बेटे को पढ़ाने के लिए पिता ने बेच दी जमीन, बेटे ने IPS ऑफिसर बनकर नाम रोशन किया: Struggle Story

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IPS Noorul Hasan
Meet Noorul Hasan, the youngest IPS Officer. Maharashtra success story of small town boy Noorul Hasan Who became IPS officer. UPSC Crack story and tips in Hindi.

File Photo

Nagpur: कई बार लोग अपनी गरीबी की वजह से अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाते हैं और अपने सपनो से पीछे हट जाते है, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए अपनी मंजिल पाकर ही रहते हैं। यदि हौसला बुलंद और इरादे नेक हो तो किसी भी मुकाम को हासिल करना मुश्किल नहीं है।

इस कहावत को सच कर दिखाया उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव के रहने वाले नूरुल हसन ने। एक बेहद गरीब परिवार से आने वाले नूरुल ने बिना कोचिंग के UPSC सिविल सेवा 2014 पास कर यह साबित कर दिया कि अगर जीवन में कुछ कर दिखाने का जुनून हो तो व्यक्ति हर मुश्किल परिस्थिति को पार कर सफलता हासिल कर सकता है।

नूरुल का मानना है कि इंसान की किस्मत और आर्थिक स्थिति उसकी लगन और मेहनत से बड़े नहीं होते। ऐसी ही कहानी है पीलीभीत के हरायपुर गांव के रहने वाले नुरूल हसन की जो महाराष्ट्र कैडर के आईपीएस ऑफिसर हैं। नुरूल के लिए इस मुकाम तक पहुंचना बिल्कुल भी इजी नहीं था, उन्हें कड़ा संघर्ष करना पड़ा, तब वह इस मंजिल तक पहुंचे हैं।

कई सफल अभ्यर्थियों के बारे में हमने अब तक आपको रूबरू करवाया है। आज हम जिस होशियार इंसान की चर्चा कर रहे हैं, उनका नाम है, नुरूल हसन (Noorul Hasan)। एक आईपीएस अफसर (IPS Officer) बनने से पहले उन्होंने BARC में बतौर वैज्ञानिक भी काम किया। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत के एक छोटे से गांव में रहने वाले नुरूल हसन के लिए आईपीएस तक का सफर कठिनाईयो से भरा हुआ था। उनकी कहानी हर युवाओं को प्रेरित करेगी। जो मुश्किल परिस्थिति से हार कर पीछे हट जाते है उनके लिए नरुल की कहानी किसी प्रेरणा से कम नही।

कौन है IPS नरुल

पीलीभीत के एक गांव हरायपुर के रहने वाले नुरूल हसन ने कड़ी मेहनत से अपने सपनों को साकार किया था। नुरूल का जन्म उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के पीलीभीत में हुआ। उनके पिता के पास ग्रेजुएशन की डिग्री थी, लेकिन अच्छी नौकरी नहीं मिली तो चतुर्थ वर्ग के कर्मचारी का काम करते रहे। मां खुद तो बहुत ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थीं लेकिन बच्चों को पढ़ाने का भरपूर जज्बा रखती थीं।

परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं होने की वजह से नुरूल की शुरुआती पढ़ाई लिखाई पीलीभीत में ही हुई। सपनो को सच करने के लिए हर परिस्थिति का डटकर मुकाबला किया। अपनी शुरुआती शिक्षा नुरूल ने एक सरकारी स्कूल से हिंदी मीडियम में की। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नही थी कि वो अच्छे स्कूल में शिक्षा ले सकते।

उन्होंने गुरुनानक हाईयर सेकेंड्री स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास की, इसके बाद उन्होंने बरेली स्थित भूषण इंटर कॉलेज से पढ़ाई की, उनके पिता एक छोटी सी नौकरी करते थे। नुरूल के परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी पेट भरने जे लिए खाना भी बहुत मुश्किल से नसीब हो पाता था। ऐसे स्थिति में पढ़ाई करना आसान नही था। लेकिन सपने को पूरा करना था, इसके लिए आगे बढ़ाना जरूरी समझा।

