सूबेदार की बेटी सेना में बनी लेफ्टिनेंट, दार्जिलिंग में मिली पहली पोस्टिंग, पिता की शान बनी बेटी

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Vinita Tripathi Indian Army
Subedar Daughter Vinita Tripathi Became Officer In Indian Army. Army Subedar Daughter Vinita Tripathi Became Lieutenant Now. Kanpur Daughter Success Story in Hindi.

File Photo

Kanpur, Uttar Pradesh: मेहनत करने वालों की कभी हार नही एक ना एक दिन मेहनत जरूर रंग लाती है। कहते हैं कि कामयाबी के पिछे परिवार का बहुत बड़ा हाथ होता है। आज के दौर में महिलाएं न सिर्फ अपने घर की जिम्मेदारी सम्भल रही है, बल्कि अपने घर और बाहर की भी जिम्मेदारी को संभालते हुए हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है।

शहर में रहने वाली या फिर पढ़ने वाली महिलाओं या लड़कियों के बारे में कहा जाता है कि शहरो की लड़कियां मॉर्डन रहती है, वो गांव की जिंदगी नही जीना जानती उनसे बहुत दूर रहती है। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नही है। चाहे गांव हो या शहर आज की महिलाए हर क्षेत्र में पुरुषों के समान अपना योगदान दे रही है।

हमारे देश मे इसके बहुत सारे उदाहरण भी देखे जाते है। हर व्यक्ति अपने जीवन में एक पहचान बनाना चाहता है और उसकी पहचान होती है, उसके नाम से। कद से ज़्यादा व्यक्ति का पद मायने रखता है। आज हम एक ऐसी युवती की कहानी बताने जा रहे हैं जिन्होने अपने परिवार के सदस्यों से सीख लेकर कामयाबी हासिल की है।

कौन है परिवार की पांचवीं सदस्य सेना में

विनीता कानपुर देहात के सेरुआ गजनेर की रहने वाली हैं। उनके पिता सूबेदार (Subedar) विपिन कुमार त्रिपाठी भी सेना में हैं। वहीं उनके भाई फिलहाल आर्मी स्कूल में दसवीं कक्षा में पढ़ रहे हैं। विनीता के छोटे भाई भी एनडीए (NDA) में जाना चाहते हैं। विनीता के चाचा विनय कुमार भी सेना में नायब सूबेदार है। जबकि उनके दूसरे चाचा अनुराग तिवारी एयरफोर्स में है।

उनका एक भाई विकास तिवारी (Vikash Tiwari) भी एयरफोर्स (Indian Air force) में है। कानपुर के किदवई नगर निवासी विनीता त्रिपाठी (Vinita Tripathi) का सेलेक्शन भारतीय सेना (Indian Army) में लेफ्टिनेंट के पद पर हुआ है। विनीता अपने परिवार की पांचवीं सदस्य हैं, जो सेना में शामिल हुई हैं। पिता विपिन त्रिपाठी (Vipin Tripathi) भी सूबेदार हैं। मूल रूप से कानपुर देहात के गांव सेरुआ, ब्लॉक सरवनखेड़ा की रहने वाली विनीता ने पिता की पोस्टिंग अलग-अलग स्थानों पर होते रहने के कारण देश के अलग-अलग शहरों में शिक्षा प्राप्त की है। दो माह पहले ही यूएन पीसकीपिंग मिशन, साउथ सूडान से वापस आए हैं।

विनीता का एक छोटा भाई है, जो आर्मी स्कूल (Army School) में 10वीं का छात्र है। उसका सपना (Dream) भी एनडीए करना है। विनीता के चाचा विनय कुमार सेना में नायब सूबेदार, दूसरे चाचा अनुराग तिवारी एयरफोर्स में और एक भाई विकास तिवारी एयरफोर्स में हैं। एक परिवार से पांचवीं सदस्य के रूप में सेना में शामिल हुईं विनीता ने अब तक सर्वोच्च पद पाकर परिवार का मान गर्व से ऊंचा कर दिया है।

विनीता की प्रारंभिक शिक्षा सेंट मैरी स्कूल, बर्रा आठ से हुई है। इसके बाद पिता की नौकरी की वजह से आगे की पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय बीकानेर, जोशीमठ, एनडीए पुणे से की। विनीता ने आईएनएचएस अश्विनी हॉस्पिटल कोलाबा मुंबई से बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई की है। लिखित परीक्षा के साथ उन्होंने इंटरव्यू को क्वालीफाई कर सफलता हासिल की।

पांच साल की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद विनीता को 18 मार्च गुरुवार को आईएनएचएस अस्पताल कोलाबा मुंबई से सेना में ऑफिसर रैंक मिली। 12वीं पास करने के बाद उनका चयन एमएनएस (मिलिट्री नर्सिंग सर्विस) सर्विस में हो गया। उसके बाद पांच साल के प्रशिक्षण के बाद गुरुवार को उनकी पासिंग आउट परेड मुंबई में हुई। उनकी पहली पोस्टिंग 158 बेस अस्पताल बागडोगरा (दार्जिलिंग) में हुई है।

अपने क्षेत्र का नाम किया रौशन

कानपुर (Kanpur) का नाम रोशन करने में एक और बेटी का नाम जुड़ गया है। जिस बेटी की बात कर रहे हैं वह सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल बनी हैं। भारतीय सेना में कमीशन रैंक प्राप्त कर विनीता ने सिर्फ परिवार का ही नहीं, बल्कि अपने गांव और कानपुर का भी नाम रोशन किया है। विनीता ने ये साबित कर दिखाया कि बेटी भी हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने में पीछे नही है। विनीता अपने परिवार की पांचवीं सदस्य हैं, जो देश सेवा के लिए सेना में गई हैं। कमीशन मिलने के बाद लेफ्टिनेंट विनीता की पहली पोस्टिंग दार्जिलिंग स्थित 158 बेस हॉस्पिटल, बागडोगरा में हुई है।

सेना की ट्रेंनिग आसान नही

विनीता (Vinita Tripathi Indian Army) ने बताया कि इस मुकाम तक पहुचने के लिए उन्होने बहुत मेहनत की है। इसमें कोई शक नहीं है कि सेना का प्रशिक्षण काफी मुश्किल से भरा होता है। पहले दो साल तो मात्र तीन-तीन घंटे की ही नींद मिलती है, पूरे दिन को टाईमटेबल बनाया जाता है कि एक मिनट बैठने का वक्त नहीं मिल पाता है। होम Work load भी रहती है। लेकिन इन सबसे ऊपर है सेना में आना। यह गर्व और सम्मान की बात है।

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