने खुद गरीबी का सामना किया, लेकिन अपने बेटों को कभी कोई कमी नहीं होने दी और बेटों ने भी परिवार का नाम रौशन किया।
राजस्थान के एक छोटे से शहर में रहने वाले दो भाई पंकज और अमित कुमावत की कहानी सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स के लिए प्रेरणा से कम नहीं है। सुभाष कुमावत के दो बच्चों है। उनके दो बेटों की कहानी जिन्होंने एक नहीं दो दो बार यूपीएससी का परीक्षा पास की और आईपीएस बनकर देश के सिविल क्षेत्र में अपनी सेवा दे रहे हैं।
सुभाष कुमावत झुंझुनू जिला मुख्यालय के गुढा मोड पर एक छोटी सी टेलर की दुकान चलाते थे, उनकी पत्नी भी उनके साथ इस काम में उनका साथ देती है। आशाओं से भरी सोच के साथ यह दास्तां सपने, संकल्प और संस्कारों से जुड़ी है। सपना था गरीबी से जीवन जीने वाले माता-पिता का और संकल्प था संस्कारों में पले उन दो बेटों का जिनके जीने का ही एकमात्र उद्देश्य माता- पिता के उन सपनों को सच करने का।
अपने सपने से बने उस संकल्प को सच करने के लिए पिता दिन रात जागकर सिलाई करते, तो मां भी नींद को पीछे छोड़ कढ़ाई में साथ देती। इस सिलाई और कढ़ाई के बीच ही होती उन बेटों की पढ़ाई भी जिनकी किताबों का बंदोबस्त माता पिता के उस रात दिन की मेहतन पर ही आश्रित था। लेकिन, अभाव और संघर्ष के दौर में भी उस परिवार ने हौंसले को कभी हारे नही दिया। कुछ समय बाद सच हुआ उनका संस्कारों में पले संकल्प का सपना।
राजस्थान के झूंझुनूं शहर के मोदी रोड के पास रहने वाले सुभाष कुमावत और उनकी पत्नी राजेश्वरी देवी के दिल को आज बहुत खुशी मिली। उनकी आंखों में एक गहराई सी दिखाई देती है, जो खुशियों में इतनी भरी रहती है कि खुशी के आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे। घर में बधाईयों का सिलसिला लगा है और वे सबसे प्रेम के साथ मिल रहे है।
झुझुनूँ के दो सगे भाई अमित कुमावत और पंकज कुमावत इस बार एक साथ IAS में चुने गए , इनके माता पिता सिलाई का काम करते है , एक शाश्वत सत्य है , ज़्यादातर बड़े वो बनते है जो छोटे घरों से निकलते है । बधाई💐💐 pic.twitter.com/FYsHVeEz4O
— Dr.RAVINDRA CHOUDHARY (@lunaychravindra) April 9, 2019
सुभाष सिलाई का काम करते हैं और राजेश्वरी बंधेज बांधने का काम करती है और उनके तीन बेटों में से दो सिविल सर्विसेज में चयनित हो गए हैं। शुक्रवार को यूपीएसससी की ओर से रिजल्ट घोषित होते ही उनके बेटो की किस्मत बदल गई। उनके बड़े बेटे पंकज कुमावत ने 443वीं और अमित कुमावत ने 600वीं रैंक हासिल किया है और परिवार में आज तक किसी को सरकारी नौकरी नहीं प्राप्त थी, लेकिन इन्होंने अपने खानदान की इस परम्परा को तोड़ दिया।
पंकज कुमावत ने आईआईटी दिल्ली से मैकेनिकल में बीटेक किया है और कुछ समय से नोएडा की एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी कर रहा था। भाइयों में बड़े पंकज ने साल 2018 में दूसरी बार सिविल सर्विस की एग्जाम दिया और उसमें सफलता हासिल की।
RSM SCHOOL के पूर्व छात्र अमित कुमावत और पंकज कुमावत के IAS में चयन पर जश्न में सराबोर हुआ प्रांगण डी जे की धुन पर झूमा पूरा RSM परिवार। …पुरे परिवार का विद्यालय ने किया सम्मान डॉक्टर उमेद सिंह शेखावत और सचिव सज्जन कुमार शर्मा निदेशक विवेक शर्मा ने दी सभी को बधाईया पार्ट 3
— vivek Sharma (@vip_jjn) April 6, 2019
साल 2017 में पंकज सफल नही हुए थे, तब भी उन्होंने हार नही मानी आपने हौसले कम नही होने दिए, महज 12 नंबर कम होने की वजह से वो परीक्षा में सफल नही हुए थे। साल 2018 में ही पंकज के भाई अमित ने भी सिविल सर्विस की परीक्षा पास की थी। दोनों भाइयों ने आईआईटी-दिल्ली से बी टेक किया था।
पकंज और अमित का कहना है कि हमारे माता-पिता ने हमें पढ़ाने के लिए कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया है। वह हमारी किताब फीस और दूसरी चीजों का बंदोबस्त करने के लिए रात दिन जाग कर कठिन परिश्रम करते थे। पिता अपनी आय को बढ़ाने के लिए ओवरटाइम काम किया करते थे।
UPSC- (IAS) रिजल्ट 2019
1- शिवम प्रजापति
2- प्रजापति अमित कुमावत
3-प्रजापति पंकज कुमावत
4- अजय कुम्भार गणपति
5.ओजस्वी प्रजापति
6.अनिल प्रजापति
7. नरेश राजोरा
इस सफलता के लिए इन्हें समस्त प्रजापति फाउंडेशन, फतेहपुर शेखावाटी की ओर से बहुत बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं।— Mewaram prajapati (@Mewarammarwal) August 6, 2020
पंकज और अमित ने साल 2018 में एक साथ यूपीएससी की परीक्षा पास की थी। 5 अप्रैल को दोनों का परिणाम आया तो परिवार में माता पिता की आंखे आँसू से भर गई। यूपीएससी सिविल सेवा में दोनों बेटों का नाम एक साथ आया। दोनों भाइयों ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को दिया और कहा कि परिवार की स्थिति अच्छी ना होने के बाद भी माता पिता ने दिन रात मेहनत करके हम लोगो को अच्छी शिक्षा दी।
दोनों बेटो का कहना है कि इतनी कठिन परिस्थिति के बावजूद अगर हम हमारे सपनों की सीढ़ी चढ़ पाए तो इसका पूरा श्रेय हमारे माता-पिता को जाता है। उन्होंने हमें कठिन परिश्रम करना सिखाया, जिससे हम इन सपनों को साकार कर पाए। हमने उनके सपनों को सच कर दिखाया।