जब नुरूल ने दसवीं पास कर ली उस समय उनके पिता की बरेली में क्लास फोर कर्मचारी के पद पर नौकरी (Job) लगी। नुरूल को पढ़ने के लिए उनके पिता ने मलिन बस्ती में छोटा सा घर किराये पर लिया। वहां से उन्होंने बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी की। लेकिन पढ़ने के शौकीन नुरूल को जब 12वीं के बाद समझ नहीं आया कि आगे क्या करना चाहिए, तो दोस्तों की राय पर बीटेक करने का मन बना लिया। ये बात अलग है कि तब उन्हें बीटेक की पढ़ाई के बारे में कुछ भी नहीं पता था।

आगे वह बीटेक करना चाहते थे, परंतु उनके पिता के पास उतना पैसा हीं नहीं था कि वह उन्हें बीटेक (B Tech) करा सकें। लेकिन बेटे को पढ़ाना भी था। पिता ने बहुत विचार करने के बाद अपनी जमीन को बेचने का फैसला लिया। ये फैसला उनके लिए बहुत मुश्किल था, लेकिन बेटे की पढ़ाई के लिए उन्होंने उसे बेच दिया। उस समय बेटे की पढ़ाई ज्यादा महत्वपूर्ण थी, जो पैसे मिले उससे बेटे को B-TECH कराया।

बचपन से नही था अंग्रेजी का ज्ञान

गांव में इतनी अच्छी शिक्षा नही मिली कि बचपन से अंग्रेजी का ज्ञान होता। अंग्रेजी विषय की बेसिक पढ़ाई छठी क्लास से मिलनी शुरू हुई थी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अंग्रेजी को अपनी कमजोरी नहीं बनने दी। मेहनत कर उन्होंने अंग्रेजी में भी पकड़ बना ली। जाकिर हुसैन कॉलेज से बीटेक करने के बाद वो साल 2009 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी पहुंचे।

उन्होंने अपने पिता और चाचाजी की मदद से अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में दाखिला ले लिया। दरअसल नुरूल शुरू से ही ऐसे संस्थान में पढ़ाई करना चाहते थे जिसका खर्च वे उठा सकें। इस लिहाज से औरों के मुकाबले एएमयू उनके लिए बेहतर जगह थी। फिर भी दाखिले के बाद जब बात फीस भरने की आई तो भले ही पिता को जमीन बेचनी पड़ी, लेकिन उन्होंने बेटे की पढ़ाई जारी रखी।

नूरुल का जीवन चाहे जीतने संघर्षों से भरा रहा हो, लेकिन आगे बढ़ने की चाह ने उन्हें हमेशा प्रोत्साहित रखा। वैज्ञानिक के तौर पर काम करने के दौरान उनको वो खुशी नही मिली जो उनको चाहिए थी। उनको कुछ अधूरा सा लग रहा था। क्योंकि सपना तो कुछ ही बनने का था। फिर उन्होंने IAS बनने के लिए प्रेक्टिस शुरू कर दी। पहले एटेम्पट में वह प्रीलिम्स परीक्षा भी पास नहीं कर पाए। उन्होंने हार नही मानी।

इसके बाद और बेहतर तैयारी के साथ उन्होंने एक बार फिर परीक्षा दी और इस बार प्रीलिम्स और मेंस दोनों परीक्षा पास की हालाँकि इंटरव्यू में 129 मार्क्स आने के कारण उनका सेलेक्शन नहीं हो पाया। नूरुल ने इस असफलता से भी हार नहीं मानी और अपनी कमियों को सुधार कर 2014 में एक बार फिर से सिविल सेवा परीक्षा दी और इस बार उन्होंने ना सिर्फ परीक्षा पास की बल्कि इंटरव्यू में 190 मार्क्स हासिल कर IPS बनें।

शिक्षा ही है सफलता की कुंजी

यदि कोई व्यक्ति जीवन मे सफल होना चाहता है तो उसका माध्यम है शिक्षा। सफलता कभी भी आपकी अमीरी गरीबी नही देखती। सफलता तो कड़ी मेहनत की मोहताज है। IPS नूरुल हसन (IPS Noorul Hasan) का यही मानना है कि व्यक्ति अपने हालातों को शिक्षा के द्वारा ही बदल सकता है। वह कहते हैं कि यदि उनके पिता ने उनकी पढ़ाई के लिए ज़मीन नहीं बेची होती तो आज वह IPS नहीं होते। उनके पिता का फैसला गलत साबित नही होने दिया बेटे ने।

