
Kanpur: भारत की 75 प्रतिशत आबादी कृषि पर ही निर्भर है। उनका घर परिवार कृषि से ही चल रहा है। परंतु किसानों के लिए उनका व्यवसाय किसी जुए से कम नहीं है। साल में 3 मौसम होते है ठंडी, गर्मी, बरसात और फसल की पैदावार पूरी तरह मौसम पर निर्भर है। परंतु जब जिस मौसम की जरुरत नहीं होती वही चीज़ पहले होती है।
प्राकृतिक आपदा बाढ़ और ओला भ्रष्टि से फसल और किसानों की मेहनत दोनों ही नष्ट हो जाती है। ऐसे में किसान भाई अपनी जान देने को मजबूर हो जाते है। हर वर्ष 10 प्रतिशत किसान अपनी जान दे देते है। एक किसान वर्तमान समय में केवल कृषि अकेले पर निर्भर नहीं रह सकता उसे कोई न कोई व्यापार करना ही पड़ता है।
भारत देश सोने की चिड़िया कहलाता था। क्योंकि भारत की जमीन पर अन्न रूपी सोना था। परंतु अंग्रेजो ने नील की खेती कर कर के जमीन की उर्वरक शक्ति समाप्त कर दी है और रही सही कसर रासायनिक उर्वरकों ने पूरी कर दी है।
अगर आगे भी किसान अपनी जमीन पर अनाज की अच्छी पैदावार चाहता है, तो अभी से ही रासायनिक उर्वरक छोड़ जैविक खाद अपनाना होगा और इस जैविक खाद का सबसे अच्छा विकल्प वर्मीकम्पोस्ट है। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए बहुत सारी नई पहल हुई आइये जानते है इनके बारे में।
जैविक खेती को बढ़ावा देने स्वयं सहायता समूह बनाया गया
खेतो की हालत देखते हुए अब जैविक खेती (Organic Farming) को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि विज्ञान के विशेषज्ञ ग्रामीण लोगों को वर्मीकम्पोस्ट बनाने के लिए मोटीवेट कर रहे हैं। इसके ढेरों फ़ायदे हैं। खेती के लिए खाद की आवश्यकता के साथ साथ काफी सारे लोगों को रोज़गार मिल रहा है।
इस स्मार्ट वर्क से कम लागत में अधिक लाभ कमा सकते है। अगर किसी किसान के पास कम भूमि है या फिर खेती से अच्छा मुनाफा नहीं हो पा रहा और वे कोई और व्यापार शुरू करने का मूड बना बैठे है तो वह वर्मीकम्पोस्ट बनाकर अपना व्यापार शुरू कर सकते है।
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) राज्य के बागपत ज़िले की निवासी दर्शना शर्मा ने वर्मीकम्पोस्ट यूनिट (Vermicompost Unit) बनाई और अपनी आर्थिक स्थिति सुधार कर और लोगों को रोजगार दिया है। उत्तर प्रदेश राज्य के बागपत ज़िले के अन्तर्गत आने वाला गांव मिताली की दर्शना शर्मा बेहद एक्टिव और क्रिएटिव महिला है।
उन्होंने वर्ष 2002 में अपनी तरह एक्टिव और क्रिएटिव 15 महिलाओं का एक ग्रुप बनाया और ओमकार महिला स्वयं सहायता समूह नाम देकर इसकी शुरुआत की। इसके बाद वर्मीकम्पोस्ट खाद (Vermicompost Compost) का बड़े पैमाने में उत्पादन आरंभ किया।
ओपन मेथड से बनाती है खाद
दर्शना शर्मा ने वर्मीकम्पोस्ट खाद बनाने के लिए ओपन मेथड विधि का अनुसरण किया। उन्होंने एक एकड़ जमीन पर खाद का उत्पादन किया। जिसे बढ़ा कर आज 3 एकड़ जमीन कर दी है।
खुले में खाद बनाने की इस विधि में सितंबर से अप्रैल माह में इसकी उत्पादन क्षमता बढ़ जाती है। उनके साथ समूह की अन्य महिलाओं ने भी वर्मीकम्पोस्ट खाद बनाना शुरू किया और उस खाद के छोटे छोटे पैकेट बना कर मार्किट में बेचने का फैसला लिया जिससे उनको ज्यादा मुनाफा हो सके।
कितनी लागत पर अच्छी आमदनी होती है और कितना मुनाफ़ा कमाया जा सकता है
ये महिलाए थोक के साथ साथ 5 किलो और 50 किलो के पैकेट भी तैयार करती है ओर इनका मूल्य 250 रुपये प्रति किलो हैं। ये महिलाये साल में लगभग 20 लाख रुपये से ज्यादा कमा लेती हैं। और उनकी लागत साल में करीब 8 लाख रुपये होती है।

मतलब वे साल का 12 लाख रुपये का मुनाफ़ा कमाती है। उन्होंने 4 मज़दूरों को काम पर रख उनको रोजगार दिया है। जब काम ज्यादा होता है तो मजदुर की संख्या भी बढ़ जाती है। वह किसानों को भी इस काम के लिए प्रेरित करती हैं।
इस काम के लिए कई पुरुस्कार मिले
दर्शना शर्मा ने अपने व्यापार को उत्तरप्रदेश के साथ ही की हरियाणा, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में भी बढ़ा लिया है। जम्मू-कश्मीर में फूलों की खेती के लिए विशेषतौर पर बनाया गया वर्मीकम्पोस्ट की डिमांड बहुत ज्यादा है।
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर, गौतम बुद्ध नगर, मेरठ और बुलंदशहर ज़िले के बहुत से किसान भाई उनकी यूनिट और उनके बिज़नेस मॉडल को समझने के लिए यहाँ तक आते हैं। दर्शना ने अभी तक करीब 600 से ज्यादा किसान भाइयो को प्रशिक्षण दिया है।
अपने इस कार्य के लिए उन्हें वर्ष 2002 में मेरठ के क्रॉपिंग सिस्टम रिसर्च प्रोजेक्ट के द्वारा सम्मानित किया। वर्ष 2003 में कृषि विभाग ने राज्य स्तर पर डॉ. चौधरी चरण सिंह पुरस्कार से उन्हें सम्मानित किया। इसके बाद वर्ष 2013 में ‘उत्तर प्रदेश के महिला मंच’ से भी इन्हें सम्मान प्राप्त हुआ।



