
Delhi: दोस्तों कहते हैं ईश्वर से पहले हमारे मां-बाप का स्थान होता है। जिन्होंने हमें इस दुनिया में लाए और बचपन से लेकर हमारे बड़े होने तक हमारे लालन-पालन में हमारे मां-बाप ने न जाने कितनी कुर्बानियां दी होंगी और अक्सर देखा गया है कि, जब बच्चे लायक हो जाते हैं, तो वह अपने सुख एंजॉयमेंट जैसी चीजों का तो बेहतर ख्याल रखते हैं, परंतु मां-बाप को बेसिक सुविधाएं बस दे पाते हैं।
हमारे पेरेंट्स ने हमारे परवरिश के दौरान ना जाने अपने कितने शौक को दबाया होगा। इसलिए हमारा फर्ज बनता है कि, जैसे ही हम आत्मनिर्भर बने अपनी आर्थिक स्थितियों के अनुसार सर्वप्रथम माता पिता की सेवा करें। हमारे देश में श्रवण कुमार जैसे मातृ-पितृ भक्त का नाम लिया जाता है।
आज हम आपको ऐसे ही एक शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं। जिन्होंने अपनी नौकरी लगते ही सर्वप्रथम अपनी मां को विदेश यात्रा करवाने का ठाना। और अपनी मां, जो कभी गांव से बाहर नहीं जाती थी उन्हें हवाई जहाज में बैठा कर दूर देश की यात्रा करवाई। आइए जानते हैं डिटेल से।
बेटा सिंगापुर में करता है जॉब, अपने साथ ले गया मां को
दोस्तों हम कलयुग के जिस श्रवण कुमार की बात कर रहे हैं, उनका नाम दत्तात्रेय जाधव (Dattatreya Jadhav) है। पैसे होते महाराष्ट्र के एक गांव से रहने वाले हैं। अपनी पढ़ाई कंप्लीट करने के बाद इन्हें सिंगापुर में एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब मिल गई।

प्रोफेशनली दत्तात्रेय जाधव एक ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर आधारित वेब डेवलपमेंट का काम करते हैं। जब इन्होंने मां से कहा कि वह उनको सिंगापुर अपने साथ ले जाना चाहता है तो, थोड़ी देर के लिए उनकी मां घबरा गई कैसे एयरप्लेन पर बैठूंगी और यह सफर मैनेज होगा। एक आम महिला के लिए ये स्वाभाविक सी स्तिथि है।
पूरे खानदान में नहीं बैठा आज तक कोई हवाई जहाज में
दत्तात्रेय ने इंटरनेट पर अपनी स्टोरी शेयर की जहां उन्होंने जब अपनी मां के विदेश यात्रा (Mother foreign trip) का अनुभव लिखा तो, उन्होंने उसमें मेंशन किया कि, उनके पूरे खानदान में आज तक कभी कोई भी महिला विदेश तो क्या हवाई जहाज की यात्रा भी नहीं की है। वही उनकी मां गांव की दूसरी महिला हैं, जिन्होंने विदेश यात्रा की है। जबकि विदेश यात्रा करने वाली गांव की प्रथम महिला स्वयं दत्तात्रेय जाधव की अपनी पत्नी ही है।
बेटे ने इंटरनेट पे शेयर किया अपना ये एक्सपीरियंस, जम के बटोरी तारीफ
दोस्तों मीडिया में आई जानकारी के अनुसार दत्तात्रेय ने मां को सिंगापुर (Singapore) लाने के बाद जब उनसे उनके अनुभव के बारे में पूछा तो, मां ने बताया सर्वप्रथम वह अपने बेटे को इतना आत्मनिर्भर और सक्षम देखकर खुश है कि, उनका बेटा इस लायक बन गया कि उन्हें दुनिया की सैर करवा रहा है और खुशी के आंसू रोक ना पाए।

यह सब देख दत्तात्रेय का कहना है कि, उन्हें विदेश की अच्छी जॉब पाने की भी इतनी खुशी नहीं हुए जितनी की अपनी मां को इस प्रकार प्रसन्न होते देख के हुए। यह उनके जीवन का सबसे बेहतरीन पल था। इंटरनेट पर यह स्टोरी पढ़ने के बाद यूजर्स दत्तात्रेय की तारीफ करने से खुद को रोक ना सके। एवं सभी ने ढेर सारी शुभकामनाएं मां एवं बेटे दोनों को प्रेषित की।
लोगों ने कमेंट्स में कहा आंखें खोल दी, कइयों को मिली प्रेरणा
दत्तात्रेय ने अपने लिंकडइन अकाउंट पर जब यह स्टोरी शेयर की तब भावुक करने वाली एक लाइन और लिखी कि, अपनी मां को विदेश यात्रा करवाने के बाद उन्हें जो सुख प्राप्त हुआ इसके साथ उन्हें एक मलाल भी है कि, वह अपने पिताजी को यह सुख नहीं दे पाया, क्योंकि दुर्भाग्यवश आज वह इस दुनिया में नहीं है।
दत्तात्रेय ने लोगों को यह सलाह दी कि आप दुनिया में कही भी घूमे एक बार अपने मां बाप को ऐसी यात्राएं जरूर करवाएं। ये उनके जीवन के अनमोल पल बन जाएंगे और उससे आपको जो आशीर्वाद मिलेगा वो आपकी जिंदगी भर की कमाई गई पूंजी से बढ़कर होगी।
यह सब पढ़कर कई इंटरनेट यूजर्स ने कमेंट किए कि, आपकी इस पोस्ट से हमारी आंखें खुल गई कि, अभी तक हम स्वयं की खुशियों में लगे थे। अब से मैं भी अपने मां बाप को दुनिया की तमाम सुख के साथ विदेशों की सैर करवाऊंगा।