हर माता पिता को दी सीख

वह देश के हर माता पिता को यही मैसेज देना चाहते हैं कि चाहे घर में एक समय का खाना कम खाना पड़े पर अपने बच्चों को स्कूल ज़रूर भेजना चाहिए। बच्चों की पढ़ाई के लिए कभी पीछे नही हटना चाहिये। बच्चों की पढ़ाई के लिए जरूरी नही है कि माता पिता भी शिक्षित हो तभी बच्चों को भी शिक्षित बनाया जाए।

आजकल हर छोटे से छोटे गांव से बच्चे अफसर बनकर निकल रहे है। परिवार के साथ अपने गांव का भी नाम रौशन कर रहे है। इसके अलावा वह सभी युवाओं को भी यही सन्देश देते हैं कि मेहनत और लगन के द्वारा ही अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाया जा सकता है। नूरुल का कहना है की अगर आपमें हुनार है तो कोई भी बाधा आपके रास्ते को रोक नही सकती।

बच्चों को देते हैं मार्गदर्शन

नूरुल ने अपने जीवन में सही मार्गदर्शन की कमी को महसूस किया है। सही समय पर सही मार्गदर्शन ना मिलने के कारण उन्होंने बहुत मुश्किलो का सामना किया। वह बताते हैं कि 12वीं कक्षा तक उन्हें BTech के बारे में कुछ भी जानकारी नही थी। कि इसको कहा से करना होगा क्या पढ़ाई करनी होगी।

उनकी पढ़ाई के बीच उनकी गरीबी भी कुंडली मारकर बैठी हुई थी। परिवार में भी कोई ज्यादा शिक्षित नही था, जिससे सही मार्गदर्शन किया जा सके। शिक्षा के अभाव के कारण उन्हें इन सब मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। इसलिए उन्होंने अपना यूट्यूब चैनल बनाया। ये चैनल उन बच्चों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा जिसके पास हुनार तो है, लेकिन सही मार्गदर्शन नही।

वह अपने यूट्यूब चैनल ‘Free Academy’ द्वारा देश के लाखों बच्चों का मार्गदर्शन करते हैं, ताकि जिस परिस्थिति का सामना उन्हें करना पड़ा वह देश के किसी और बच्चों को ना करना पड़े। BARC में काम करते हुए नुरुल ने IPS बनने के अपने बचपन के सपनो को पूरा करने की ठानी।

इसके बाद तो वो बिना किसी कोचिंग या दूसरी मदद के पूरे जी जान से इसकी तैयारी में जुट गए और अपने दूसरे प्रयास में सिविल सर्विसेज की परीक्षा (Civil Service Exam) 2015 में 625वीं रैंक हासिल कर आईपीएस अफसर बने और अपने सपने को सच कर दिखाया। खुद कामयाबी हासिल करने के बाद नुरूल अब ना सिर्फ अपने छोटे भाई बहनों को उनके करियर को लेकर गाइड करते हैं, बल्कि समाज के हर कमजोर गरीब छात्रों की हर मुमकिन मदद के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।

किसे माना अपना आदर्श

नूरुल हसन पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) को अपना आदर्श मानते हैं। वह कहते हैं कि उनके इस सफर में कई लोगो ने उन्हें कहा कि उनके मुस्लिम समुदाय और गरीब परिवार से होने के कारण उनका UPSC सिविल सेवा में चयन होना कठिन बात है। परंतु उन्होंने अपने आत्मविश्वास और मेहनत से यह साबित कर दिखाया कि सफलता किसी धर्म या आर्थिक स्थिति की मोहताज नहीं।

मेहनत है कामयाबी का रास्ता

चाहे आप किसी भी जाति या समुदाय के हों लेकिन मेहनत कर हद से गुजरने का जुनून रखते हैं तो आप कुछ भी हासिल कर सकते हैं। महाराष्ट्र काडर के आईपीएस नुरूल हसन आईपीएस बनने से पहले एक साल तक BARC में सांइटिस्ट के पद पर भी काम कर चुके हैं। हालांकि सफलता के इस शिखर पर पहुंचने से पहले नुरूल हसन ने संघर्ष का एक लंबा सफर तय किया है।

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