
Bageshwar: कहते महिला शक्ति से बड़ी कोई शक्ति नहीं होती, एक महिला एक लक्ष्मी दुर्गा और काली होती है। एक समय था, जब महिला केवल घर तक ही सीमित हुआ करती थी। लोगों का कहना था कि महिला घर गृहस्ती और किचन में ही शोभा देती है, परंतु आज का समय है महिला हर क्षेत्र में अपनी सफलता के झंडे काट रही है।
महिलाएं और वह काम भी कर रही हैं, जो एक आदमी करता है, जी हां आज की महिलाओं से कोई भी काम नहीं छोटा वह हर काम को करने में सक्षम है। आज से पहले भी महिलाएं घर का काम करने के बाद अपने पति के साथ खेती-बाड़ी में भी काम करती थी। यानी महिला शुरू से ही शक्तिशाली रही है।
आज हम आपको एक ऐसी ही महिला के बारे में बताने जा रहे हैं, जो एक टैक्सी ड्राइवर। सोच कर ही अचंभित होता है कि एक महिला और वह भी टैक्सी ड्राइवर (Woman Taxi Driver), दोस्तों आज के दौर में कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं है। अच्छा जीवन जीने के लिए धन का होना बेहद आवश्यक है। यदि धन नहीं है, तो हर व्यक्ति का जीवन कठिनाइयों से कटता है। आइए जाने उस महिला ड्राइवर के बारे में।
उत्तराखंड की पहली महिला चैनल रेखा लोहानी
सोशल मीडिया पर हो इस समय रेखा लोहानी पांडे (Rekha Lohni Pandey) काफी ज्यादा सुर्ख़ियों में उसका कारण यह है कि कुछ समय पहले ही उत्तराखंड (Uttarakhand) राज्य के परिवहन मंत्री चंदन रामदास ने रेखा का सम्मान देकर उनका प्रोत्साहन बढ़ाया। उनका कहना है कि स्वरोजगार की तरह कदम बढ़ाने वाली उत्तराखंड राज्य की यह पहली महिला है, जिन्होंने टैक्सी ड्राइवर की जॉब करके खुद को आत्मनिर्भर बनाया है।
परिवहन मंत्री चंदन राम दास का कहना है कि रेखा लोहानी पांडे ने ना केवल महिला सशक्तिकरण की तरफ कदम बढ़ाया है, बल्कि देश के लिए यह मिसाल कायम की है। समाज में उनका कदम काफी सराहनीय है, उनके कार्यों से समाज के अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा मिल रही। मंत्री महोदय ने उनकी मदद के लिए फोन करने और अपनी बात रखने तक के लिए भी कहा है।
कौन है रेखा लोहानी पांडे
बताया जा रहा है कि रेखा लोहानी पांडे उत्तराखंड राज्य के अंतर्गत आने वाले बागेश्वर जिले की गरुड़ इलाके के भेटा गांव से ताल्लुक रखती है और रेखा का ससुराल उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले की रानी खेत में है। आज से कुछ महीने पहले एक ग्रहणी का जीवन जी रहे हैं, परंतु दो-तीन महीने से भी रानीखेत हल्द्वानी के बीच टैक्सी चला रही हैं, जिससे अब दे आत्मनिर्भर महिला बन गई है।
इतना ही नहीं रहा पहली महिला ड्राइवर भी है। आप सोच सकते हैं कि एक ग्रहणी घर से निकलकर आत्म निर्भर बनने की राह में चलने लगी। दोस्तों आज की महिलाएं असंभव को संभव तरीके से कर सकते हैं।
टैक्सी ड्राइवर बनने तक की कहानी
जानकारी के अनुसार रेखा लोहानी पांडे के पति मुकेश चंद्र पांडे एक आर्मी मैन साथ ही ले एक टैक्सी ड्राइवर भी थे। सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था, परंतु अचानक से मुकेश चंद्र पांडे का स्वास्थ्य खराब हो गया, जिस कारण वे टैक्सी चलाने में असमर्थ हो गए।
ऐसी स्थिति में पारिवारिक स्थिति खराब होने लगी थी, तो उन्होंने सोचा कि किसी कारण से ड्राइविंग कराई जा सकती है, परंतु उन्हें ड्राइवर भी नहीं मिल सके। इसीलिए इस कार्य के लिए स्वयं रेखा को मैदान में उतरना पड़ा। परिवार की आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए उन्होंने गाड़ी की स्टेरिंग को संभाल लिया। इस प्रकार में उत्तराखंड की पहली महिला ड्राइवर बनी। रेखा लोहानी की कहानी काफी दिलचस्प है और प्रेरणादायक भी।
वेल एजुकेटेड है रेखा लोहानी
बात करते हैं रेखा लोहानी की शिक्षा के विषय में तो आपको जानकर हैरानी होगी कि रेखा डबल M.A. और एलएलबी किए हुए हैं। वह एक वकील है। इसके बावजूद भी वे यह काम कर रही हैं, इसका कारण महिला और पुरुष के बीच का फर्क मिटाना है। उनका मानना है कि महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुष के बराबर है। महिलाएं पुरुषों द्वारा किए जा रहे हर कार्य को सफलतापूर्वक कर सकती हैं।



